Tikamgarh News: बुंदेलखंड में वर्षा और जल संकट पर सुचिता जैन ने किया शोध कार्य, बढ़ाया क्षेत्र का मान
'बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षा के सांख्यिकीय वितरण और प्रवृत्ति का अध्ययन एवं विश्लेषण' विषय पर टीकमगढ़ की सुचिता जैन बड़कुल ने शोध कार्य करके जलसंकट के समाधान को लेकर कई जरूरी सुझाव दिया है। साथ ही महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट से साइंस विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
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“भंवरा का पानी गजब कर जाए, मोर गगरी ना टूटे, खसम मर जाए…” इस लोककथा में छिपा दर्द बताता है कि यहां पानी की एक-एक बूंद कितनी कीमती रही है। बुंदेलखंड की प्यास ने न जाने कितने परिवारों की जिंदगी बदल दी। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश की पहली पूर्व महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी जब कर्वी चित्रकूट आई थीं, तब पानी की समस्या सुनकर मंच पर भावुक होकर रो पड़ी थीं। इन दिनों गर्मी की वजह से चर्चा में आए बांदा क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर बांदा के पद्मश्री उमाशंकर पांडे का योगदान भी हमेशा याद किया जाएगा। “हर खेत पर मेढ़ और मेढ़ पर पेड़” का उनका संदेश आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
सुचिता ने जल प्रबंधन से जुड़े कई सुझाव भी प्रस्तुत किए
इसीक्रम में टीकमगढ़ निवासी सुचिता जैन बड़कुल ने महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट से साइंस विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनकी मौखिक परीक्षा हाल ही में विश्वविद्यालय में आयोजित की गई। सुचिता ने अपने शोध का विषय “बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षा के सांख्यिकीय वितरण और प्रवृत्ति का अध्ययन एवं विश्लेषण” चुना। यह शोध बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट और वर्षा के पैटर्न पर आधारित है। शोध के दौरान उन्होंने जल प्रबंधन से जुड़े कई सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिन्हें विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण बताया।
शोध क्षेत्र के लिए उपयोगी
पीएचडी शोध का मूल्यांकन विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के प्रोफेसर टेलर द्वारा किया गया। उन्होंने शोध कार्य की सराहना की। बताया गया कि शोध में क्षेत्र में वर्षा की स्थिति, उसके प्रभाव और जल संरक्षण की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है। बुंदेलखंड लंबे समय से जल संकट और अनियमित वर्षा की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में इस विषय पर किया गया शोध क्षेत्र के लिए उपयोगी माना जा रहा है। वहीं, बुंदेलखंड के लोगों का कहना है कि अनिल बड़कुल की बेटी सुचिता ने साइंस विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल कर बुंदेलखंड का गौरव बढ़ाया। लोगों ने इस बीच जल संकट को लेकर ठोस समाधान की उम्मीद जताई है।
ये भी पढ़ें- Indore News: जलसंकट पर महंगाई की मार, टैंकरों का पानी भी महंगा; 800 रुपये वाला टैंकर मिल रहा 1200 रुपये में यह शोध कार्य इसलिए भी खास है क्योंकि एक समय ऐसा था, जब बुंदेलखंड में उच्च और व्यावसायिक शिक्षा की कल्पना तक कठिन मानी जाती थी। वर्ष 1990 का वह दौर लोगों को आज भी याद है, जब यहां शिक्षा के संसाधन बेहद सीमित थे। लेकिन समय बदला, मेहनत रंग लाई और आज इसी धरती की बेटियां शोध और विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं।

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