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Twisha Case: 'खुद को निर्दोष मानती हैं तो समर्थ को फरार क्यों कराया?', सीबीआई का सास गिरिबाला सिंह से सवाल

Sat, 30 May 2026 09:52 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: भोपाल ब्यूरो Updated Sat, 30 May 2026 09:52 PM IST
सार

भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सीबीआई पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह से पूछताछ कर रही है। एजेंसी ने फरारी, प्रताड़ना और बयानों में विरोधाभास पर सवाल उठाए हैं। घटनास्थल पर री-क्रिएशन भी कराया जाएगा।

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Twisha sharma Case Update CBI Questions Mother-in-Law Giribala Singh on Samarth Disappearance
त्विषा की सास गिरिबाला सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सीबीआई सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे तथा त्विषा के पति अधिवक्ता समर्थ सिंह से लगातार पूछताछ कर रही है। गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार हैं। सीबीआई दोनों को दो जून तक रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

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शनिवार को सीबीआई अधिकारियों ने गिरिबाला सिंह से कई तीखे सवाल किए। अधिकारियों ने पूछा कि आप अपने बयानों में खुद को त्विषा की देखभाल करने वाली सास के रूप में पेश कर रही हैं। यदि आप खुद को निर्दोष मानती हैं तो त्विषा की संदिग्ध मौत के बाद उसके पति और अपने बेटे समर्थ सिंह को फरार क्यों कराया? बहू की मौत के बाद संवेदना व्यक्त करने और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करने के बजाय मीडिया के सामने उसके चरित्र पर सवाल क्यों उठाए?

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सीबीआई ने यह भी पूछा कि आप वर्षों तक न्यायिक सेवा में रहीं और महिला अपराधों से जुड़े कई मामलों में फैसले सुनाए। किसी घटना के बाद यदि कोई व्यक्ति फरार हो जाए तो प्रथम दृष्टया क्या उसे आरोपी नहीं माना जाता? यदि आपने और आपके बेटे ने कोई अपराध नहीं किया था, तो फिर उसे बचाने और खुद को सुरक्षित करने की कोशिश क्यों की गई?

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गिरिबाला ने माना- मौत के बाद घबराहट में हुईं गलतियां
सीबीआई पूछताछ में गिरिबाला सिंह ने माना कि त्विषा की मौत के बाद उनसे कुछ गलतियां हुईं। उन्होंने स्वीकार किया कि समर्थ सिंह को पति होने के नाते वहीं रहना चाहिए था, उसे भोपाल छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी माना कि बहू के चरित्र पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाने चाहिए थे। साथ ही पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कराकर जांच में सहयोग करना चाहिए था, न कि पूरे मामले से दूरी बना लेनी चाहिए थी। सीबीआई ने समर्थ सिंह से पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर जब गिरिबाला सिंह से सवाल किए तो कुछ जवाब अलग सामने आए। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि मां-बेटे में कौन सच बोल रहा है या दोनों अलग-अलग कहानी बता रहे हैं।

त्विषा की चैट और भाई के ऑडियो पर नहीं दे सकीं स्पष्ट जवाब
सीबीआई अधिकारियों ने गिरिबाला सिंह को उनके और त्विषा के भाई मेजर हर्षित शर्मा के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्डेड ऑडियो सुनाया। अधिकारियों ने पूछा कि अप्रैल में जब आपके और त्विषा के संबंध इतने तनावपूर्ण थे, तो कुछ ही दिनों बाद ऐसा क्या हुआ कि आप खुद को उसकी मां जैसा बताने लगीं?

गिरिबाला ने अपने बयान में कहा है कि त्विषा उन्हें मां कहती थी और वह सास होने के साथ उसकी मां जैसी थीं। इस पर सीबीआई ने त्विषा की अपनी मां, भाई, बहन, सहेली और पिता के साथ हुई व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट और प्रिंटआउट दिखाए। इनमें मारपीट, प्रताड़ना, चरित्र पर शक और अपमानजनक टिप्पणियों के आरोप दर्ज हैं। इन सवालों पर गिरिबाला सिंह अधिकांश मामलों में स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं। कुछ मामलों में उन्होंने जवाब दिए, लेकिन सीबीआई उनसे संतुष्ट नहीं हुई।

पढ़ें: त्विषा शर्मा केस: गिरिबाला सिंह को उपभोक्ता आयोग से हटाने पर मंथन, नियमों में निलंबन का प्रावधान नहीं

80 किलो की डमी के साथ होगा घटनाक्रम का री-क्रिएशन
सीबीआई शनिवार-रविवार की दरमियानी रात गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित उनके घर लेकर जाने की तैयारी में है। यहां त्विषा शर्मा की मौत से जुड़े घटनाक्रम का फिर से री-क्रिएशन किया जाएगा। इसके लिए सीबीआई ने लगभग 80 किलोग्राम वजन की डमी तैयार कराई है। डमी को उसी तरह फंदे से लटकाया जाएगा, जैसा घटना के समय बताया गया था। इसके बाद समर्थ सिंह डमी को फंदे से उतारेंगे और गिरिबाला सिंह गले में लगी गांठ खोलेंगी। मां-बेटे ने पुलिस और सीबीआई को अपने बयानों में यही घटनाक्रम बताया है। पूरे दृश्यांकन के बाद सीबीआई घर के सीसीटीवी फुटेज, समर्थ के मौसेरे भाई की मौजूदगी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने का प्रयास करेगी।

चर्चा में आया गिरिबाला सिंह का अंतिम न्यायिक फैसला
सीबीआई रिमांड के बीच गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल का अंतिम फैसला भी चर्चा में है। यह फैसला भोपाल के चर्चित फैज कुरैशी हत्याकांड से जुड़ा था। 13 फरवरी 2023 को अदालत ने आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। मामला 25 जुलाई 2021 का था, जब तलैया थाना क्षेत्र स्थित ईदगाह स्कूल ग्राउंड के पास फैज कुरैशी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी।

पुलिस ने शफीक कुरैशी को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने बयानों से मुकर गए। अदालत ने कहा था कि केवल पुलिस अधिकारियों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं हैं। एफएसएल रिपोर्ट भी आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सकी। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था।

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