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देश में सबसे पहली होली महाकाल में: भस्मारती में चढ़ा रंग-गुलाल, पुजारियों ने खेली बाबा संग होली

Fri, 18 Mar 2022 08:45 AM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Fri, 18 Mar 2022 08:45 AM IST
सार

देश में रंगों के त्योहार होली की अलग ही छटा होती है। उसमें भक्ति का रंग मिलने पर उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के आंगन में सबसे पहले होली मनाई जाएगी। 17 मार्च की शाम को होलिका दहन हुआ। अब महाकालेश्वर की दिनचर्या और आरतियों के समय में बदलाव होगा। महाकाल को ठंडे पानी से स्नान करवाया जाएगा। 

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Ujjain: Mahakal will play Holi first in the country, routine will change and will bathe with cold water
भस्मारती में बाबा महाकाल को रंग अबीर लगाया गया। - फोटो : सोशल मीडिया
देश में सबसे पहले उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के आंगन में होली मनाई गई। शुक्रवार सुबह भस्म आरती में बाबा महाकाल को रंग-गुलाल लगाकर पुजरियों ने रंगोत्सव का शुभारंभ किया। इससे पहले गुरुवार को भी परंपरानुसार संध्या आरती में बाबा को अबीर, गुलाल लगाया गया था। आरती के बाद महाकाल मंदिर परिसर में मंत्रोचार के साथ होलिका दहन किया गया। पुजारियों ने फूलों की होली खेली। मंदिर परिसर में पहुंचे भक्तों ने भी खूब गुलाल खेला। 


होली से लेकर रंग पंचमी तक अब हर दिन रंगों की बौछार होगी और जन-मन इससे सराबोर होगा। इस बार होली क सबसे ज्यादा उत्साह महाकाल मंदिर में है। दरअसल, कोरोना के कारण पिछले दो सालों से रंगों का यह पर्व फीका रहा, लेकिन इस बार इसे उत्साह और उल्लास से मनाया जा रहा है। देश में सबसे पहले महाकाल के आंगन में ही होली मनाई जाती है। होलिका दहन के साथ ही सुबह भस्मारती के मौके पर बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। सभी ने महाकाल को नमन कर एक-दूसरे को गुलाल लगाया। 
Ujjain: Mahakal will play Holi first in the country, routine will change and will bathe with cold water
भक्तों ने जमकर गुलाल उड़ाया। - फोटो : अमर उजाला
इस बार 17 मार्च को शाम 7 बजे होलिका दहन किया गया। महाकाल मंदिर में होली खेली गई और महाकालेश्वर को हर्बल गुलाल अर्पित किए गए। सबसे पहले यहीं होलिका दहन किया जाता है। महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित कर मंदिर में होली खेलने की शुरुआत हुई। रंगपंचमी पर टेसू के फूलों से बनाए गए प्राकृतिक रंगों से होली खेली जाएगी। कोरोना के कारण होली व रंगपंचमी पर श्रद्धालु महाकाल मंदिर नहीं जा पा रहे थे, लेकिन इस बार रोक हटने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकाल के आंगन पहुंच रहे हैं और होली उत्सव में शामिल हो रहे हैं। 


Ujjain: Mahakal will play Holi first in the country, routine will change and will bathe with cold water
गुरुवार को महाकाल की भस्मारती का शृंगार - फोटो : अमर उजाला
होली से बदलेगी भगवान महाकालेश्वर की दिनचर्या
होली के दिन से ही महाकालेश्वर की दिनचर्या भी बदल रही है। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली आरतियों के समय में गुरुवार से परिवर्तन हो जाएगा। महाकाल को ठंडे पानी से स्नान करवाने का सिलसिला शुरू होगा। मंदिर के पुजारियों के अनुसार प्रतिवर्ष दो बार बाबा महाकाल की आरतियों के समय में बदलाव किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा अनुसार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 17 मार्च को होलिका दहन के दिन किया जाएगा।

आरतियों के समय में आधा घंटे का बदलाव होता है और दिनचर्या बदल जाती है। संध्याकालीन पूजा शाम 5 बजे से ही होगी। अश्विन मास की पूर्णिमा तक आरतियों का यह क्रम चलेगा। बाबा महाकाल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी से गर्म जल से स्नान करना शुरू करते हैं। होली तक यही चलता है। इसके बाद होली से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक रोज भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। होली के दिन से प्रथम भस्म आरती - प्रात: 4 से 6 बजे तक, द्वितीय दद्योदक आरती प्रात: 7 से 7:45 बजे तक, तृतीय भोग आरती प्रात: 10 से 10: 45 बजे तक, चतुर्थ संध्याकालीन पूजन शाम 5 से 5:45 बजे तक, पंचम संध्या आरती शाम 7 से 7:45 बजे तक और शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक होगी।
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