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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Mahakal Temple Bridge Jump Test Owaisi Questions Method After 200 Guards Made to Jump PWD Issues Clarification

महाकाल मंदिर के ओवरब्रिज पर जंपिंग टेस्ट: 200 गार्डों से कराई उछल-कूद, ओवैसी ने उठाए सवाल; PWD ने क्या कहा?

Wed, 19 Aug 2026 10:01 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Wed, 19 Aug 2026 10:01 AM IST
सार

उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में नागपंचमी पर श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बनाए गए 91 फीट लंबे फुट ओवरब्रिज का जंपिंग टेस्ट चर्चा में है। ब्रिज की मजबूती जांचने के लिए करीब 200 सुरक्षा गार्डों से एक साथ उछल-कूद करवाई गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 

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Mahakal Temple Bridge Jump Test Owaisi Questions Method After 200 Guards Made to Jump PWD Issues Clarification
महाकाल मंदिर परिसर का ओवरब्रिज बना चर्चाओं का विषय - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर परिसर में नागपंचमी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया 91 फीट लंबा फुट ओवरब्रिज अब विवादों के घेरे में है। ब्रिज की क्षमता जांचने के लिए 200 सुरक्षा गार्डों से एक साथ 10 मिनट तक उछल-कूद करवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, नागपंचमी के मौके पर लाखों श्रद्धालुओं को नागचंद्रेश्वर मंदिर तक ले जाने के लिए यह ब्रिज बनाया गया था। ब्रिज पर भारी भीड़ का दबाव रहेगा, इसे देखते हुए PWD ने इसकी मजबूती परखने के लिए यह टेस्ट करवाया।
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इस मामले पर पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री अजय यादव ने बताया कि यह एरो ब्रिज उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा बनाया गया था। इसकी मजबूती के लिए सेतु विभाग एवं कार्यपालन यंत्री, PWD की ओर से पत्र मिला था। साथ ही कलेक्टर रोशन कुमार सिंह द्वारा भी इस ब्रिज की मजबूती परखने के लिए जंपिंग टेस्ट करवाने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि इस ब्रिज पर एक दिन में ही लाखों श्रद्धालु तेजी से गुजरते हैं और दौड़ लगाते हैं। ऐसे में कहीं कंपन जैसी स्थिति तो नहीं बन रही है या ब्रिज किसी हादसे का कारण तो नहीं बन सकता है, यह जांचना जरूरी था। इसी वजह से ब्रिज की जांच के लिए सुरक्षा गार्डों का उपयोग किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए यह जंपिंग टेस्ट पूरी तरह सफल रहा। टेस्ट के बाद ब्रिज को सुरक्षित पाए जाने पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था।
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ओवैसी ने ट्वीट कर कसा तंज
इस देसी तरीके के टेस्ट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर तंज कसा, जिसके बाद मामला गरमा गया। उनके ट्वीट पर लोगों ने सवाल उठाया कि इस अजीबोगरीब टेस्ट के दौरान यदि दुर्घटना हो जाती या पुल टूट जाता, तो हताहत होने वाले गार्डों का जिम्मेदार कौन होता? लोगों ने यह भी सवाल किया कि क्या आज के दौर में ब्रिज की मजबूती जांचने के लिए उचित वैज्ञानिक संसाधन और प्रशासनिक प्रक्रियाएं मौजूद नहीं हैं। आधुनिकता के इस दौर में इंजीनियरों, क्वालिटी कंट्रोल लैब और वैज्ञानिक तकनीकों को दरकिनार कर इस तरह देसी तरीके से जांच करने पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर टेस्ट के दौरान कोई दुर्घटना हो जाती या ब्रिज टूट जाता तो जिम्मेदारी कौन लेता। लोगों का कहना है कि आज के दौर में ब्रिज की मजबूती जांचने के लिए लोड टेस्टिंग मशीन, स्ट्रक्चरल ऑडिट और अन्य वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में मानव जंप टेस्ट करवाना कितना उचित है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।फिलहाल प्रशासन ने कहा है कि टेस्ट के बाद ब्रिज पूरी तरह सुरक्षित पाया गया और इसका उपयोग नागपंचमी पर श्रद्धालुओं के लिए किया गया।

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वर्ष में केवल एक बार काम आता है ब्रिज
बताया जाता है कि 91 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा यह पुल महाकाल मंदिर परिसर में ही स्थित है, जो विट्ठल पंढरीनाथ मंदिर इलाके को नागचंद्रेश्वर मंदिर की ओर जाने वाले छत के लेवल से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई का पांच फीट हिस्सा आने के लिए और बाकी पांच फीट हिस्सा जाने के लिए तय है। पांच खंभों पर टिका यह पुल वर्ष 2022 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से एक दानदाता की मदद से बनाया गया था और इसका कुल चार बार नागपंचमी के दौरान उपयोग किया जा चुका है।

इसीलिए हुआ परीक्षण
ब्रिज कॉरपोरेशन और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने इस ब्रिज को नागपंचमी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर की जा रही एक तैयारी बताया। इस अनोखे लोड टेस्ट में सुरक्षा गार्डों को पहले ब्रिज पर तेजी से चलाया गया और फिर एक साथ क्रमबद्ध तरीके से कूदकर पुल के बोल्ट, जॉइंट्स और संरचनात्मक मजबूती को परखा गया। टेस्ट में ढांचा पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही इंजीनियरों ने नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए इस ओवरब्रिज को हरी झंडी दी थी।

 

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