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Ujjain News: इस्कॉन में स्नान पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने किया भगवान जगन्नाथ का जलाभिषेक
Mon, 29 Jun 2026 04:35 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
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Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 04:35 PM IST
सार
उज्जैन के इस्कॉन मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की स्नान पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। 108 कलशों से अभिषेक और गजवेश दर्शन आकर्षण रहे। आयोजन जलगंगा संवर्द्धन अभियान से जुड़ा रहा। अब भगवान 15 दिन अनवसर विश्राम करेंगे, इसके बाद 16 जुलाई को भव्य रथ यात्रा निकलेगी।
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ऐसे मनाया गया उत्सव
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विस्तार
धर्मनगरी उज्जैन में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। इस्कॉन मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की दिव्य स्नान पूर्णिमा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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इस वर्ष स्नान पूर्णिमा महोत्सव को मध्यप्रदेश शासन के जलगंगा संवर्द्धन अभियान के समापन उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रदेशभर के जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण और पुनरुद्धार के कार्य हुए हैं। इन्हीं पवित्र जल स्रोतों से लाए गए जल से भगवान जगन्नाथ का महाअभिषेक किया जा रहा है। यह आयोजन जल संरक्षण के साथ आस्था को जोड़ने का सुंदर संदेश दे रहा है।
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पांडु-विजय से हुई शुरुआत, गजवेश दर्शन बने आकर्षण
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः पांडु-विजय कीर्तन से हुई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी को स्नान वेदी पर विराजित कर 108 कलशों से दिव्य अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं को अपने हाथों से भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य मिला। अभिषेक के बाद भगवान के गजवेश स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
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हरिनाम संकीर्तन से गूंजा मंदिर परिसर
पूरे आयोजन के दौरान हरिनाम संकीर्तन, भक्ति संगीत और महाप्रसाद वितरण चलता रहा। मंदिर परिसर भगवान जगन्नाथ के जयघोष और मृदंग की धुन से भक्तिमय हो उठा। भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
15 दिन अनवसर, फिर निकलेगी भव्य रथ यात्रा
इस्कॉन उज्जैन के कम्युनिकेशन डायरेक्टर राघव पंडित दास ने बताया कि स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अनवसर विश्राम में रहेंगे। इस दौरान मंदिर में दर्शन बंद रहेंगे। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी की भव्य रथ यात्रा नगर भ्रमण के लिए निकाली जाएगी।
श्रद्धा और जल संरक्षण का संगम
स्नान पूर्णिमा महोत्सव ने आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। जलगंगा अभियान से जुड़कर यह आयोजन धर्म और सामाजिक दायित्व का प्रतीक बन गया।

ऐसे मनाया गया उत्सव

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