खंडवा के वन क्षेत्र में सोमवार सुबह से ही बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई जारी है। यह कार्रवाई उसी अमाखुजरी वन परिक्षेत्र में की जा रही है, जहां रविवार को करीब 150 से अधिक अतिक्रमणकारियों ने वन विभाग के गश्ती दल पर हमला कर वनकर्मियों को घायल कर दिया था। इसी घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 90 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान शुरू किया है। इस दौरान जिला प्रशासन के बुलडोजर और जेसीबी मशीनें लगातार कार्रवाई में जुटी हैं। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था के लिए 600 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के साथ वन विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन का अमला मौके पर मौजूद है।
600 से अधिक जवान और 25 जेसीबी मशीनें तैनात
खंडवा के डीएफओ राकेश डामोर ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 80 से 90 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा था, जिसे आज पूरी तरह हटाया जाएगा। इस अभियान में वन विभाग, पुलिस और प्रशासन के करीब 600 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। साथ ही 25 जेसीबी मशीनों की मदद से दोपहर तक कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि अतिक्रमणकारी मुख्य रूप से सेंधवा, बड़वानी और बुरहानपुर जैसे आसपास के जिलों से पलायन कर यहां पहुंचते हैं और जंगल की कटाई कर वन भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास करते हैं। कार्रवाई के दौरान लोडिंग वाहन भी लगाए गए हैं, जिनमें अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई झोपड़ियों को हटाकर उनका सामान जब्त किया जा रहा है।
डीएफओ राकेश डामोर ने बताया कि रविवार को वन विभाग के गश्ती दल पर बड़ी संख्या में अतिक्रमणकारियों ने हमला किया था, जिसमें पांच वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
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उन्होंने बताया कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष में खंडवा जिले में 2,130 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है। इसके बाद इन क्षेत्रों में दोबारा वन विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। नहार माल और कुमठा क्षेत्र की लगभग 1,800 हेक्टेयर भूमि पर वॉच टावर और वन चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं, जो वर्तमान में संचालित हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई वन भूमि दोबारा कब्जे में न जाए। इसी उद्देश्य से अमाखुजरी क्षेत्र में भी वॉच टावर और वन चौकियां बनाई जाएंगी, ताकि एसएएफ और वन विभाग की टीम नियमित गश्त कर सके और जंगल की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।