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विश्व स्वास्थ्य दिवस आज: चिकित्सा शिक्षा में इंदौर हमेशा अग्रणी रहा, 1870 में हुई थी शुरुआत

Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Tue, 07 Apr 2026 06:16 AM IST
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सार

इंदौर में चिकित्सा व्यवस्था वैद्य-हकीम से शुरू होकर धीरे-धीरे एलोपैथी तक विकसित हुई। शुरुआती विरोध के बाद मेडिकल स्कूल और अस्पताल स्थापित हुए। एमवाय अस्पताल के साथ शहर प्रमुख चिकित्सा केंद्र बना। 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना है।

World Health Day today: Indore has always been a leader in medical education, started in 1870
एमवाय अस्पताल और महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के 6 जून 1948 को आयोजित भूमिपूजन समारोह में देश की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर और तत्कालीन मध्य भारत के प्रथम मुख्यमंत्री लीलाधर जोशी मुख्य अतिथि थे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अपने जन्म के समय से इंदौर मध्य भारत का अग्रणी नगर रहा है। मध्य प्रदेश में आज यह चिकित्सा के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है, क्योंकि देश के सभी बड़े अस्पताल समूह इंदौर में हैं। शुरुआत में वैद्य, हकीम और आयुर्वेद के साथ झाड़-फूंक से इलाज का चलन था। सामान्य जन मानस का पुरातन चिकित्सा पर अधिक विश्वास था। अंग्रेजी इलाज पर हर किसी का विश्वास नहीं था, लेकिन राजवाड़ा के समीप गोपाल मंदिर के पास पाश्चात्य चिकित्सा से इलाज का दवाखाना आरंभ किया गया था, हालांकि, इस पर लोगों को विश्वास नहीं था। 
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अस्पताल को जला दिया गया था
अंग्रेजी चिकित्सा के प्रति कई भ्रांतियां इंदौर के लोगों में प्रचलित थीं। लोगों में यह भय था कि यूरोपीय इलाज आम आदमी के लिए खतरा है। 1857 के विद्रोह में नगर में हलचल थी। इसी का लाभ उठा कर जनता ने अपना गुस्सा विदेशी लोगों के प्रति जाहिर करने के उद्देश्य से इस अस्पताल में आग लगा दी थी। 
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रेसीडेंसी में आरंभ हुआ मेडिकल स्कूल
इंदौर में अंग्रेजी चिकित्सा की उचित सुरक्षा के अभाव और लोगों की अरुचि के चलते विशेष सैन्य छावनी रेसीडेंसी क्षेत्र में 1878 में अंग्रेज अधिकारी ब्लूमांट के प्रयासों से किंग एडवर्ड मेडिकल चिकित्सालय आरंभ हुआ था। इससे पूर्व 1870 में अंग्रेजी चिकित्सा का प्रयास हो चुका था। मेडिकल चिकित्सालय में छात्र पढ़ने के लिए तैयार नहीं थे। प्रथम बैच में मात्र चार छात्र थे, उन्हें भी भी छह रुपये प्रति माह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती थी। 1891 में इस मेडिकल स्कूल में पहली महिला शांतिबाई खोत ने प्रवेश लिया था। धीरे-धीरे अंग्रेजी चिकित्सा में विश्वास बढ़ता गया और छात्रों की संख्या में वृद्धि होती गई। बाद में यही मेडिकल स्कूल वर्तमान का महात्मा गांधी स्मृति मेडिकल कॉलेज बनकर नगर में विद्यमान है। 

 

World Health Day today: Indore has always been a leader in medical education, started in 1870
इंदौर में एमवाय अस्पताल का जब शुभारंभ हुआ था - फोटो : अमर उजाला
धीरे धीरे बढ़ी एलोपैथी चिकित्सा
इंदौर के रेसीडेंसी क्षेत्र में पाश्चात्य चिकित्सा की ख्याति धीरे-धीरे बढ़ती गई। इसी के चलते नगर में 1882 में मल्हारगंज में एक अस्पताल आरंभ किया गया। 1891 में अस्पतालों का विस्तार भी किया गया और इनका नाम होलकर चिकित्सालय रखा गया। शहर में शुरू हुआ विदेशी चिकित्सा पद्धति से इलाज जल्द ही लोगों को अच्छा लगने लगा और इन अस्पतालों की शाखाएं देवास और धार में भी आरंभ की गई। 

1948 में बड़े अस्पताल का कार्य शुरू हुआ
आखिरकार सेंट्रल इंडिया में एक भव्य अस्पताल की योजना 1939 में विचार किया गया पर विश्वयुद्ध के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इसके बाद 1948 में बड़े अस्पताल यानी महाराजा यशवंत राव होलकर अस्पताल 'एमवायएच' का कार्य आरंभ हुआ, यह 66 लाख रुपये की लागत से चार लाख वर्ग फीट में 1955 में बनकर तैयार हुआ। यह अस्पताल सात मंजिला और 730 पलंग की क्षमता के साथ उस दौर की सभी सुविधाओं वाला अस्पताल था। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से निकले कई चिकित्सक आज देश विदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शहर में आज कई चिकित्सा कॉलेज और अस्पताल स्थित हैं।   

विश्व स्वास्थ्य दिवस की यह है थीम
विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को 1950 से मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 1948 में हुई थी।  यह दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी बातों को प्रति लोगों को जागरूक करना और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना है। इस वर्ष इस दिवस की मुख्य थीम स्वास्थ्य के लिए एकजुट और विज्ञान के साथ खड़े रहना है। 
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