फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   story of a couple Dr Snehkiran Raghuvanshi and Dr Suneet Singh.

माई सिटी टॉक्स: घरवालों को मनाने में लगे दस साल, एक-दूसरे की ताकत बने रहे स्नेहकिरन व सुनीत

Mon, 10 Feb 2020 02:46 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 10 Feb 2020 02:46 PM IST
विज्ञापन
story of a couple Dr Snehkiran Raghuvanshi and Dr Suneet Singh.
डॉ. स्नेहकिरन रघुवंशी और डॉ. सुनीत सिंह - फोटो : amar ujala

मशहूर फिल्मकारों का अमर उजाला के पाठकों से सीधा संवाद कराने और उन्हें फिल्मी सितारों से रूबरू कराने की अगली कड़ी इस बार आगरा में होगी। ‘माई सिटी टॉक्स-लव आजकल’ नामक इस कार्यक्रम के तहत कलाकारों से मिलने के लिए जोड़ियों का चयन उनकी प्रेम कहानी के आधार पर किया जा रहा है। लखनऊ से डॉ. स्नेहकिरन रघुवंशी और डॉ. सुनीत सिंह की कहानी चुनी गई है, जिसे आज के अंक में प्रकाशित किया जा रहा है। चुनी गई कहानियों से सिर्फ 10 भाग्यशाली जोड़ियों को कलाकारों से मिलने का मौका आगरा में मिलेगा। आगे पढ़ें ये कहानी:

विज्ञापन


मैं डॉ. स्नेहकिरन रघुवंशी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग में सीनियर रेजीडेंट हूं। मेरे पति डॉ. सुनीत सिंह आर्थोडॉन्टिस्ट हैं, प्राइवेट प्रैक्टिशनर। हमारी पहली मुलाकात 2007 में हुई, जब हमने बीडीएस में एडमिशन लिया था।
विज्ञापन


कुछ समय साथ बिताने के बाद हम दोनों ने ही समझ लिया था कि हम एक दूसरे के लिए बने हैं। हालांकि वो उम्र का तकाजा था और कॉलेज वाला प्यार, जिसमें तय किया कि ये दोस्ती हमेशा बनी रहे, इसलिए हम शादी करेंगे। हमें दस साल लग गए घरवालों को मनाने में। हम इस संघर्ष में एक दूसरे की ताकत बने रहे और जीत हमारी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक दूसरे के साथ, एक वादा और एक इरादा कर चुके हम दोनों अपने-अपने कॅरिअर में आगे बढ़ने लगे। हालांकि इस बीच हमने अपने फैसले की जानकारी परिवार वालों को दी, लेकिन उनकी अपनी सोच, परंपराएं, मान्यताएं..., हमारा रास्ता रोक रही थीं।

'विरोध करने के बजाय तय किया कि पहले अपना कॅरिअर बनाएंगे'

डॉ. स्नेहकिरन आगे कहती हैं कि हमने विरोध करने के बजाय तय किया कि पहले अपना कॅरिअर बनाएंगे। सामाजिक बंधनों और मान्यताओं का दबाव हम पर था, लेकिन सुनीत सिर्फ इतना कहते थे कि ‘मैं हूं ना, सब ठीक होगा, भरोसा रखो।’ मेरे माता-पिता को कैसे मनाना है, इसमें भी सुनीत की ही राय काम आई।

वे कहते थे कि प्यार में जितना सम्मान एक दूसरे का जरूरी है, उतना ही घरवालों का भी, अंतत: माता-पिता कभी हमारा बुरा नहीं सोच सकते। खैर, सुनीत का दिया हौसला, उनका साथ ही है, जिसके कारण मैं मम्मी-पापा को इस शादी के लिए मना सकी। हमारी शादी 2017 में हुई और 2019 में हमारे यहां एक बेटी ने जन्म लिया।

शादी के बाद कॅरिअर ने छुआ आसमान
मुझे गर्व है कि मैंने सुनीत को चुना, शादी के बाद मुझे केजीएमयू में गोल्ड मेडल मिला। यह उनके सपोर्ट का ही नतीजा है कि मैं घर और परिवार में बेहतर तालमेल बैठा पा रही हूं। जब भी कभी कहीं कोई अवरोध महसूस करती हूं तो बस सुनीत की बात याद कर लेती हूं कि ‘मैं हूं ना, सब ठीक होगा, भरोसा रखो।’

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed