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फिल्मों की कमाई का सबसे बड़ा खुलासा, छुपाया गया था सच

Wed, 28 Oct 2015 08:27 PM IST
Updated Wed, 28 Oct 2015 08:27 PM IST
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Box office collection reality revealed

-अमेरिकी बाजार में झटका खाने के बाद तनु वेड्स मनु रिटर्न्स और बजरंगी भाईजान जैसी फिल्मों की निर्माता तथा वितरक कंपनी इरोस को भारतीय शेयर बाजार में भी झटके लगे हैं। इसके निवेशकों को नुकसान हुआ है। आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों यह हालात बने...?

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बीते दो दिनों में शेयर मार्केट की खबरों ने फिल्म निर्माण और वितरण करने वाली कंपनी इरोस इंटरनेशनल को परेशान किया है। परेशानी का कारण उसके निवेशकों द्वारा धन वापस लेना और नतीजतन शेयरों के भाव गिरना है। असल में कंपनी के यूएई के कारोबार के आंकड़े संदिग्ध होने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है।
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इसके साथ ही सवाल खड़ा हो गया है कि क्या फिल्म निर्माण और वितरण के कारोबार से जुड़ी यह कंपनी बाजार में कारोबार के गलत आंकड़े पेश कर रही है और इनके द्वारा निवेशकों को अपने शेयरों में धन लगाने के लिए आकर्षित कर रही है?

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तेवर और शमिताभ ने 50 करोड़ ज्यादा का घाटा दिया

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उल्लेखनीय है कि इस साल इरोज की तनु वेड्स मनु रिटर्न्स और बजरंगी भाईजान जैसी फिल्में ब्लॉकबस्टर बताई गई हैं। कंपनी द्वारा चार सप्ताह तक जारी आंकड़ों मे बजरंगी भाईजान की सिनेमाघरों में कुल कमाई 300 करोड़ रुपये से ऊपर बताई गई, वहीं तनु वेड्स मनु रिटर्न्स की कुल कमाई का आंकड़ा 150 करोड़ रुपये के लगभग है।

इस फिल्मों के अतिरिक्त इरोस को इस साल बाकी फिल्मों ने मुस्कराने का मौका नहीं दिया। बदलापुर और एनएच 10 जैसी फिल्मों से जरूर मुनाफा बताया गया, परंतु तेवर, शमिताभ और दिल धड़कने दो जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फ्लाप साबित हुईं। अकेले तेवर और शमिताभ ने इरोस को 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा दिया।

हीरो, वेलकम बैक, सिंह इज ब्लिंग और वेडिंग पुलाव भी इरोस के लिए फायदे का सौदा नहीं रहीं। ये फिल्में भी टिकट खिड़की पर पिट गईं। मात्र दो कामयाब, दो औसत और सात फिल्मों के फ्लॉप होने के बीच इरोज के तेजी से चढ़ते शेयरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सवाल उठे।

पिछला साल भी इरोस के लिए अच्छा नहीं था और उसकी आधा दर्जन फिल्में (ऐक्शन जैक्सन, हैप्पी एंडिंग, लेकर हम दीवाना दिल, पुरानी जींस, देख तमाशा देख, ढिश्क्यांव) बुरी तरह पिटी थीं।

ये आंकड़े सिर्फ कागजी हैं

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इस साल इरोस के शेयरों में चढ़ाव-उतार की कहानी अप्रैल में तनु वेड्स मनु रिटर्न्स का ट्रेलर रिलीज होने के साथ शुरू हुई थी। यह फिल्म जब खासी चर्चा पाने लगी तो बाजार में इरोस इंटरनेशनल के शेयर चढ़ने लगे। फिल्म की सफलता की चर्चा ने कंपनी को सुर्खियां दिलाई और अप्रैल में 14 डॉलर का शेयर अगस्त की शुरुआत में 40 डॉलरों तक जा पहुंचा।

इसी दौरान तनु वेड्स मनु रिटर्न्स की सफलता के बाद सलमान खान स्टारर बजरंगी भाईजान का हल्ला होने लगा  और इरोस ने इसका पूरा फायदा उठाया। उसके शेयर की कीमत इस दौर में 135 फीसदी बढ़ी। परंतु बाजार में शंका तब पैदा हुई जब कंपनी की अन्य नाकाम फिल्मों का विश्लेषण हुआ और यूएई में कंपनी की आय से कहीं अधिक आंकड़े सामने आए।

कहा गया कि ये आंकड़े सिर्फ कागजी हैं और इरोस के पास दिखाया गया धन नहीं पहुंचा है। यूएई का नाम आते ही अंतरराष्ट्रीय निवेशक इसलिए भी चौंके क्योंकि बॉलीवुड के प्रति दुबई का आकर्षण सभी को पता है। बॉलीवुड हमेशा से कालेधन के निवेश को लेकर संदिग्ध बाजार की सूची में रहा है। इसी दौरान कंपनी की मजबूत फंडामेंटल पर सवाल उठे और निवेशक सोचने पर मजबूर हो गए।

इरोज की नई शुरुआत इरोज नाऊ पर भी आरोप लगे

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इरोस की सहायक भारतीय कंपनी इरोस इंटरनेशनल मीडिया लिमिटेड ने शेयरधारकों को विश्वास दिलाया है कि उसकी मजबूत फंडामेंटल मे कोई बदलाव नहीं हुआ है। वैसे शेयर बाजार की वर्तमान स्थिति देखें तो जिन्होंने एक साल पहले इरोस में 1000 रुपये का निवेश किया था, उन्हें आज 1500 रुपये के करीब मिलते हैं।

जो स्थितियां न बिगड़ने की स्थिति में लगभग 2000 रुपये के आस पास होते। अतः यहां मुनाफे में नुकसान हुआ है। वहीं जिन्होंने एक महीने पहले 1000 रुपये निवेश किए, सोमवार को लगे झटके बाद उनका धन लगभग 700 रुपये रह गया है।

इधर, इरोज की नई शुरुआत इरोज नाऊ पर भी आरोप लगे हैं कि वह निवेशकों आकर्षित करने के लिए अपने यूजरों की संख्या बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रही है। एप डाउनलोड पर नजर रखने वाली वेबसाइटों ने यूजर्स के मामले में अन्य भारतीय मनोरंजन साइटों के मुकाबले इरोज नाऊ की रैंकिंग कम रखी है। उल्लेखनीय है कि इन दिनों बाजार में ऐसे कारोबारी भी अस्तित्व में हैं जो धन लेकर सोशल लाइटों पर लाइक और वेबसाइट्स के हिट बढ़ाने का काम करते हैं।

बॉलीवुड की कंपनियां इधर इंटरनेट मनोरंजन की दुनिया में कूद रही हैं। खुद इरोज की योजना इंटरनेट के लिए फिल्में बनाने की है। इस पूरे प्रकरण में विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 40-45 फीसदी गिरावट के बाद इरोस के शेयरों में थोड़ा उछाल आना लाजमी है, लेकिन खरीदारों को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

कलेक्शन के 99% आंकड़े झूठे: आमिर

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-तीन दिन में पचास करोड़, पांच दिन दिन में सौ करोड़... फिल्म की रिलीज के साथ निर्माता ऐसे आंकड़े बाजार में डालना शुरू कर देते हैं। अधिकांशतः ये आंकड़े फिल्मों की तरह ही काल्पनिक और दर्शकों को धोखा देने के लिए होते हैं। दर्शकों के लिए बॉलीवुड में सत्यमेव जयते जैसी सूक्ति का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐक्टर आमिर खान ने पिछले साल यह कह सबको चौंका दिया था कि ‘बॉक्स ऑफिस के 99 फीसदी आंकड़े झूठे होते हैं।’

अपनी फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने मीडिया से कहा था, ‘टिकट खिड़की के आंकड़ों को लेकर मुख्य बात यह है कि प्रोडक्शन हाउस या निर्माता मीडिया में 99 फीसदी आंकड़े झूठ देते हैं। जनता को सच जानना चाहिए।’ आमिर ने बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री के अंदर रहने वालों से यह बात छुपी नहीं होती कि किस फिल्म ने ठीक-ठीक कितना धंधा किया।

उन्होंने कहा कि दर्शकों से निर्माता झूठ बोलते हैं और दर्शक झांसे में आ जाते हैं। आमिर के अनुसार, झूठे आंकड़ों से पैदा होने वाली जिज्ञासा ही दर्शकों को सिनेमाघरों में खींचती है। आमिर मीडिया को भी सलाह दे चुके हैं कि उन्हें फिल्म निर्माताओं द्वारा जारी आंकड़े प्रकाशित नहीं करना चाहिए क्योंकि वे झूठ होते हैं। आमिर के अनुसार इंडस्ट्री में गिनती के दो-चार लोग हैं जो अपनी फिल्म का कलेक्शन सच बताते हैं। जिनमें वह खुद शामिल हैं।

‘देश हो रहा कमजोर और कंपनियां ताकतवर’

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-बॉलीवुड में सभी फिल्मकार सिर्फ मनोरंजन और धन के लिए काम नहीं करते और इसीलिए उनकी फिल्मों को दर्शकों का प्यार मिलता है। इनमें निर्देशक इम्तियाज अली शामिल है। अपनी आने वाली फिल्म के सिलसिले में आज देश-दुनिया का हालात पर बात करते हुए उन्होंने हाल में कहा कि आज देश कमजोर हो रहा है और कंपनियां ताकतवर हो रही हैं। पहले देश ताकतवर होता था। अब उसी तरह से कंपनियां ताकतवर हो रही हैं। कंपनियों के कोई सामाजिक सरोकार नहीं होते और वे सिर्फ अपने फायदे की बात सोचती हैं।

निजी स्तर पर सोशलिज्म को मानने वाले इम्तियाज से जब पूछा गया कि क्या बॉलीवुड में कारपोरेट कंपनियां हावी हो रही हैं और इसका असर रचनात्मकता पर पड़ रहा है? उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता कि नुकसान हो रहा है क्योंकि इन दिनों कारपोरेट कंपनियां फिल्म निर्माण के बजाय वितरण में हावी हैं। फिल्म का निर्माण करने वाले रचनात्मक लोग ही हैं, वे नॉन कारपोरेट हैं।’

निवेशकों की उपेक्षा

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-जानकारों के अनुसार मुंबई में बैठी फिल्म निर्माता कंपनियां अपने निवेशकों की उपेक्षा कर रही हैं। हिंदी पट्टी में बॉलीवुड के सबसे ज्यादा दर्शक हैं। हाल के वर्षों में कंपनियों का ध्यान जरूर इस बात पर गया है और उत्तर भारत केंद्रित फिल्में बन रही हैं। इसके बावजूद इन्हें वहां ठीक ढंग से प्रमोट नहीं किया जाता। इसमें फिल्म प्रचारक भी निर्माताओं को भ्रम में डालने का काम करते हैं।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ की कुल आबादी 27 करोड़ से भी अधिक है और लगभग सवा दो सौ मल्टीप्लेक्स थियेटर यहां हैं। यहीं से फिल्म कंपनियों के निवेशक बड़ी संख्या में आते हैं। जबकि निर्माता मुंबई की दो करोड़ की आबादी से बाहर देखने को तैयार नहीं दिखते।

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