आमिर को पकड़ने के बाद मिलेगा प्रमोशनः अभिषेक बच्चन
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लंबे समय से अभिषेक बच्चन को एक हिट फिल्म का इंतजार है। एक बार फिर वे एसीपी जय दीक्षित के रूप में ‘धूम-3’ में आ रहे हैं। उनके सामने हैं आमिर खान। पहली बार अभिषेक को आमिर के साथ काम करने का मौका मिला है।
धूम का तीसरा पार्ट आ रहा है। फिल्म की स्टोरी में एसीपी जय दीक्षित का प्रमोशन हुआ या नहीं...?
जैसा कि आपने कहा एसीपी। जी हां, जय दीक्षित अब भी एसीपी ही है। जॉन अब्राहम (धूम) और रितिक रोशन (धूम-2) को गिरफ्तार करने के बाद भी। उम्मीद है कि ‘धूम-3’ में आमिर को पकड़ने के बाद हमारे राइटर उसे प्रमोशन दिलाएंगे। डीसीपी बनाएंगे।
धूम सीरीज में आपका सामना जॉन, रितिक और आमिर से हो चुका है। किसे पकड़ना जय दीक्षित के लिए सबसे कठिन था? कौन सबसे जटिल था?
तीनों किरदारों को पकड़ने के अपने-अपने चैलेंज थे। तीनों अलग-अलग तरह के शख्स थे। लेकिन निश्चित रूप से आमिर को पकड़ना सबसे कठिन था। कारण यह कि ‘धूम-3’ में सिर्फ एक्शन ही नहीं है, इसमें इमोशंस (जज्बात) भी हैं।
आमिर के किरदार के साथ कई ऐसी बातें इस कहानी में जुड़ी हैं, जो आपको भावनात्मक रूप से परेशान करती हैं। फिर बात यह भी है कि जब हम ‘धूम’ बना रहे थे तो हमारे सामने सिर्फ एक ब्लैक एंड व्हाइट विलेन था, जब उसका दूसरा पार्ट बनाने की बात आई तो विलेन ज्यादा बड़ा चाहिए था। फिर तीसरे पार्ट में तो उसे पहले से स्मार्ट होना ही था।
आमिर खान के साथ आपने पहली बार काम किया है। कैसा रहा यह अनुभव?
बहुत ही शानदार। वे फिल्म इंडस्ट्री में मेरे सीनियर हैं। उन्हें काम करते देखना अपने आप में बड़ा रोमांचक होता है। कोई ऐक्टर उन्हें काम करते देख कर ही बहुत कुछ सीख सकता है। मैंने ‘धूम-3’ के सैट पर उनसे बहुत कुछ सीखा। ऐक्टर के रूप में वह अपने किरदार में इस कदर ढल जाना चाहते हैं कि उससे रत्ती भर अलग न लगें।
यही कारण है कि वह शॉट से पहले हमारे साथ बैठ कर यह जानना चाहते थे कि उन्हें फलां सीन किस तरह से करना चाहिए। क्या बेहतर होगा। उनमें आज भी सीखने की, चीजों को सबसे अच्छे ढंग से करने की लगन है।
‘धूम-3’ में आमिर से जुड़ी कोई बहुत खास बात जो आप बताना चाहेंगे...!
हां, एक मजेदार बात बताता हूं। आप कितने ही बड़े ऐक्टर हों लेकिन आपके मोबाइल पर अगर आमिर का कॉल आए तो आप एक्साइट हो जाएंगे। यही हुआ, मैं न्यूजीलैंड में था और अचानक उनका फोन आया कि अभिषेक मैंने अभी-अभी ‘धूम-3’ की स्क्रिप्ट सुनी। बहुत बढ़िया है।
हमें साथ काम करने में बहुत मजा आएगा। मैं चौंक गया क्योंकि मुझे पता ही नहीं था कि ‘धूम-3’ बन रही है। मैंने स्क्रिप्ट सुनी ही नहीं थी। अब मैं उनसे कैसे कहता कि मुझे तो कुछ भी पता ही नहीं है इस बारे में। मैं सिर्फ हां में हां मिलाता गया।
धूम फिल्मों में आप खलनायकों को पकड़ रहे हैं। हिंदी फिल्मों में आपका फेवरेट विलेन कौन है?
खलनायकों को लेकर मैं जब बचपन के दिनों को याद करता हूं तो सबसे पहले मुझे अमजद खान अंकल याद आते हैं। मुझे याद है कि जब डैड (अमिताभ बच्चन) और वो फिल्म ‘नसीब’ के लिए शूटिंग कर रहे थे। मैं फिल्म के सैट पर गया था।
शूटिंग चल रही थी। मैं अमजद अंकल को देखते ही उनके पास पहुंच गया और उनसे लड़ने लगा था। उन्हें घूंसे मारने लगा था क्योंकि बीती रात ही मैंने फिल्म देखी थी ‘बरसात की एक रात’ जिसमें उन्होंने एक सीन में डैड को खूब मारा था। वह देख कर मुझे बहुत बुरा लगा था कि वो मेरे पिताजी को मार रहे हैं। मैं उनसे लड़ पड़ा था कि आपने मेरे पिताजी को क्यों मारा?