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'चोली के पीछे में बुराई क्या है'

Thu, 02 Jan 2014 01:29 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Thu, 02 Jan 2014 01:29 PM IST
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interview of madhuri dixit

बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की जिज्ञासा है कि उनकी फिल्म के इस गाने में आखिर दिक्कत क्या थी।

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'शीला की जवानी', 'मुन्नी बदनाम हुई', 'फ़ेविकोल', 'पार्टी यूं ही चलेगी', ये वो कुछ फ़िल्मी गीत हैं, जिन पर बीते कुछ समय में 'आपत्तिजनक' शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं।

क्या बॉलीवुड में ऐसे शब्दों का प्रचलन आम हो गया है? क्यों गानों में ऐसे स्तरहीन शब्दों का इस्तेमाल होता है?

अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से जब इस पर राय मांगी गई, तो वह बोलीं, "1993 में मेरी फ़िल्म 'खलनायक' के गाने 'चोली के पीछे' पर भी ख़ूब हंगामा मचा था। लोगों ने बड़ा विरोध किया।
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जब फ़िल्म में लोगों ने इसे देखा, तो सब शांत हो गए। गाने का प्रस्तुतीकरण लोगों को बड़ा पसंद आया और जिन्होंने इसका विरोध किया था, वह भी ताली बजा-बजाकर इस पर नाचने लगे।"
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माधुरी बोलीं कि गाने को पर्दे पर पेश कैसे किया जाता है, यह बहुत अहम बात है। अगर इसे अच्छी तरह से, बिना किसी भौंड़ेपन के पेश किया जाए, तो लोगों को तक़लीफ़ नहीं होगी।

बॉलीवुड से कोई शिकायत नहीं

हालांकि माधुरी मानती हैं कि मौजूदा दौर में अच्छा लिखने वालों की काफ़ी कमी है। अपनी आने वाली फ़िल्म 'डेढ़ इश्क़िया' के प्रमोशन पर पत्रकारों से बातचीत में माधुरी बोलीं, "हमें अच्छे लेखक और अच्छे गीत लिखने वाले चाहिए। तब स्थिति बेहतर होगी।"

वैसे नए दौर से माधुरी को कोई शिक़ायत नहीं है। बल्कि वह इसे पहले से बेहतर मानती हैं।

माधुरी के मुताबिक़, "अब हम पहले से कहीं ज़्यादा अनुशासित हैं। वरना पहले तो यह भी होता था कि हम मेकअप करके सेट पर तैयार हैं, लेकिन शूटिंग शुरू नहीं हो पा रही है क्योंकि संवाद लेखक, सेट पर संवाद लिख रहा होता था। अब सब कुछ योजनाबद्ध तरीक़े से होता है। हमें सब तैयार मिलता है। शूटिंग वक़्त पर ख़त्म हो जाती है।"


शादीशुदा होने के बावजूद माधुरी परिवार और करियर में कैसे सामंजस्य बिठा रही हैं, इसके जवाब में वह कहती हैं, "मैं कोई अनोखा काम तो नहीं कर रही हूं। हर कामकाजी महिला ऐसा करती है। घर का काम भी संभालती है, दफ़्तर भी जाती है। इसमें मैं क्या अलग कर रही हूं।"

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