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'माधुरी दीक्षित एक सुगंधित तड़का हैं'
हरि मृदुल/अमर उजाला मुंबई
Updated Sun, 22 Dec 2013 07:46 AM IST
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इश्किया के बाद अब डेढ़ इश्किया। निर्माता के तौर पर संगीतकार और निर्देशक विशाल भारद्वाज की यह नई फिल्म है। माधुरी दीक्षित, हुमा कुरैशी, नसीरुद्दीन शाह और अरशद वारसी के अभिनय से सजी यह फिल्म 10 जनवरी को रिलीज हो रही है। इसे माधुरी दीक्षित की कमबैक फिल्म माना जा रहा है।
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बतौर प्रोड्यूसर डेढ़ इश्किया आपके लिए कितना महत्व रखती है। इसे माधुरी दीक्षित की कमबैक फिल्म कहा जा रहा है। आप पर कितना प्रेशर है?
मेरे लिए हर वह फिल्म महत्व रखती है, जिससे मेरा नाम जुड़ा होता है। इसमें कोई शक नहीं कि जब किसी निर्माता की फिल्म रिलीज होती है, तो उस पर प्रेशर होता ही है। माधुरी जी की कमबैक फिल्म होने की वजह से मैं ज्यादा दबाव महसूस कर रहा हूं, ऐसा कदापि नहीं है। डेढ़ इश्किया में माधुरी के आने से तो एक सुगंधित तड़का लग गया है।
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क्या डेढ़ इश्किया की स्क्रिप्ट माधुरी को ध्यान में रखकर लिखी गई थी?
नहीं, इसकी स्क्रिप्ट पहले से लिखी हुई थी। यह जरूर है कि बेगम पारा के किरदार के लिए माधुरी से बेहतर कोई और नहीं हो सकता था। इस किरदार के लिए सबसे पहले उन्हीं का नाम जेहन में आया था। माधुरी ने अपने किरदार को जिस खूबसूरती के साथ परदे पर निभाया है, उससे लगता है कि वाकई उनका कोई विकल्प नहीं है।
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इश्किया में विद्या बालन का निभाया किरदार भी यादगार है। आपने उन्हें डेढ़ इश्किया में नहीं लिया?
कहानी के हिसाब से ही ऐसा निर्णय लिया गया। आप देखिए कि धूम 3 में रितिक रोशन नहीं है। धूम 2 में उन्होंने भी शानदार काम किया था। संभव है कि जब इश्किया सिरीज की तीसरी फिल्म बने, उसमें माधुरी न हों। यह भी हो सकता है कि उसमें माधुरी और विद्या दोनों ही हों। कलाकारों का चयन कहानी की मांग के आधार पर होता है।
एक प्रोड्यूसर के तौर पर आप अपनी फिल्मों को किस तरह देखते हैं। आपके लिए रचनात्मक संतुष्टि का महत्व ज्यादा है या बॉक्स ऑफिस परिणाम का?
मैं रचनात्मक संतुष्टि को ज्यादा महत्व देता हूं। मैं सफलता के पीछे नहीं भागता। अब तक मेरी किसी भी फिल्म ने बड़ी कमाई नहीं की है, लेकिन फिर भी मुझे निर्देशक के तौर पर फिल्में मिलती रही हैं। बॉक्स ऑफिस पर सफल होना बहुत ज्यादा मायने रखता है, लेकिन यह भी होता है कि बुरी फिल्में भी बड़ी कमाई कर ले जाती हैं।
डेढ़ इश्किया के निर्देशक अभिषेक चौबे पर आपका भरोसा इसलिए है कि वे इश्किया जैसी सफल फिल्म दे चुके हैं?
अगर इश्किया टिकट खिड़की पर सफल नहीं होती, तब भी मैं उन पर भरोसा करता। वे प्रतिभाशाली युवा निर्देशक हैं। डेढ़ इश्किया की शूटिंग पर मैं सिर्फ एक दिन ही गया था। तब शूटिंग लखनऊ में हो रही थी। डेढ़ इश्किया पूरी तरह अभिषेक का ही विजन है। मैंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया है।
बॉलीवुड में आपकी सफलता कमाल की है। आप तो क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे और बन गए संगीतकार। इसके बाद सफल निर्माता और निर्देशक भी हो गए?
मुझे नहीं पता था कि फिल्म इंडस्ट्री में मेरी एंट्री होगी और सफलता मिलेगी। कई बार लगता है कि यह ऊपर वाले की मर्जी थी। वाकई मैंने फिल्म इंडस्ट्री ज्वाइन करने का सपना कभी नहीं देखा था। मैं तो एक सफल क्रिकेटर होना चाहता था।
गुलजार साहब के व्यक्तित्व का आप पर बहुत ज्यादा असर महसूस किया जाता है। आपकी सफलता में उनका कितना योगदान है?
गुलजार साहब मेरे लिए पितृतुल्य हैं। मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं। उन्होंने मुझे हमेशा गाइड किया है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे इतनी बड़ी शख्सियत के साथ लगातार काम करने का मौका मिला है। गुलजार साहब के व्यक्तित्व का मुझ पर बहुत ज्यादा असर है।
आप मेघना गुलजार के लिए एक फिल्म भी प्रोड्यूस कर रहे हैं?
हां, वह मेरी बहन जैसी हैं और बहुत क्रिएटिव भी हैं। मुझे खुशी है कि वे मेरे प्रोडक्शन हाउस की फिल्म निर्देशित करने जा रही हैं।
पिछले दिनों आपने कहा कि प्रोड्यूसर बनना बड़ा टेढ़ा काम है। अब आगे फिल्म प्रोडक्शन से दूरी बना लूंगा। किस वजह से आप यह नया निर्णय ले रहे हैं?
मुझे महसूस होता है कि फिल्म प्रोडक्शन में बहुत ज्यादा एनर्जी लगती है। हर रचनात्मक व्यक्ति के पास सीमित समय होता है। मेरा मानना है कि अगर मेरी सारी ऊर्जा फिल्म प्रोड्यूस करने में लग गई, तो संगीतकार या निर्देशक के तौर पर मैं ज्यादा कुछ कर नहीं पाऊंगा। मैं अपनी रचनात्मकता के लिए एनर्जी बचाकर रखना चाहता हूं।