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Holashtak 2026: कब से शुरू हो रहे होलाष्टक? जानें क्या करें क्या न करें
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Thu, 19 Feb 2026 12:37 PM IST
सार
Holashtak Do's And Don't: होलाष्टक फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक चलता है और इसे आठ पवित्र दिनों के रूप में माना जाता है। यह धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय है, जिसमें शुभ कार्यों और वर्जित गतिविधियों के लिए कई शास्त्रीय और लोक मान्यताएँ प्रचलित हैं। इस अवधि में पूजा-पाठ और भक्ति का विशेष महत्व है, जबकि मांगलिक कार्यों और नए प्रोजेक्ट की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।
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होलाष्टक 2026
- फोटो : amar ujala
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Holashtak Me Kya Karein Kya Na Karein: होलाष्टक हिंदू पंचांग का एक विशेष और धार्मिक रूप से संवेदनशील काल माना जाता है। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से प्रारंभ होकर होलिका दहन तक चलता है। इन आठ दिनों को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को अशुभ प्रभाव देने वाली बताया गया है। इसलिए इस समय शुभ और मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करने की परंपरा रही है।
होलाष्टक कब है?
वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी, मंगलवार से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। यह अवधि फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक मानी जाती है। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को होली का पर्व पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। होलाष्टक हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और धार्मिक रूप से संवेदनशील समय माना जाता है। इस समय में विशेष रूप से शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है ताकि किसी प्रकार के अशुभ प्रभाव या बाधा से बचा जा सके।
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होलाष्टक 2026
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होलाष्टक का धार्मिक महत्व
ज्योतिष शास्त्र में होलाष्टक को साधना, भक्ति और आत्मचिंतन के लिए सर्वोत्तम काल माना गया है। यह आठ दिवसीय अवधि व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा लाने में मदद करती है। इस समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के कारण नई मांगलिक गतिविधियाँ जैसे विवाह, गृह प्रवेश, संपत्ति का लेन-देन, व्यवसाय की शुरुआत या यात्रा करना अनुकूल नहीं माना जाता। माना जाता है कि इन दिनों ऐसा करने से कार्य में बाधाएँ और असफलता का सामना करना पड़ सकता है।
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holashtak 2026
- फोटो : adobe stock
होलाष्टक में कौन से कार्य वर्जित हैं
होलाष्टक के दौरान सिर्फ बड़े शुभ कार्य ही नहीं, बल्कि विवाद, झगड़े और अनावश्यक तनाव से भी दूर रहना चाहिए। नए काम की शुरुआत, शादी, गृह प्रवेश, संपत्ति खरीद या यात्रा जैसी मांगलिक गतिविधियों से परहेज़ करना चाहिए। इस अवधि में अशुभ प्रभाव अधिक सक्रिय माने जाते हैं, इसलिए संयम और सतर्कता से अपने दैनिक कार्यों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
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होलाष्टक में क्या करें
घर की सफाई और पूजा करना
धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना
दान और जरूरतमंदों की मदद करना
माता-पिता, वृद्धजन और गुरुओं की सेवा करना
सत्संग, ध्यान और जप-मंत्र का अभ्यास करना
अपने कर्मों की समीक्षा और आत्मचिंतन करना
इन कार्यों से मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। शास्त्रों के अनुसार, इस समय किया गया दान और पुण्य कार्य विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा, पौधारोपण करना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना भी लाभकारी माना गया है।
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