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Delayed Marriage Reasons: कुंडली में ये दोष बनते हैं शादी में देरी की वजह, जानें कारण और समाधान

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Mehra Updated Mon, 06 Apr 2026 04:30 PM IST
सार

Late Marriage Astro Remedies: शादी तैय होने से पहले बार-बार रिश्ता टूटना या विवाह में देरी होने के पीछे कुछ ज्योतिषीय कारण हो सकते हैं, जिसकी वजह से जातक के विवाह में बाधाएं आ सकती है। आइए जानते हैं कि कुंडली में विवाह में होने वाली देरी के क्या कारण होते हैं और इससे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।

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Late Marriage Remedies Reasons For Late Marriage In Horoscope Vivah Me Deri Hone Ke Karan
कुंडली में छिपे हैं शादी में हो रही देरी के राज - फोटो : Amar Ujala

Late Marriage Reasons: कई बार लगातार कोई न कोई अड़चन आने के कारण लोगों के विवाह में काफी देरी होती है। अक्सर ऐसा भी देखा जाता है कि रिश्ता तय होने से पहले ही किसी न किसी वजह से बात रुक जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके पीछे जन्म कुंडली में ग्रहों और भावों की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में निराश होने के बजाय विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारणों को समझना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में उचित उपाय अपनाना अधिक लाभकारी माना जाता है। सही दिशा में किए गए उपाय से योग्य जीवनसाथी मिलने की संभावना बढ़ सकती है। आइए जानते हैं विवाह में होने वाली देरी के क्या कारण होते हैं और इससे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।



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विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण - फोटो : adobe stock

विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण

  • ज्योतिष में कुंडली का सातवां भाव विवाह और दांपत्य जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। यदि इस भाव में शनि, मंगल, राहु या केतु जैसे अशुभ ग्रह स्थित हों या इनकी दृष्टि सातवें भाव पर पड़ रही हो, तो विवाह में बाधाएं और देरी देखने को मिल सकती है। इसके कारण रिश्ते बनते-बनते टूट भी सकते हैं।
  • शनि ग्रह का प्रभाव विवाह में विलंब का एक प्रमुख कारण माना जाता है। यदि शनि सातवें भाव में स्थित हो या सातवें भाव के स्वामी पर इसकी दृष्टि हो, तो शादी देर से होने के योग बनते हैं।
  • इसके अलावा, कुंडली में शुक्र, गुरु और मंगल ग्रह की कमजोर या प्रतिकूल स्थिति भी विवाह में देरी ला सकती है। विशेष रूप से पुरुषों की कुंडली में इन ग्रहों का अशुभ प्रभाव हो तो विवाह में काफी समय लग सकता है। यदि ये ग्रह अस्त अवस्था में हों, तब भी इसी प्रकार की स्थिति बनती है।
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विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण - फोटो : अमर उजाला
  • मांगलिक दोष भी विवाह में देरी का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। जब मंगल ग्रह कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तब यह दोष बनता है। इसके प्रभाव से विवाह में बाधाएं आती हैं और शादी के बाद भी मतभेद होने की संभावना बनी रहती है। इस दोष को संतुलित करने के लिए समान दोष वाले व्यक्ति से विवाह करना शुभ माना जाता है।
  • यदि कुंडली में सातवें भाव का स्वामी वक्री अवस्था में हो, तो भी विवाह में देरी हो सकती है। ऐसे मामलों में अक्सर विवाह के योग 30 वर्ष की आयु के बाद ही बनते हैं।
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विवाह में देरी से निवारण के उपाय - फोटो : Adobe Stock

विवाह में देरी से निवारण के उपाय

  • यदि शनि के कारण विवाह में रुकावट आ रही हो, तो शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीपदान करना लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ फल देता है।
  • गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए पीले रंग की वस्तुओं जैसे केला, हल्दी, चना और पीले वस्त्र का दान करना उपयोगी होता है। गुरु के सशक्त होने से विवाह से जुड़ी बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
  • यदि सातवां भाव कमजोर है, तो उससे जुड़े ग्रह के अनुसार उपाय करना चाहिए।
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वास्तु टिप्स - फोटो : Adobe Stock

इसके अलावा, जिन लोगों का विवाह लंबे समय से नहीं हो पा रहा है, उन्हें किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना भी लाभदायक साबित हो सकता है, जिससे सही मार्गदर्शन मिल सके।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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