महान पराक्रमी ग्रह पृथ्वी पुत्र मंगल 6 सितंबर को सुबह 3 बजकर 56 मिनट पर सिंह राशि की यात्रा समाप्त करके कन्या राशि में प्रवेश किया है, जहां ये 22 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक गोचर करेंगे, उसके बाद तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल कर्क राशि में नीच तथा मकर राशि में उच्चराशि गत संज्ञक माने गए हैं। इनके राशि परिवर्तन का सभी राशियों पर कैसा प्रभाव रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
राशि परिवर्तन: मंगल का कन्या राशि में प्रवेश, किन राशियों के लिए रहेगा शुभ और किसको रहना होगा संभलकर
वृषभ राशि-
राशि से पंचम विद्या भाव में मंगल के गोचर करने के प्रभाव संतान संबंधी चिंता में कमी आएगी। नवदंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के योग। प्रेम संबंधी मामलों में उदासीनता रहेगी इसीलिए अपने कार्य-व्यापार के प्रति चिंतनशील रहें। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों तथा बड़े भाइयों से मतभेद न होने दें। विद्यार्थियों एवं प्रतियोगिता में बैठने वाले छात्रों को परीक्षा में अच्छी सफलता के योग। यात्रा देशाटन का लाभ मिलेगा। वाहन सावधानी पूर्वक चलाएं, दुर्घटना से बचें।
मिथुन राशि-
राशि से चतुर्थ सुख भाव में गोचर करते हुए मंगल किसी न किसी कारण से पारिवारिक कलह एवं मानसिक तनाव देंगे। आपके अपने ही लोग षड्यंत्र करते नजर आएंगे और आपको नीचा दिखाने का एक भी अवसर नहीं छोड़ेंगे। यात्रा सावधानीपूर्वक करें। सामान चोरी होने से बचाएं। माता-पिता के स्वास्थ्य के प्रति चिंतनशील रहें। जमीन जायदाद से जुड़े मामले सुलझने में थोड़ा और समय लगेगा। योजनाओं को गोपनीय रखते हुए कार्य करेंगे तो अधिक सफल रहेंगे।
कर्क राशि-
राशि से तृतीय पराक्रम भाव में गोचर करते हुए मंगल आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है सोची समझी सभी रणनीतियां कारगर सिद्ध होगी। जो भी निर्णय लेंगे उसी में सफल रहेंगे अपनी ऊर्जा शक्ति का पूर्ण उपयोग करें। लिए गए निर्णय की सराहना होगी। परिवार में अलगाववाद की स्थिति उत्पन्न न होने दें। विदेशी मित्रों तथा संबंधियों से सहयोग की उम्मीद। यात्रा देशाटन का योग बनेगा, विदेशी कंपनियों में सर्विस के लिए किया गया आवेदन भी असफल रहने का योग।
सिंह राशि-
राशि से द्वितीय धन भाव में मंगल आर्थिक पक्ष मजबूत करेंगे। आकस्मिक धन प्राप्ति का योग बनेगा। काफी दिनों का दिया गया ध्यान भी वापस मिलने की उम्मीद। कोई न कोई ऐसा कार्य अथवा निर्णय जरूर करेंगे जिससे पारिवारिक एकता बनाए रखने में कठिनाई आ सकती है। दांपत्य जीवन में भी कटुता न आने दें। साझा व्यापार करने से बचें। अपनी एवं आवेश पर नियंत्रण रखें। व्यापारिक अनुबंधों के समय भाषा शैली पर भी नियंत्रण रखें अनावश्यक वार्ता ना करें।