Predictions 2029: वर्ष 2020 में ग्रहण और ग्रहों की जो विस्फोटक स्थिति थी, वैसी ही हलचल 2029 में भी देखने को मिल सकती है। दोनों वर्षों में 6-6 ग्रहण का होना एक बड़ी प्राकृतिक और राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत है। वर्ष 2020 का समय पुरी दुनिया ने देखा है। कोराना महामारी के बाद लॉकडाउन, वैश्विक मंदी और फिर पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत चीन संघर्ष, मिशन मार्स, वैक्सीन की रेस, अमेरिकी चुनाव, कई देशों के बीच छोटे युद्ध, गृहयुद्ध या जनविद्रोह जैसी घटनाओं से भरे इस वर्ष ने संपूर्ण दुनिया की सोच और हालात को बदल कर रख दिया था। यह दौर लगातर चल ही रहा है। अब आगे वर्ष 2029 में इसी तरह के दौर की संभावना इसलिए नजर आ रही है क्योंकि इस वर्ष में भी 5 से अधिक ग्रहण है और ग्रह गोचर की स्थिति भले ही समान नहीं हो लेकिन उनकी तीव्रता और विस्फोटक स्थिति को नकारा नहीं जा सकता।
Predictions: वर्ष 2029 दोहराएगा इतिहास, फिर से बनेगी वर्ष 2020 जैसी ग्रहण की विस्फोटक स्थिति
Predictions: 2029 में भी ठीक वैसी ही हलचल देखने को मिल सकती है, जैसी वर्ष 2020 में थी। 2020 में ग्रहण और ग्रहों की जो विस्फोटक स्थिति थी वह चार साल बाद फिर से बनेगी। दोनों वर्षों में 6-6 ग्रहण का होना एक बड़ी प्राकृतिक और राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत है। आइए जानते हैं कि 2029 में दुनिया पर ग्रहों की चाल का क्या प्रभाव रहेगा।
2020 में प्रमुख ग्रह गोचर (Transit)
1. शनि मकर योग:
शनि का अपनी स्वराशि मकर राशि में प्रवेश (24 जनवरी 2020) साल की सबसे बड़ी ज्योतिषीय घटना थी। यहां वे 'न्याय' और 'कठोर अनुशासन' का दंड चलाते हैं। इससे दुनिया भर में पुरानी व्यवस्थाएं टूटीं और लोगों को आत्म-अनुशासन का पाठ सीखना पड़ा।
2. गुरु-शनि की युति (नीच भंग राजयोग):
मार्च 2020 के अंत में गुरु (बृहस्पति) भी मकर राशि में चले गए, जहां शनि पहले से मौजूद थे।
गुरु और शनि का एक साथ पृथ्वी तत्व की राशि मकर में होना बड़ी आपदाओं और वैश्विक बदलावों का संकेत माना गया। इसे महामारी के फैलने और आर्थिक मंदी का एक बड़ा ज्योतिषीय कारण माना गया। गुरु वर्ष के दौरान दो बार राशि परिवर्तन (वक्री-मार्गी चाल के कारण) किए। जब गुरु कमजोर स्थिति (नीच राशि) में थे, तब स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक दबाव और ऑक्सीजन/हवा से जुड़ी बीमारियाँ (श्वसन रोग) चरम पर रहीं।
3. राहु-केतु का गोचर (23 सितंबर 2020)
राहु ने मिथुन से वृषभ राशि में और केतु ने धनु से वृश्चिक राशि में प्रवेश किया। राहु का वृषभ (बैल/स्थिरता) में आना शेयर बाजार में भारी अस्थिरता और लोगों की जीवनशैली में अचानक बदलाव का कारक बना। इसने चिकित्सा, अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी में एक नए दौर की शुरुआत की। जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है।
शनि: (24 जनवरी 2020) धनु से मकर राशि में प्रवेश।
- गुरु: (30 मार्च 2020) मकर राशि में प्रवेश (शनि के साथ युति)।
- मंगल: (4 मई 2020) कुंभ राशि में प्रवेश (शनि-मंगल का उग्र योग)।
- राहु-केतु: (23 सितंबर 2020) वृषभ और वृश्चिक राशि में प्रवेश।
4. 2020 में कुल 6 ग्रहण योग (2 सूर्य ग्रहण और 4 चंद्र ग्रहण) ने परिस्थिति को बनाया और कठिन:
- 10 जनवरी– चंद्र ग्रहण
- 5 जून– चंद्र ग्रहण
- 21 जून– सूर्य ग्रहण
- 5 जुलाई– चंद्र ग्रहण
- 30 नवंबर– चंद्र ग्रहण
- 14 दिसंबर– सूर्य ग्रहण
2020 में ग्रहण सहित शनि, गुरु, राहु और केतु का प्रभाव इतना प्रबल था कि इसने पूरी दुनिया को 'रीसेट' मोड पर डाल दिया। जहां शनि ने कर्मों का फल दिया, वहीं गुरु ने कठिन परिस्थितियों में मानवता को जीने का नया तरीका सिखाया। यह इसलिए जरूरी था कि आने वाला समय और भी कठिन होने वाला है। जिन लोगों ने 2020 से कुछ नहीं सीखा उनके लिए यह दुनिया रहने लायक नहीं रही और हो सकता है कि आने वाले समय में वे दुनिया में रहने लायक न रहें।
2029 में प्रमुख ग्रह गोचर (Transit)
वर्ष 2029 में जब शनि मेष (नीच राशि) में, गुरु तुला में, और राहु-केतु का अक्ष धनु-मिथुन में होगा, तो यह एक अत्यंत प्रभावशाली और विस्फोटक ज्योतिषीय परिस्थिति पैदा करेगा।
1. शनि मेष में (नीच का शनि):
अनुशासन की परीक्षा: वैसे शनि वर्ष 2027 में मेष में रहेंगे लेकिन वक्री चाल से फिर से मीन में जाकर वर्ष 2028 में पुन: मेष में गोचर करेंगे फिर वर्ष 2029 में वृषभ में जाने के बाद पुन: मेष में गोचर करेंगे। शनि जब मेष (अग्नि तत्व और मंगल की राशि) में होते हैं, तो वे 'नीच' के कहलाते हैं। यहां वे सभी के अनुशासन की परीक्षा लेंगे। जिन्होंने 2020 से कुछ नहीं सीखा है उन्हें दुनिया से विदा होना होगा।
सत्ता संघर्ष: दुनिया भर में शासन प्रणालियों और नेतृत्व के विरुद्ध असंतोष बढ़ सकता है। सेना और पुलिस बल पर दबाव बढ़ेगा।
युद्ध: शनि का जब भी मंगल के साथ किसी भी प्रकार से संयोग बना है तो किसी बड़े युद्ध को जन्म दिया है। 1999 का वर्ष मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध का था जब शनि मेष में था। 1969 में चीन और सोवियत सेना में झड़प हुई थी।
अग्नि और ऊर्जा: ऊर्जा संकट या आग से संबंधित बड़ी दुर्घटनाओं की संभावना रहती है।
व्यक्तिगत प्रभाव: लोगों में धैर्य की कमी होगी और जल्दबाजी में फैसले लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
2. गुरु तुला राशि में: न्याय और कूटनीति का संतुलन
बृहस्पति की तो अतिचारी गति चल रही है जिसके चलते शनि ग्रह पर कंट्रोल करने का पॉवर उनके पास कम रह गया है। बृहस्पति ग्रह मार्च में कन्या में और फिर अगस्त 2029 में तुला राशि में गोचर करेंगे। गुरु का कन्या में गोचर शुभ नहीं माना जा सकता क्योंकि बुध उनका शत्रु ग्रह है। वैसे तो शुक्र की राशि तुला में भी शुभ नहीं है लेकिन फिर भी गुरु का तुला (शुक्र की राशि) में होना व्यापार और संबंधों के लिए एक वरदान की तरह साबित हो सकतता है।
व्यापारिक संधियां: देशों के बीच नए व्यापारिक समझौते होंगे। लग्जरी और फैशन इंडस्ट्री में जबरदस्त उछाल आएगा।
न्यायिक सुधार: महिलाओं के अधिकारों और विवाह से जुड़े कानूनों में बड़े वैश्विक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
संतुलन: गुरु यहाँ शनि की उग्रता को संतुलित करने का प्रयास करेंगे, जिससे युद्ध जैसी स्थितियां टल सकती हैं।
3. राहु धनु में और केतु मिथुन में: वैचारिक क्रांति
राहु धनु में: धर्म और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 'भ्रम' या 'अतिवाद' की स्थिति पैदा कर सकता है। लोग पुरानी मान्यताओं को चुनौती देंगे। विदेशी व्यापार में अचानक लाभ होगा।
केतु मिथुन में: संचार के साधनों में कोई बड़ी बाधा या पूरी तरह से नई तकनीक (जैसे टेलीपैथी या चिप-आधारित संचार) का उदय हो सकता है। लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में गहराई आएगी।
4. अगला 5+1 ग्रहणों वाला वर्ष 2029 में (4 सूर्य और 2 चंद्र)।
- 14 जनवरी 2029– आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse)
- 12 जून 2029– आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse)
- 25–26 जून 2029– पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse)
- 11 जुलाई 2029– आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse)
- 5 दिसंबर 2029– आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse)
- 20–21 दिसंबर 2029– पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse)