Unlucky Zodiac Signs: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि इनकी बदलती चाल सभी 12 राशियों के जीवन पर शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के प्रभाव डालती है। सूर्य देव के कर्क राशि में प्रवेश के बाद राहु के साथ षडाष्टक योग का निर्माण हुआ है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में चुनौतीपूर्ण योगों में गिना जाता है। माना जाता है कि इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों को अगले कुछ समय तक करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इन राशियों के जातकों को धैर्य, संयम और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं किन राशियों पर इस योग का सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है।
Surya-Rahu Shadashtak Yoga: इन 4 राशियों के लिए अगले 30 दिन रहेंगे चुनौतीपूर्ण, बढ़ सकती हैं आर्थिक परेशानियां
Unlucky Zodiac Signs: वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की चाल समय-समय पर सभी 12 राशियों के जीवन को प्रभावित करती है। आने वाले 30 दिनों तक सूर्य और राहु से बनने वाले षडाष्टक योग का प्रभाव कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
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वृषभ राशि
सूर्य और राहु के मध्य बन रहा यह षडाष्टक योग वृषभ राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान आपके स्वभाव में अस्थिरता और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है, जिसके कारण आपको अपनी वाणी पर विशेष संयम रखने की आवश्यकता है। कठोर, उतावले अथवा असंतुलित शब्द न केवल आपके पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में कटुता ला सकते हैं बल्कि आपके बने-बनाए कार्यों को भी बिगाड़ सकते हैं। कार्यस्थल पर भी बोलने से पहले सोच-समझकर ही अपनी बात रखें अन्यथा गलतफहमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अतिरिक्त इस अवधि में धन संबंधी मामलों में भी अत्यंत सतर्कता बरतना आवश्यक है। षडाष्टक योग के प्रभाव से अनावश्यक खर्च बढ़ने की संभावना बनी हुई है, जिससे आपका आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। इस दौरान कहीं भी नया निवेश करने से पूर्व भलीभांति सोच-विचार कर लें और किसी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें अन्यथा आर्थिक हानि की संभावना बन सकती है। साझेदारी में किए जाने वाले व्यापारिक निर्णयों को भी इस अवधि में टालना उचित रहेगा, क्योंकि विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह षडाष्टक योग स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिकूल फल दे सकता है। ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में विशेष रूप से पेट से संबंधित समस्याएं, जैसे अपच, गैस अथवा एसिडिटी उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है। इसलिए अपने खान-पान का विशेष ख्याल रखें, अधिक तैलीय अथवा मसालेदार भोजन से परहेज करें। समय पर भोजन करने की आदत डालें। इसके साथ ही नियमित योग एवं व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी लाभकारी सिद्ध हो सकता है, जिससे शारीरिक ऊर्जा बनी रहे। इसके अतिरिक्त इस दौरान कोई अप्रत्याशित खर्च आपकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। आपका पूरा बजट बिगड़ सकता है और मुश्किलें बढ़ सकती हैं। घर की मरम्मत, चिकित्सा संबंधी व्यय अथवा किसी पारिवारिक आवश्यकता के चलते धन का अप्रत्याशित प्रवाह हो सकता है। ऐसे में अनावश्यक व्यय से बचना उचित रहेगा और अपने मासिक बजट की पहले से योजना बनाकर चलना लाभकारी सिद्ध होगा। इस अवधि में किसी को उधार देने से पूर्व भी सावधानी बरतें, क्योंकि धन वापसी में विलंब हो सकता है।
तुला राशि
तुला राशि के नौकरीपेशा जातकों को इस अवधि में कार्यस्थल पर तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ते कार्यभार, समय-सीमा के दबाव अथवा वरिष्ठों की अपेक्षाओं के कारण मानसिक दबाव बढ़ने की पूरी संभावना है। कुछ जातकों को अपने कार्यक्षेत्र में अनावश्यक प्रतिस्पर्धा अथवा राजनीति का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे समय में अपने कार्यों को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित करना अत्यंत आवश्यक होगा। कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार सूचीबद्ध करें और एक-एक करके पूर्ण करने का प्रयास करें, इससे मानसिक दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। साथ ही सहकर्मियों अथवा वरिष्ठों के साथ किसी भी प्रकार के विवाद अथवा वाद-विवाद से बचने का पूरा प्रयास करें, क्योंकि इससे स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है और आपकी छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस अवधि में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पूर्व शांत मन से विचार अवश्य करें तथा जल्दबाजी में कोई भी बड़ा कदम उठाने से बचें। व्यापार से जुड़े जातकों को भी नए साझेदारों के साथ करार करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों पर भी यह षडाष्टक योग अशुभ प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि राहु स्वयं इसी राशि में गोचर कर रहा है। इस दौरान मानसिक अशांति और असंतोष की भावना बनी रह सकती है, जिसके कारण छोटी-छोटी बातों पर भी तनाव उत्पन्न हो सकता है। कुछ जातकों को अकारण चिंता, नींद में कमी अथवा एकाग्रता की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है। पारिवारिक जीवन में भी इस दौरान गलतफहमियां उत्पन्न होने की संभावना है इसलिए अपनों से संवाद बनाए रखना आवश्यक है। ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस अवधि में किसी से वाद-विवाद अथवा झगड़े में उलझने से पूर्णतः बचें चाहे वह पारिवारिक हो, सामाजिक हो अथवा व्यावसायिक, अन्यथा आपके महत्वपूर्ण कार्य बिगड़ सकते हैं और संबंधों में दरार भी आ सकती है। इस दौरान धैर्य और संयम बनाए रखना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी होगी।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।