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21 जून को क्यों कहा जाता है साल का सबसे बड़ा दिन? जानें इससे जुड़ी मान्यताएं

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Sat, 20 Jun 2026 02:05 PM IST
सार

21 जून केवल साल का सबसे लंबा दिन नहीं है, बल्कि सूर्य की विशेष ऊर्जा और प्रकृति के बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन आत्मविश्वास, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा हुआ है। सूर्य की ऊर्जा के साथ जुड़कर व्यक्ति अपने जीवन में नई प्रेरणा और संतुलन महसूस कर सकता है।

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The Longest Day of the Year Falls on June 21 Facts and Traditional Beliefs
21 june ka jyotishiy mahatv - फोटो : amar ujala

साल में 21 जून का दिन खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस दिन सूर्य अपनी विशेष स्थिति में होता है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति  कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा, मान-सम्मान और सफलता का कारक ग्रह माना गया है। ऐसे में 21 जून का दिन सूर्य से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य की विशेष कृपा से जीवन में आत्मविश्वास, नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव के अवसर बढ़ सकते हैं। आइए जानते हैं ज्योतिषीय दृष्टि से 21 जून का महत्व।

The Longest Day of the Year Falls on June 21 Facts and Traditional Beliefs
21 जून को क्यों होता है सबसे लंबा दिन? - फोटो : adobe stock

21 जून को क्यों होता है सबसे लंबा दिन?
खगोलीय विज्ञान के अनुसार 21 जून को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव पर होता है। इस कारण सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। इसी वजह से सूर्य अधिक समय तक आकाश में दिखाई देता है और उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे लंबा होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य का यह परिवर्तन ऊर्जा, आत्मविश्वास और जीवन में बदलाव का प्रतीक माना जाता है। सूर्य की मजबूत स्थिति को सफलता और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

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ग्रीष्म संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व - फोटो : adobe stock

ग्रीष्म संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व
'संक्रांति' का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि या स्थिति से दूसरी स्थिति में प्रवेश करना। 21 जून के आसपास सूर्य अपनी उत्तर दिशा की यात्रा के चरम पर पहुंचता है। इसके बाद सूर्य दक्षिण दिशा की ओर बढ़ने लगता है, जिसे दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य की गति का विशेष महत्व है क्योंकि सूर्य व्यक्ति की कुंडली में आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और भाग्य को प्रभावित करने वाला ग्रह माना जाता है।

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सूर्य देव की कृपा पाने का शुभ समय - फोटो : adobe stock

सूर्य देव की कृपा पाने का शुभ समय
हिंदू परंपरा में सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। 21 जून के दिन सूर्य उपासना करना शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह सूर्य को जल अर्पित करने, सूर्य मंत्र का जाप करने और ध्यान करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।
सूर्य मंत्र:
"ॐ सूर्याय नमः"

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उत्तरायण और दक्षिणायन का रहस्य - फोटो : adobe

उत्तरायण और दक्षिणायन का रहस्य
भारतीय ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में सूर्य की उत्तरायण और दक्षिणायन गति को विशेष महत्व दिया गया है। उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात का प्रतीक माना जाता है। 21 जून के बाद सूर्य दक्षिणायन की ओर बढ़ता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह समय आत्मचिंतन, साधना और अपनी आंतरिक ऊर्जा को मजबूत करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

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