कोरोना काल में जहां कई व्यापार धराशायी हो गए वहीं साइकिल बाजार के लिए यह वरदान बन गया है। कोरोना काल में बंपर मांग से दुकानदार भी हैरान हैं। हालांकि साइकिलों की पिछले साल लगे लॉकडाउन से ही बढ़ने लगी थी, और इस साल इसमें तेजी से इजाफा हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में भी साइकिल की मांग में भारी इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक कोरोना के चलते फिटनेस और किड्स साइकिल की मांग बढ़ी है, जिससे साइकिल इंडस्ट्री इस साल 1.45 करोड़ साइकिलों की बिक्री का आंकड़ा छू सकती है। वहीं वित्त वर्ष 2020-21 में 1.2 करोड़ साइकिलों की बिक्री हुई थी। ऐसे में कई सवाल हैं जैसे, क्या कारण है जो लोग तेजी से साइकिल की तरफ बढ़ रहे हैं? साइकिल के बाजार में पहले के मुकाबले कितना अंतर आया है? शहरों में क्यों साइकिल की मांग बढ़ रही है? तो चलिए इन सभी सवालों का जवाब ढूंढते हैं।
World Bicycle Day 2021: कोरोना ने बदली साइकिल बाजार की किस्मत, आम आदमी से लेकर खास लोग भी बने इसके दीवाने
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फिटनेस ने बढ़ाई साइकिल की मांग
लॉकडाउन से अब तक जिम, स्विमिंग पूल और योगा सेंटर बंद हैं। ऐसे में मेट्रो शहरों में लोग अपनी फिटनेस के लिए साइकिलिंग कर रहे हैं। यही कारण है कि मेट्रो शहरों में साइकिल की खरीदारी में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। साइकिल इंडस्ट्री में इन दिनों प्रीमियम, किड्स सेगमेंट खासे पॉपुलर है। महामारी के चलते फिटनेस साइकिल्स की भी मांग बढ़ी है। वहीं साइकिल की बिक्री में प्रीमियम और किड्स साइकिल की हिस्सेदारी 40 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गई है। वहीं सामान्य साइकिल का हिस्सा घटकर 36 फीसदी रह गया है।
कीमत
भारतीय बाजार में 4000 से लेकर 40000 रुपये तक में साइकिल के कई बेहतरीन रेंज उपलब्ध हैं। ऐसे में ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से अपनी पसंद की साइकिल को खरीद सकते हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकल्प बन रहा है साइकिल
कोरोना काल में मेट्रो बंद है। लोग सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं या जिनके पास कार या बाइक खरीदने का बजट नहीं है, वे दोनों ही साइकिल को अपनी पसंद बना रहे हैं। साइकिल की सवारी शारीरिक क्षमता के साथ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नियमित रूप से 20 से 30 मिनट साइकिल चलाई जाए तो तनाव पर नियंत्रण के साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है। इससे दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है। इतना ही नहीं सभी बीमारियों की जड़ माने जाने वाले बढ़ते वजन को भी नियंत्रित करने में साइकिल की मुख्य भूमिका है, इसलिए डॉक्टर दवाओं के साथ साइकिल चलाने की भी सलाह देते हैं।
दोगुना तक बढ़ा कारोबार
भारत में साइकिल का कारोबार करीब 7,000 करोड़ रुपये का है। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना के बाद से साइकिल की मांग में तेजी से बढ़ोतरी आई है। ज्यादातर डीलर्स का कहना है कि कोरोना काल से पहले के मुकाबले साइकिल की मांग और भी ज्यादा बढ़ी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल बाजार है। आंकड़ों के मुताबिक 2019 तक गुजरे पांच वित्तीय वर्षों में साइकिल की बिक्री ने लगभग पांच फीसदी की सालाना वृद्धि दर दर्ज की है। वहीं वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान साइकिलों की बिक्री में 22 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लेकिन कोरोना से साइकिल इंडस्ट्री को बड़ा सहारा दिया। कोरोना से पहले जहां साइकिल की दुकानें और शोरूमों पर ताला लग रहा था, वहीं लॉकडाउन में दिल्ली की प्रसिद्ध साइकिल मार्केट झंडेवालान में ये आलम था कि वहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी। हर कोई साइकिल खरीदने की चाह में था।