देश में केंद्र सरकार की तरफ से लगातार ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा को लेकर बदलाव किए जा रहे हैं। साल भर पहले मोदी सरकार मोटर वाहन संशोधन कानून लेकर आई थी, जिसमें यातायात के नियमों को तोड़ने पर पहले के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा जुर्माने का प्रावधान किया गया। इसी कड़ी में अब लोकल हेलमेट के इस्तेमाल और बिक्री को रोकने के लिए केंद्र सरकार नया कानून लागू करने जा रही है। नए नियम के मुताबिक लोकल हेलमेट पहन कर दो-पहिया वाहन चलाने वाले व्यक्ति पर 1000 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा अब लोकल हेलमेट बनाने और उसकी बिक्री करने वालों पर भी जुर्माने और सजा का प्रावधान किया गया है।
लोकल हेलमेट पहनना और बनाना पड़ेगा भारी, लगेगा जुर्माना, होगी जेल
लोकल हेलमेट बनाना पड़ेगा भारी
लोकल हेलमेट बनाने वालों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। इस नए कानून में जेल का प्रावधान भी शामिल किया गया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहली बार इस प्रावधान को भारतीय मानक ब्यूरो (बीएसआई) की सूची में शामिल किया है।
भारी हेलमेट से मिलेगा छुटकारा
4 सितंबर, 2020 से ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) दोपहिया हेलमेट मानकों के लिए एक नई अधिसूचना लागू करेगा। नए मानदंडों में हेलमेट के वजन की सीमा को 1.5 किलोग्राम से घटा कर 1.2 किलोग्राम कर दिया गया है, जो 2018 में लागू किया गया था।
सरकार की पहल का ये है कारण
भारत में हर रोज औसतन 119 लोगों की मौत हेलमेट न लगाने के कारण होती है। यानी हेलमेट न पहनने के कारण हर घंटे 5 लोग सड़क हादसे में अपनी जान गंवा देते हैं। साल 2017 में हेलमेट न लगाने के कारण 35,975 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई थी। वहीं, 2018 में यह आंकड़ा 21 फीसदी बढ़कर 43,600 पर जा पहुंचा।
सड़क हादसों में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण हेलमेट की खराब क्वालिटी भी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोकल हेलमेट का इस्तेमाल काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसी को लेकर केंद्र सरकार नया कानून ला रही है।
हेलमेट के आयात को मिली हरी झंडी
हेलमेट के वजन की सीमा ने भारत में आयातित ( इंपोर्ट किए गए) हेलमेटों की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके कारण उन हेलमेट को भारत में इंपोर्ट करने से मना कर दिया गया था जो आईएसआई मार्क नहीं थे और बीआईएस मानदंडों के तहत सीमित वजन से ज्यादा भारी थे। हालांकि, संशोधित मानक में अब इंपोर्ट किए गए हेलमेट की बिक्री हो सकती है, लेकिन उन्हें अभी भी भारतीय मानक (आईएस) मानदंडों का पालन करने की आवश्यकता होगी।