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China: दक्षिण अफ्रीका के कार बाजार में चीनी कंपनियों का धमाका, किफायती कीमत, लंबी वारंटी से बदली बाजार की सूरत

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 15 May 2026 10:25 PM IST
सार

चीनी वाहन निर्माताओं ने दक्षिण अफ़्रीकी यात्री कार बाजार में अपनी हिस्सेदारी को, एक साल पहले के 11.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2025 में 16.8 प्रतिशत कर दिया है। शुक्रवार को जारी उद्योग के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

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Chinese Automakers Capture 16.8 Per Cent of South African Car Market as Affordable SUVs Reshape Competition
BYD Seagull - फोटो : BYD

दक्षिण अफ्रीका के पैसेंजर कार बाजार में चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपनी पैठ को काफी मजबूत कर लिया है। शुक्रवार को जारी उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में चीनी ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 16.8 प्रतिशत हो गई है, जो इससे पिछले वर्ष (2024) में 11.2 प्रतिशत थी। प्रतिस्पर्धी कीमतों, आधुनिक तकनीक से लैस एसयूवी (SUV) और लंबी वारंटी ने वहां के ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धा का पूरा रुख ही बदल दिया है।

Chinese Automakers Capture 16.8 Per Cent of South African Car Market as Affordable SUVs Reshape Competition
Chery QQ3 Electric SUV - फोटो : Chery

दक्षिण अफ्रीका के ऑटो बाजार में इस बड़े बदलाव के क्या कारण हैं?

ऑटो उद्योग निकाय 'नाम्सा' (naamsa) ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि घरेलू नए वाहन बाजार में पुनर्गठन का दौर शुरू हो चुका है:

  • बजट का दबाव: बढ़ती महंगाई और तंग घरेलू बजट के कारण ग्राहक अब किफायत को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • बदलती सोच: दशकों तक दक्षिण अफ्रीका का बाजार ब्रांड की प्रतिष्ठा और 'बैज' से प्रभावित रहता था। लेकिन अब यह कीमत-संचालित उपभोक्ता प्राथमिकताओं में बदल गया है। ग्राहकों में अब किसी खास ब्रांड के प्रति लगाव कम हुआ है।

  • चीनी ब्रांड्स की संख्या में बढ़ोतरी: साल 2024 में दक्षिण अफ्रीका के नए वाहन बाजार में केवल 8 चीनी ब्रांड सक्रिय थे, जिनकी संख्या 2025 में बढ़कर 15 हो गई है। इनमें बीवाईडी (BYD), चेरी (Chery) और जीडब्ल्यूएम (GWM) जैसे प्रमुख निर्माता शामिल हैं। साल 2026 में कुछ और चीनी ब्रांड्स के बाजार में प्रवेश करने की उम्मीद है।

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Chinese Automakers Capture 16.8 Per Cent of South African Car Market as Affordable SUVs Reshape Competition
Great Wall Motors (GWM) - फोटो : Great Wall Motors (GWM)

नए बदलावों के बीच कौन सी पारंपरिक कंपनियां शीर्ष पर बनी हुई हैं?

नए प्रतिस्पर्धियों के आने और बाजार पर दबाव के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में ग्राहकों की ब्रांड वफादारी मजबूत बनी रही:

  • टोयोटा का दबदबा: टोयोटा (Toyota) 24.8 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ कुल बाजार में शीर्ष पर बनी हुई है।

  • अन्य प्रमुख कंपनियां: इसके बाद सुजुकी ऑटो (Suzuki Auto) और फॉक्सवैगन (Volkswagen) का स्थान आता है।

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BYD Yuan UP - फोटो : BYD

अमेरिका को होने वाले वाहन निर्यात में कितनी गिरावट आई है?

ऑटोमोटिव निर्यात दक्षिण अफ्रीकी उद्योग का एक मुख्य स्तंभ रहा है। लेकिन साल 2025 में अमेरिकी देशों को होने वाले शिपमेंट में बड़ी गिरावट देखी गई है:

  • निर्यात में कमी: अमेरिका को होने वाला निर्यात 26 प्रतिशत गिरकर 20.4 बिलियन रैंड (1.23 अरब डॉलर) रह गया है।

  • क्षेत्रीय गिरावट: यूएसएमसीए (USMCA - अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा) क्षेत्र को होने वाले कुल शिपमेंट में 26.1 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह संख्या साल 2024 के 26,063 यूनिट्स से घटकर 2025 में केवल 10,042 यूनिट्स रह गई।

  • गिरावट के कारण: 'नाम्सा' के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह पिछले साल अमेरिका द्वारा वाहनों और पुर्जों पर लगाए गए कड़े आयात शुल्क (इंपोर्ट टैरिफ) हैं। इसके अलावा, एक प्रमुख निर्माता ने साल 2024 के आखिर में लॉन्च किए गए अपने नए मॉडल को अमेरिका निर्यात न करने का फैसला किया।

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Chinese Automakers Capture 16.8 Per Cent of South African Car Market as Affordable SUVs Reshape Competition
Mercedes-Benz GLC EV - फोटो : Mercedes-Benz

निर्यात बाजार का भविष्य और आयात की क्या स्थिति है?

रिपोर्ट में कंपनियों की निर्भरता और आयात के स्रोतों की सूची भी साझा की गई है:

  • मर्सिडीज-बेंज पर असर: मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) एकमात्र घरेलू कार निर्माता है जो अमेरिकी बाजार पर अत्यधिक निर्भर है। टैरिफ (आयात शुल्क) के बढ़ते दबाव के कारण साल 2026 में निर्यात में और गिरावट आने की आशंका है, जिससे भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

  • आयात के प्रमुख देश: दक्षिण अफ्रीका में आयात होने वाले कुल हल्के वाहनों (लाइट व्हीकल्स) में संख्या के लिहाज से भारत 56.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। दूसरी ओर, चीन ने भी आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 23.3 प्रतिशत कर ली है। (नोट: 1 डॉलर = 16.6012 रैंड)

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