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Waterlogging: बारिश के पानी से बर्बाद हो सकती है आपकी गाड़ी, सड़क पर भरा है पानी तो न करें यह काम
Wed, 10 Jul 2024 04:14 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 10 Jul 2024 04:14 PM IST
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गुरुग्राम में जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : PTI
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मानसून का मौसम पूरे जोरों पर है। चिलचिलाती गर्मी से राहत तो मिल गई लेकिन, बारिश का पानी भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहन चालकों की परेशानियों को और बढ़ा देता है। पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। जिससे शहरों में भारी जलभराव हो रहा है और आने-जाने और दैनिक जीवन में व्यवधान आ रहा है। देश में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले शहरों में नई दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। जलभराव न सिर्फ लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करता है। बल्कि हमारे वाहनों को भी नुकसान पहुंचाता है, जो अक्सर बर्बाद हो सकता है।
जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : अमर उजाला
दोपहिया वाहन पानी के नुकसान की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। क्योंकि इनमें कई खुले मैकेनिकल पुर्जे होते हैं जो जंग लगने और खराब होने की संभावना रखते हैं। भारी मानसून ट्रैफिक के दौरान प्रभावी ढंग से निकलने के लिए दोपहिया वाहन सबसे अच्छे विकल्प होते हैं। वहीं, इसके साथ ही उन्हें सबसे ज्यादा जोखिम भी उठाना पड़ता है। इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल कंपोनेंट्स को होने वाला कोई भी नुकसान दोपहिया वाहन को चलाने में असमर्थ बनाने की क्षमता रखता है। और इसकी वजह से, यह सवारों के लिए असुरक्षित हो जाता है। लगातार बारिश के साथ, हमारे वाहन लगातार वातावरण के संपर्क में रहते हैं। और नतीजतन, जब भी हम उन पर सवार होते हैं तो उनके खराब होने की संभावना ज्यादा होती है।
जब भी ऐसी परिस्थितियां पैदा हों, तो उनसे निपटने के लिए दोपहिया वाहन की कमजोरियों और बदलते मौसम का उन पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है।
जब भी ऐसी परिस्थितियां पैदा हों, तो उनसे निपटने के लिए दोपहिया वाहन की कमजोरियों और बदलते मौसम का उन पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है।
बीकानेर में जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : PTI
इंजन और एग्जॉस्ट पाइप में पानी भरना
अगर कोई दोपहिया वाहन बाढ़ के पानी में फंस जाता है, तो उसके इंजन में हवा के इनलेट या स्पार्क प्लग कैविटी जैसी खुली जगहों के जरिए पानी भरने की बहुत ज्यादा संभावना होती है। इससे हाइड्रोलॉक हो सकता है। जहां इंजन के भीतर अनियमित कंप्रेशन होता है और यह इंजन को सीज कर सकता है। पानी हवा/ईंधन मिश्रण की तरह कंप्रेस नहीं होता है जिसकी इंजन को जरूरत होती है। जब सिलेंडर के अंदर पानी है और आप इंजन स्टार्ट करते हैं, तो पिस्टन इंजन ब्लॉक के अंदर अत्यधिक दबाव बनाते हैं जिससे यह बर्बाद हो सकता है।
अगर कोई दोपहिया वाहन बाढ़ के पानी में फंस जाता है, तो उसके इंजन में हवा के इनलेट या स्पार्क प्लग कैविटी जैसी खुली जगहों के जरिए पानी भरने की बहुत ज्यादा संभावना होती है। इससे हाइड्रोलॉक हो सकता है। जहां इंजन के भीतर अनियमित कंप्रेशन होता है और यह इंजन को सीज कर सकता है। पानी हवा/ईंधन मिश्रण की तरह कंप्रेस नहीं होता है जिसकी इंजन को जरूरत होती है। जब सिलेंडर के अंदर पानी है और आप इंजन स्टार्ट करते हैं, तो पिस्टन इंजन ब्लॉक के अंदर अत्यधिक दबाव बनाते हैं जिससे यह बर्बाद हो सकता है।
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जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : अमर उजाला
इंजन में पानी भरने से तेल खराब हो सकता है। जब पानी इंजन के तेल के साथ मिल जाता है, तो यह तेल के लुब्रिकेशन का खासियत को कम कर देता है। जिससे इंजन के इंटरनल कंपोनेंट्स , जैसे बियरिंग्स और क्रैंकशाफ्ट के बीच गर्मी और घर्षण (फ्रिक्शन) का स्तर बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, पानी इंजन के कंपोनेंट्स को तेजी से जंग लगाने का कारण बनता है। जिससे कुल मिलाकर इंजन की लाइफ कम हो जाती है। और समय से पहले ही घिसावट हो जाती है।
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पटना में जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : PTI
इलेक्ट्रिक कंपनोंट्स और उनकी कमजोरियां
अगर दोपहिया वाहन को जलभराव वाले क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, तो पानी उसके इलेक्ट्रिक सिस्टम में रिस सकता है। जिससे उसकी पूरी कार्यप्रणाली खराब हो सकती है। इंटरनल वायरिंग, सेंसर और जरूरी फीचर्स सभी इस बात पर निर्भर करती हैं कि वे सीधे पानी के संपर्क में न हों। जो पानी के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण जंग खा सकते हैं। जंग इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की कंडक्टिविटी (चालकता) को कम कर देता है। जिसकी वजह से यह पूरी तरह फेल हो सकती है। जिससे दोपहिया वाहन चलाने लायक नहीं रहता।
अगर दोपहिया वाहन को जलभराव वाले क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, तो पानी उसके इलेक्ट्रिक सिस्टम में रिस सकता है। जिससे उसकी पूरी कार्यप्रणाली खराब हो सकती है। इंटरनल वायरिंग, सेंसर और जरूरी फीचर्स सभी इस बात पर निर्भर करती हैं कि वे सीधे पानी के संपर्क में न हों। जो पानी के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण जंग खा सकते हैं। जंग इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की कंडक्टिविटी (चालकता) को कम कर देता है। जिसकी वजह से यह पूरी तरह फेल हो सकती है। जिससे दोपहिया वाहन चलाने लायक नहीं रहता।