देश में आये दिन पेट्रोल और डीजल की घटती और बढ़ती कीमतों से जहां हम सभी परेशान हैं तो वही इनसे निकलने वाला धुआं हर दिन हमारी ज़िन्दगी कम करता जा रहा है, हवा में सांस लेना तक मुश्किल होता जा रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो अगले कुछ सालों में हम सब का जीवन काफी मुश्किलों से भरा होगा। हंलाकि अब सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए इस तरफ तेजी से ध्यान दे रही है, बीएस-6 वाहनों आने शुरू हो गये हैं और अगले साल अप्रैल से सभी वाहन बीएस-6 इंजन के बिना सड़कों पर नहीं उतरेंगे। दूसरी तरह सरकार अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर फोकस कर रही है लेकिन अभी भी चुनौतियां कम नहीं हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियां और चुनौतियां, जानिये क्या हैं समाधान?
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आने वाला कल इलेक्ट्रिक गाड़ियों का है
हाल ही कुछ सालों में दुनिया भर में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने में लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ा है। जानकारी के बता दें कि इस समय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बाजार में चीन तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है और लिथियम-आयन बैटरी का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश बना हुआ है। ऑटोमोबाइल हब कहे जाने वाले देश ‘भारत’ में जहां मौजूदा समय में 48 ऑटोमोबाइल कंपनी, 12 मोटरसाइकिल कंपनियां और 747 ऑटो कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं और इनमें करीब 20 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। ऐसे में अगर ये सभी कंपनियां यदि सरकार के साथ मिलकर काम करें तो यक़ीनन हमारा देश भी इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में सबसे आगे नजर आएगा।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सबसे बड़ी चुनौतियां
तेजी से भागती इस लाइफ में लोगों के पास सब्र नाम की कोई चीज ही नहीं है। पेट्रोल डलवाते समय 5 मिनट की देरी मंजूर नहीं है जबकि CNG स्टेशनों का हाल तो हम सभी को मालूम ही है। ऐसे में एक इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज होने में जहां 6 से 8 घंटे का समय लगता है जोकि सबसे बड़ा रोड़ा है। हमारे देश में जो भी इलेक्ट्रिक गाड़ियां मौजूद हैं वो 6 से 8 घंटे फुल चार्ज पर 100 किलोमीटर की दूसरी तय करती नहीं जबकि कई अन्य देशों में फास्ट चार्जिंग वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां एक लम्बे समय से मौजूद हैं और 1 घंटे में फुल चार्ज होकर करीब 300 किलोमीटर तक की दूरी तय करती हैं। वही कुछ समय फिक्की ने अपनी एक रिपोर्ट में नीति आयोग को यह सुझाव दिया था कि जब तक बैटरी की समस्या को दूर नहीं किया जायेगा तब तक भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की योजना कामयाब नहीं हो पायेगी। लेकिन अब धीरे-धीरे कुछ ऑटो कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं और फास्ट चार्ज और ज्यादा दूसरी तय करने वाले वाहनों पर काम कर रही हैं। खैर फास्ट चार्जिग और ज्यादा माइलेज वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने के लिए हमें विश्व के दूसरे देशों से बेहतर तकनीक से लैस कंपनियों से समझौता होना चाहिए।
रेग्युलेशन और रेट
इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर एक बड़ी समस्या यह भी है कि चार्जिंग के लिए कोई घोषित रेग्युलेशन और रेट नहीं है। जबकि देश के अलग-अलग राज्यों में फिक्स दर तय करना भी एक बड़ी चुनौती होगा। सोचने वाली बात यह है कि यदि बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक गाड़ियां भारत में आती है तो बिजली की निर्बाध आपूर्ति भी आवश्यक होगी और कुछ शहरों को छोड़ दिया जाए तो इस स्थिति को हासिल कर पाना बहुत दुरूह लगता है।
चार्जिंग स्टेशनों का कम होना
फिलहाल देश में करीब 328 चार्जिंग प्वाइंट हैं जिनमें से कुछ काम नहीं करते हैं वही ये काफी दूरी पर हैं, जबकि इन्हें हर 1 से 5 किलोमीटर पर खोलना चाइये था। जाने-माने ऑटो एक्सपर्ट रंजॉय मुख़र्जी की माने तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कामयाबी उपलब्धता पर निर्भर करती है। सरकार को जगह-जगह चार्जिंग प्वाइंट लगाना होगा। फ़ास्ट चार्जिंग सुविधा देनी होगी। साथ ही, चार्जिंग रेट सस्ता कैसे हो इसपर सरकार को ध्यान देना होगा। दूसरी तरफ रिसाइकिलिंग पर भी फोकस करना बेहद जरूरी होगा। भारत सरकार के बिजली मंत्रालय का सरकारी उपक्रम EESL (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड) ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली-एनसीआर में 4000 चार्जिंग प्वाइंट के लिए टेंडर किया है जिसमें से कई चार्जिंग प्वाइंट अब ऑपरेशनल भी हो चुके हैंI