जैसे-जैसे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हो रहा हैं, वैसे ही गाड़ी के माइलेज को लेकर लोगों की बैचेनी बढ़ने लगती है। इंटरनेट पर टिप्स और ट्रिक्स खोजने का सिलसिला शुरू हो जाता है। हजारों जानकारियों में से सही टिप्स खोजना आसान काम नहीं है। वहीं सोशल मीडिया पर भी तमाम तरह के अफवाहें भी चलती रहती हैं कि ऐसा करने से गाड़ी ज्यादा माइलेज देगी। आइए जानते हैं आज कुछ ऐसे ही सोशल मीड़िया पर चलने वाले मिथकों के बारे में...
कैसे बढ़ाएं कार का माइलेज, ये 10 टिप्स करेंगे आपकी मदद
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मिथक नंबर- एक : सुबह भरवाएं तेल, मिलेगा ज्यादा माइलेज
यह काफी पॉपुलर मिथक है। सीएनजी के मामले में तो यह सही है, लेकिन पेट्रोल-डीजल को लेकर यह बिल्कुल गलत है। इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि गर्मी या उष्मा की वजह से ईंधन फैलता है, वहीं अगर सुबह पेट्रोल-डीजल ठंडा होगा, तो टैंक में ज्यादा आएगा। इस तर्क में आधी सच्चाई है और आधा झूठ है। गर्मी की वजह से पेट्रोल फैलता है, यह सही है, लेकिन ईंधन को जमीन के नीचे टैंकों में स्टोर किया जाता है, जहां बढ़ती गर्मी की पेट्रोल के घनत्व में कोई भूमिका नहीं होती है, इसलिए जब भी आप चाहें गाड़ी का टैंक फुल करवा सकते हैं।
मिथक नंबर- दो: गाड़ी में कम तेल, इंजन को नुकसान
यह आमतौर पर लोगों में गलत धारणा है कि अगर गाड़ी में तेल का स्तर का कम है, इंजन को नुकसान होता है और कम माइलेज मिलता है। फ्यूल टैंक इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि तेल इंजन तक पहुंचता रहे। जैसे ही इंजन तक तेल पहुंचना बंद होगा, इंजन अपने आप बंद हो जाएगी और गाड़ी रास्ते में ही रूक जाएगी। हां अगर तेल की क्वॉलिटी खराब है, तो निश्चित तौर पर इंजन के पार्ट्स पर असर पड़ेगा।
मिथक नंबर- तीन: आम ईंधन के मुकाबले प्रीमियम फ्यूल से मिलता है ज्यादा माइलेज
पेट्रोल पंप पर जाते हैं तो वहां बड़े-बड़े विज्ञापन दिखाई देते हैं कि प्रीमियम या पावर फ्यूल। दावा किया जाता है कि इसे डलवाने के बाद इंजन की परफॉरमेंस बढ़ जाएगी। जहां रेगुलर फ्यूल में जहां 87 नंबर ऑक्टेन होते हैं, वहीं प्रीमियम में 91 से 97 तक ऑक्टेन होता है। ज्यादा ऑक्टेन होने का फायदा यह है कि इससे फ्यूल की इग्निगेशन क्वॉलिटी बढ़ जाती है। इससे माइलेज तो नहीं बढ़ता लेकिन पिकअप जरूर बढ़ जाता है।
मिथक नंबर- चार: आपकी कार की माइलेज रीडिंग हैं गलत
फ्यूल गेज बताता है कि गाड़ी के टैंक में कितना ईंधन बचा है। लेकिन गाड़ी कितना माइलेज दे रही है इसकी कैलकुलेशन छोटी ड्राइव में नहीं की जा सकती है। इसके लिए टैंक फुल कराने के बाद लॉन्ग ड्राइव करके ही सही माइलेज का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह तथ्य सही है कि कंपनियां कार का सिटी माइलेज और हाईवे का माइलेज अलग-अलग देती हैं। गलत रीडिंग की बात बिल्कुल बेबुनियाद है।