जापान की बड़ी कंपनियों Sony (सोनी) और Honda (होंडा) की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) साझेदारी टूट गई है। दोनों कंपनियों ने अपने पहले मॉडल Afeela 1 (अफीला 1) और 2028 के लिए प्लान किए गए दूसरे मॉडल को भी रद्द कर दिया है।
Sony-Honda: सोनी-होंडा की ईवी साझेदारी टूटी? आखिर क्या हुआ Afeela प्रोजेक्ट के साथ?
Sony और Honda का जॉइंट वेंचर खत्म हो गया है। इसके साथ ही होंडा की रणनीतिक बदलाव और ज्यादा लागत की वजह से Afeela EV को रद्द कर दिया गया है। यह जापान की इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में चल रही व्यापक चुनौतियों को दर्शाता है। जानें क्या है पूरा मामला।
क्या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी कारण बनी?
हां, ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश से जुड़ी चुनौतियों ने भी इस प्रोजेक्ट को प्रभावित किया।
होंडा ने अपनी ‘ई-आर्किटेक्चर’ प्लेटफॉर्म को बंद कर दिया, जो अफीला जैसे मॉडल्स की नींव बनने वाली थी।
Sony की रणनीति क्या थी?
सोनी ने खुद कार बनाने के बजाय “asset-light” (एसेट-लाइट) रणनीति अपनाई थी।
उसका फोकस था:
-
CMOS सेंसर
-
अनरियल इंजन आधारित इंटरफेस
-
प्लेस्टेशन इंटीग्रेशन
यानि सोनी कार को एक “एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म” बनाना चाहती थी। जबकि मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह होंडा पर निर्भर थी।
क्या बाजार की परिस्थितियों ने भी असर डाला?
हां, वैश्विक स्तर पर महंगे ईवी की मांग धीमी हो रही है।
साथ ही, लागत बढ़ने और आर्थिक दबाव ने इस प्रोजेक्ट को और मुश्किल बना दिया।
क्या प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ा कारण थी?
बिल्कुल, Tesla (टेस्ला) और चीन की कंपनियों जैसे BYD (बीवाईडी) और Xiaomi (शाओमी) ने ईवी बाजार में मजबूत पकड़ बना ली है।
खासकर शाओमी ने सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग दोनों को साथ लेकर तेजी से सफलता हासिल की। जिससे सोनी-होंडा की स्थिति कमजोर हुई।
Honda पर क्या असर पड़ेगा?
होंडा को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है और 2025 में घाटे की संभावना जताई जा रही है।
यह कंपनी के लिए कई दशकों में पहली ऐसी स्थिति हो सकती है।
जिन ग्राहकों ने Afeela 1 के लिए बुकिंग की थी, उन्हें पूरा पैसा वापस किया जाएगा।
दोनों कंपनियां अब यह तय कर रही हैं कि इस साझेदारी को टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग में बदला जाए या पूरी तरह खत्म कर दिया जाए।
ईवी बाजार नहीं है आसान!
Afeela प्रोजेक्ट का बंद होना दिखाता है कि ईवी बाजार में टिके रहना आसान नहीं है।
खासकर जब प्रतिस्पर्धा तेज हो और लागत ज्यादा हो, तो बड़ी कंपनियों के लिए भी रणनीति बदलना जरूरी हो जाता है।