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Road Accidents: सड़क दुर्घटनाओं, मौतों को कम करने के लिए हेलमेट पर जोर, WHO ने जारी किए दिशानिर्देश
Mon, 12 Sep 2022 01:29 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 12 Sep 2022 01:29 PM IST
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हेलमेट
- फोटो : i stock
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) (डब्ल्यूएचओ) ने सड़क दुर्घटनाओं और हताहतों की संख्या को कम करने के लिए दुनिया भर में दो और तीन पहिया वाहनों के लिए हेलमेट इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा है और इस बारे में दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशानिर्देशों का मकसद दोपहिया और तिपहिया सवारों को हेलमेट पहनने के फायदों के साथ-साथ सही तरह के उत्पादों के बारे में जागरूक करना है जो जिंदगी बचाने में मदद कर सकते हैं। डब्ल्यूएचओ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के विशेषज्ञों की मदद से दिशानिर्देश लेकर आया है। सड़क दुर्घटना के मामलों में होने वाली मौतों या चोटों को कम करने के लिए दिशा-निर्देशों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।
हेलमेट
- फोटो : i stock
डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक लोगों को पूरे चेहरे को ढकने वाला हेलमेट पहनना चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि अधिकतम सुरक्षा प्रदान करने के लिए हेलमेट को कसकर बांधा जाना चाहिए। दुनियाभर में स्वास्थ्य के मुद्दों पर नजर रखने वाली इस संस्था के मुताबिक, ऐसे हेलमेट में घातक चोटों को 64 प्रतिशत तक और मस्तिष्क की चोटों को 74 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता होती है।
सायरस मिस्त्री इसी कार में सवार थे।
- फोटो : For Reference Only
ये दिशानिर्देश ऐसे समय में आए हैं जब हाल ही में सायरस मिस्त्री की मौत के बाद भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ी हुई है। 2021 में भारत में होने वाली सभी सड़क दुर्घटनाओं में से लगभग आधे में दोपहिया और तिपहिया वाहन शामिल थे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा साझा की गई रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल भारत में हुई सभी सड़क दुर्घटनाओं में से 44 प्रतिशत से ज्यादा दोपहिया वाहन शामिल थे। इनमें से ज्यादातर दुर्घटनाएं तेज रफ्तार के कारण हुई हैं। पिछले साल दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाने वालों की संख्या लगभग 70,000 थी, जो कुल मिलाकर सड़क दुर्घटनाओं में हुई 1.6 लाख मौतों का लगभग आधा है।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : For Reference Only
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में दोपहिया और तिपहिया वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में सड़क यातायात में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 43 प्रतिशत में दो और तिपहिया वाहन शामिल थे। डब्ल्यूएचओ में सुरक्षा और गतिशीलता के प्रमुख डॉ नहान ट्रान ने कहा, "ये नए मैनुअल नीति निर्माताओं को सुरक्षित गतिशीलता प्रणाली बनाने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं, जिन्हें हमें 2030 तक दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को आधा करने की जरूरत है। खराब बुनियादी ढांचे के कारण, विशेष रूप से विकासशील देशों में, पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर अक्सर बहुत ज्यादा खतरा होता है। मोटरसाइकिल, स्कूटर, साइकिल और ई-बाइक का तेजी से प्रसार जारी है और जिंदगी बचाने वाले हेलमेट का इस्तेमाल जरूरी है।"
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Helmet
- फोटो : Istock
आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों का कहना है कि पैदल चलने वाले भी सड़क हादसों के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। 2013 और 2016 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली सभी मौतों की दर से पैदल चलने वालों की मौत लगभग दोगुनी हो गई। 2021 में, भारत में सड़क दुर्घटनाओं में पैदल चलने वालों की मौत को तीसरे स्थान पर रखा गया है, जो कि होने वाली दुर्घटनाओं की कुल संख्या में 12 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देता है। आईआईटी दिल्ली की प्रोफेसर गीतम तिवारी ने कहा, "भारत में सड़क यातायात दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा पैदल चलने वालों का है। भारत के कुछ बड़े शहरों में, मारे गए पैदल चलने वालों का अनुपात सड़क यातायात में होने वाली मौतों का 60 प्रतिशत तक है।"