भूत होते हैं या नहीं, इसको लेकर हमेशा से विवाद रहा है। अगर आप भी भूत-प्रेत में विश्वास रखते हैं, तो ऐसा करने वाले आप इकलौते नहीं है। बता दें कि दुनिया की कई संस्कृतियों में लोग आत्माओं और मृत्यु के साथ ही दूसरी दुनिया में रहने वाले लोगों पर भरोसा करते हैं। हालांकि, भूतों पर विश्वास करना दुनिया में सबसे ज्यादा मानी जाने वाली पैरानॉर्मल एक्टिविटी में से एक है। हर दिन हजारों लोग भूतों की कहानियां पढ़ते हैं और भूतों पर बनी फिल्मों को देखते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि भूतों के भूत, वर्तमान और भविष्य को लेकर विज्ञान का क्या मानना है?
अजब-गजब: आखिर क्या सच में भूत होते हैं? जानिए वैज्ञानिकों का जवाब
बता दें कि भूतों और आत्माओं पर अध्ययन के लिए 1882 में सोसाइटी फॉर फिजिकल रिसर्च बनाई गई थी। इलेनॉर सिडविक नामक महिला इस सोसाइटी की प्रेसीडेंट और इन्वेस्टिगेटर थीं। सिडविक को असली फीमेल घोस्टबस्टर कहा जाता था। अमेरिका में 1800 के अंत में भूतों पर काफी रिसर्च और काम किया गया। लेकिन बाद में ये बात सामने आई कि इसका मुख्य जांचकर्ता हैरी होडिनी एक फ्रॉड है।
वैसे वैज्ञानिक आधार पर भूतों पर रिसर्च करना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि इस तरह की एक्टिविटी में अजीबोगरीब और अप्रत्याशित घटनाएं घटती हैं। जैसे - दरवाजों का खुद खुलना या बंद होना, किसी मृत रिश्तेदार का दिखना, चाभी का गायब हो जाना, सड़क पर परछाइयों का घूमना, इत्यादि। साल 2016 में समाजशास्त्री डेनिस और मिशेल वासकुल ने भूतों पर एक किताब लिखी थी, जिसका नाम था Ghostly Encounters: The Hauntings of Everyday Life। इस किताब में कई लोगों के द्वारा भूतों पर किए गए अनुभव पर कहानियां थी। इस किताब में यह बात सामने आई कि बहुत से लोग इस बात को लेकर पुख्ता नहीं थे कि उन्होंने सच में भूत ही देखा है। क्योंकि जिस तरह की चीजें उन्होंने देखी, वो परंपरागत भूत की तस्वीरों से नहीं मिलती हैं।
ज्यादातर लोगों का ये भी मानना था कि उन्होंने ऐसी चीजें और घटनाएं महसूस की हैं, जिन्हें परिभाषित करना काफी मुश्किल है। लोग अपने हिसाब से भूतों को नाम देते हैं, जैसे- पोल्टरजिस्ट्स यानी डरने वाला भूत, रेसीड्यूल हॉटिंग्स यानी अवशिष्ट भूतिया, इंटेलिजेंट स्पिरिट्स यानी बुद्धिमान आत्माएं और शैडो पीपुल यानी परछाइयों की तरह दिखने वाले लोग। इन नामों को सुनने के बाद ऐसा लगता है कि इंसानों ने भूतों की भी कई प्रजातियां बना दी हैं। भूतों के ये नाम अलग-अलग इंसान के हिसाब से बदलते रहते हैं।
विज्ञान के मुताबिक, जब भूतों के बारे में सोचा जाता है, तो सबसे पहले ये बात सामने आती है कि क्या ये वस्तु हैं या नहीं? क्या वो दरवाजों को खुद खोल या बंद कर सकते हैं? क्या भूत एक कमरे से कोई चीज दूसरे कमरे में फेंक सकते हैं? भूतों से जुड़े इन चीजों को लेकर कई तरह विवाद हैं। अगर तार्किक तौर पर भौतिकी के फॉर्मूले से देखें, तो सवाल ये उठता है कि अगर भूत इंसानी आत्माएं हैं तो वो कपड़ों में क्यों दिखती हैं? उनके हाथों में डंडे, टोपी और कपड़ें क्यों रहते हैं?