Cheetah: भारत में चीता इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। कुछ दिनों पहले ही नामीबिया (Namibia) से 8 विदेशी चीते (Cheetahs) भारत लाए गए हैं। भारत में साल 1947 में आखिरी बार चीता देखा गया था जिसके बाद भारत सरकार ने साल 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया। हालांकि अब 70 साल बाद शेर, बाघ, तेंदुआ के अलावा चीते भी देखने को मिलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने जन्मदिन के मौके पर इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में छोड़ा। इन चीतों में पांच मादा हैं और तीन नर हैं।
Cheetah: जयपुर में 80 साल पहले तक पाले जाते थे चीते, मीट के साथ खिलाई जाती थी ये खास चीज
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इतिहास के जानकर बताते हैं कि जयपुर के इस मोहल्ले में अफगानिस्तान मूल के चीता ट्रेनर रहते थे। जयपुर और चीतों से जुड़ी कई ऐतिहासिक कहानियां हैं जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी होगी। अकबर के राज के दौरान मुगलों के पास चीतों की पूरी फौज थी।
कहा जाता है कि मुगल सम्राट इन चीतों के माध्यम से शिकार करते थे। शिकार करने के लिए इन चीतों को बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती थी। जयपुर के पास स्थित सांगानेर के जंगलों में शिकार के लिए अकबर आता था और चीतों की मदद से हिरण का शिकार करता था।
जयपुर में था चीतों का मोहल्ला
सांगानेर के जंगलों तक चीते सीमित नहीं थे, बल्कि पुराने जयपुर शहर में एक चीतों का मोहल्ला था जिसमें एक मकान था। इस मकान का निजाम महल रखा गया था और यह कभी चीता ट्रेनर्स का सेंटर था। महाराजा सवाई जय सिंह प्रथम का जब शासन था उस समय अफगानिस्तान से आने वाले वाजिद खान यहां रहते थे। महाराज की तरफ से चीतों को ट्रेनिंग देने के लिए रखा गया था। महाराजा के वारिस इस परंपरा को चलाते रहे।
खास तरह से होती थी रखवाली
इन चीतों को घरों में रखते थे और इनके सोने के लिए बड़ी-बड़ी अलमारियां थीं। चीतों के दिमाग को ठंडा रखने के लिए मीट के साथ खासतौर पर गुलकंद और पनीर खाने को दिया जाता था। इन चीतों को महाराजा का खूब प्यार मिलता था। चीतों को शिकार के लिए बैलगाड़ी में लेकर सांगानेर के जंगलों में ले जाया जाता था।