Sunlight On Earth: पृथ्वी पर जीवन का आधार सूरज की रोशनी है। पेड़-पौधों की वृद्धि से लेकर मौसम का संतुलन, जल चक्र और सोलर पावर तक सीधे तौर पर सूरज पर निर्भर है। वैज्ञानिकों ने बेहद चौंकाने बदलाव का पता लगाया है, जो भविष्य में दुनिया के कई हिस्सों के लिए चुनौती साबित हो सकता है। हाल ही में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है, जिसमें संकते मिला है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने वाले सूर्य का प्रकाश का वितरण बदल रहा है। इस प्रभाव आने वाले समय में दुनिया के कई इलाकों पर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: दुनिया के कुछ हिस्सों में पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, कहीं छा सकता है अंधेरा
Sunlight On Earth: हाल ही में एक अध्ययन सामने आया है, जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। इस अध्ययन के मुताबिक, आने वाले वर्षों में पृथ्वी के कुछ इलाकों में सूरज की रोशनी कम पहुंचेगी, तो कहीं पर ज्यादा।
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इन इलाकों में घट सकती है धूप
अध्ययन के मुताबिक आर्कटिक और अंटार्कटिका जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों में आने वाले समय में पृथ्वी तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा कम हो सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि दुनिया में बढ़ रहे तापमान की वजह से जलवाष्प की मात्रा बढ़ती जा रही है और बादलों की संरचना में भी बदलाव हो रहा है। घने और चमकदार बादल सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी पर पहुंचने से पहले वापस अंतरिक्ष की तरफ परावर्तित कर देते हैं। इसके कारण ध्रुवीय इलाकों में पृथ्वी तक पहुंचने वाली सौर ऊर्जा घट सकती है। अनुमान के मुताबिक, आर्कटिक इलाके में गर्मियों के समय सूर्य की रोशनी में करीब 15 प्रतिशत तक कमी हो सकती है।
भारत समेत कई क्षेत्रों में बढ़ सकती है धूप
एक तरफ ध्रुवीय क्षेत्रों में सूरज की रोशनी कम होने की संभावना है, जबति भारत, अमेरिका और यूरोप के मध्य अक्षांश वाले इलाकों में इसका विपरित असर देखने को मिल सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन क्षेत्रों में बादल कम हो सकते हैं, जिसके कारण सूर्य की किरणें ज्यादा आसानी से पृथ्वी तक पहुंचेंगी। इसके परिणाम स्वरूप यह हो सकता है कि गर्मी के दिनों में धूप ज्यादा तेज हो सकती है और तापमान बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों में हीटवेव पहले ही गंभीर चुनौती बनकर सामने आ सकती है। इस बदलाव से गर्मी की तीव्रता बढ़ सकती है।
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क्यों सूर्य की रोशनी के संतुलन में हो रहा है बदलाव?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वातावरण ज्यादा नमी धारण कर रहा है। जलवाष्प सूरज की कुछ ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है। यह रोशनी की मात्रा को प्रभावित करता है। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में बादलों के बनने और फैलने का पैटर्न बदल रहा है। कुछ इलाकों में बादल बढ़ रहे हैं, तो कुछ क्षेत्रों में कम हो रहे हैं। इसके कारण कहीं धूप कम, तो कुछ स्थानों पर ज्यादा धूप पहुंच रही है। वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को डाउनवर्ड सरफेस सोलर रेडिएशन के तौर पर परिभाषित करते हैं यानी वह सौर ऊर्जा जो वातावरण को पार कर पृथ्वी की सतह तक आती है।
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ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने के साथ ही बदलाव और स्पष्ट होगा
शोधकर्ताओं के कहा है कि यह सिर्फ भविष्य की आशंका नहीं है। हाल के वर्षों में मिले सैटेलाइट आंकड़ों में भी इस तरह के संकेत मिले हैं कि पृथ्वी पर पहुंचने वाली सूर्य की ऊर्जा में बदलाव हो रहा है। अध्ययन में विभिन्न स्तरों के कार्बन उत्सर्जन वाले परिदृश्यों के विश्लेषण और लगभग सभी स्थितियों से यह निष्कर्ष निकला कि जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी, वैसे-वैसे यह बदलाव और साफ होता जाएगा।
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