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Doomsday Clock: प्रलय के सबसे करीब पहुंची दुनिया, डूम्सडे क्लॉक में बदला समय, विनाश से सिर्फ 85 सेकेंड है दूर
Thu, 29 Jan 2026 09:40 AM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Thu, 29 Jan 2026 09:40 AM IST
सार
Doomsday Clock 85 Seconds to Midnight: वैज्ञानिकों ने दुनिया में बढ़ते विनाश के खतरों को देखते हुए प्रलय की घड़ी (Doomsday Clock) को 4 सेकेंड आगे बढ़ा दिया है। उन्होंने प्रसिद्ध प्रलय की घड़ी को (Doomsday Clock 85 seconds to midnight) मिडनाइट (आधी रात) से 85 सेकेंड पहले सेट कर दिया है।
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प्रलय के सबसे करीब पहुंची दुनिया, डूम्सडे क्लॉक में बदला समय, विनाश से सिर्फ 85 सेकेंड है दूर
- फोटो : Adobe Stock
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Doomsday Clock 85 Seconds to Midnight: दुनिया में चल रहे संघर्षों और बढ़ते तनाव के बीच वैज्ञानिकों ने प्रलय की घड़ी (Doomsday Clock) के समय में बदलाव किया है। उन्होंने घड़ी के समय को आधी रात के और भी करीब कर दिया। परमाणु वैज्ञानिकों की टीम ने प्रसिद्ध प्रलय की घड़ी को (Doomsday Clock 85 seconds to midnight) मिडनाइट (आधी रात) से 85 सेकेंड पहले सेट कर दिया है।
प्रलय के सबसे करीब पहुंची दुनिया, डूम्सडे क्लॉक में बदला समय, विनाश से सिर्फ 85 सेकेंड है दूर
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क्यों बदला गया प्रलय की घड़ी का समय?
- प्रलय की घड़ी में चार सेकेंड आगे किए जाने के बाद बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट की अध्यक्ष एलेक्जेंड्रा बेल ने बताया कि प्रलय की घड़ी का संदेश इससे अधिक साफ नहीं हो सकता है।
- उन्होंने बताया कि दुनिया में तबाही का खतरा बढ़ रहा है और सहयोग कम होता जा रहा है। दुनिया के पास समय कम होता जा रहा है।
प्रलय के सबसे करीब पहुंची दुनिया, डूम्सडे क्लॉक में बदला समय, विनाश से सिर्फ 85 सेकेंड है दूर
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कौन-कौन सी चीज का बढ़ रहा है खतरा?
- एलेक्जेंड्रा बेल ने कहा कि बदलाव भी जरूरी है और मुमकिन भी। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक समुदाय को अपने नेताओं से तत्काल कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
- बेन ने अपने बयान में कहा कि बुलेटिन के साइंस और सिक्योरिटी बोर्ड का मानना है कि इंसानियत ने उन बड़े खतरों पर तरक्की नहीं की है जो हम सभी को खतरे में डालते हैं। इसलिए घड़ी के समय को आगे बढ़ाते हैं।
- उनका कहना है कि परमाणु हथियारों, जलवायु परिवर्तन और नुकसान पहुंचाने वाली तकनीक से दुनिया को जो खतरे हैं, वो सभी बढ़ रहे हैं। हर सेकंड कीमती है और दुनिया के पास समय कम होता जा रहा है।
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क्यों दुनिया के अस्तित्व के लिए बढ़ रहा है खतरा?
- साइंस एंड सिक्योरिटी बोर्ड के चेयरमैन डेनियल होल्ज ने चेतावनी देते हुए कहा कि बंटी हुई दुनिया पूरी इंसानियत को और भी कमजोर कर सकती है।
- बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अधिक आक्रामक और विरोधी होती जा रही हैं। इससे मुश्किल से हुए ग्लोबल समझौतों को तोड़ा जा रहा है। इससे अस्तित्व के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।
- उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ, तो तबाही की संभावना और बढ़ जाएगी।
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कब और क्यों बनाई गई थी घड़ी?
- शिकागो की नॉन-प्रॉफिट संस्था बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने मैनहट्टन परियोजना के तहत 1947 में कोल्ड वॉर के दौरान डूम्सडे क्लॉक बनाई थी। हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद महाविनाश की घड़ी (डूम्सडे क्लॉक) बनाई गई थी।
- परमाणु वैज्ञानिकों के बुलेटिन की तरफ से हर साल इस घड़ी का समय बदला जाता है। इसलिए घड़ी बनाई गई थी ताकि लोगों को चेतावनी दी जा सके कि मानव जाति दुनिया को नष्ट करने के कितनी करीब है।