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Trojan Asteroid: वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में खोजा पृथ्वी का 'दोस्त', जानिए इसके बारे में सबकुछ

Fri, 04 Feb 2022 10:21 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Fri, 04 Feb 2022 10:21 AM IST
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earth has a second trojan asteroid will share its orbit for next 4000 years
अंतरिक्ष में मिला पृथ्वी का 'दोस्त' - फोटो : iStock

दुनियाभर के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने की कोशिश में सालों से लगे हुए हैं। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष के कई रहस्यों से पर्दा तो उठा दिया है, लेकिन अभी भी कई रहस्य हैं। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने धरती के एक दोस्त को खोजा है। अंतरिक्ष में सिर्फ पृथ्वी ही सूरज का चक्कर नहीं लगा रही है बल्कि धरती का दोस्त भी एक कक्षा में रहकर परिक्रमा कर रहा है। वैज्ञानिकों की तरफ से इसे अर्थ ट्रोजन एस्टेरॉयड नाम दिया गया है। 



वैज्ञानिकों ने साल 2020 में सबसे पहले इस एस्टेरॉयड की खोज की थी। खगोलविदों ने सोचा था कि उन्होंने किसी अनोखे चीज की खोज की है, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने इसकी सच्चाई बताई है। उन्होंने कहा कि यह एक अर्थ ट्रोजन एस्टेरॉयड है। उनका कहना है कि यह एस्टेरॉयड 4 हजार साल तक धरती की परिक्रमा करता रहेगा। तो आइए जानते हैं अर्थ ट्रोजन एस्टेरॉयड के बारे में सबकुछ...

earth has a second trojan asteroid will share its orbit for next 4000 years
अंतरिक्ष में मिला पृथ्वी का 'दोस्त' - फोटो : iStock

यह दूसरा और सबसे बड़ा एस्टेरॉयड है जो धरती के साथ सूरज का चक्कर लगा रहा है। छोटी आसमानी चट्टानों को ट्रोजन एस्टेरॉयड कहा जाता है। यह एक ग्रह के साथ परिक्रमा पथ पर चक्कर लगाते हैं। अभी तक वैज्ञानिकों ने सोलर सिस्टम और उसके बाहर ग्रहों के इन ट्रोजन एस्टेरॉयड को खोजा था। अब धरती के एक दोस्त को खोजा गया है। साल 2010 में भी एक ऑब्जेक्ट 2010 TK7 खोजा गया था। यह ऑब्जेक्ट भी धरती के साथ उसी रास्ते पर परिक्रमा कर रहा था। 

earth has a second trojan asteroid will share its orbit for next 4000 years
अंतरिक्ष में मिला पृथ्वी का 'दोस्त' - फोटो : iStock

वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च में साल 2020 में मिले एस्टेरॉयड को 2020 XL5 नाम दिया है जिसे अर्थ ट्रोजन एस्टेरॉयड के नाम से बुलाया जा रहा है, लेकिन यह बहुत छोटा है और धरती की कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। इस शोध को लिखने वाले टोनी संताना रोस का कहना है कि साल 2010 में मिला 2010 TK7 कोई दुर्लभ मामला नहीं है, क्योंकि अर्थ ट्रोजन के तौर पर 2020 XL5 खोज से इस पुष्टि हुई है। 

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