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Lohagarh Fort Bharatpur Cannon Shells Ineffectual British Also Succumbed Know All Interesting Facts in Hindi
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Lohagarh Fort: भारत का एक ऐसा किला, जिस पर तोप के गोले का भी नहीं होता है असर, अंग्रेजों ने भी मान ली थी हार
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Fri, 20 Jun 2025 06:12 PM IST
सार
Lohagarh Fort: भारत में कई किले हैं, जो अपनी खूबसूरती और खासियत के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। एक ऐसा ही किला राजस्थान के भरतपुर में भी स्थित है। इसे 'लौहगढ़ (लोहागढ़) का किला' कहा जाता है।
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भारत का एक ऐसा किला, जिस पर तोप के गोले का भी नहीं होता है असर
- फोटो : Adobe Stock
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Lohagarh Fort: भारत में कई किले हैं, जो अपनी खूबसूरती और खासियत के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। एक ऐसा ही किला राजस्थान के भरतपुर में भी स्थित है। इसे 'लौहगढ़ (लोहागढ़) का किला' कहा जाता है। कहा जाता है कि भारत का यह एकमात्र अजेय दुर्ग है, क्योंकि इसे कभी कोई जीत नहीं सका। यहां तक कि अंग्रेजों ने भी हार मान ली थी।
285 साल पहले यानी 19 फरवरी, 1733 को जाट शासक महाराजा सूरजमल ने इस किले का निर्माण करवाया था। उस समय तोप और बारूद का प्रचलन ज्यादा था, इसलिए इस किले को बनाने में एक विशेष तरह का प्रयोग किया गया था, जिससे कि बारूद के गोले भी किले की दीवार से टकराकर बेअसर हो जाएं।
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भारत का एक ऐसा किला, जिस पर तोप के गोले का भी नहीं होता है असर
- फोटो : Adobe Stock
किले के निर्माण के समय पहले एक चौड़ी और मजबूत पत्थर की ऊंची दीवार बनाई गयी। इन पर तोपों के गोलों का असर नहीं हो, इसके लिए इन दीवारों के चारों तरफ सैकड़ों फुट चौड़ी कच्ची मिट्टी की दीवार बनाई गयी और नीचे गहरी और चौड़ी खाई बना कर उसमें पानी भरा गया। ऐसे में अगर दुश्मन पानी को पार कर भी गया तो सपाट दीवार पर चढ़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।
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भारत का एक ऐसा किला, जिस पर तोप के गोले का भी नहीं होता है असर
- फोटो : Adobe Stock
इस किले पर आक्रमण करना किसी के लिए भी आसान नहीं था, क्योंकि तोप से निकले हुए गोले गारे की दीवार में धंस जाते थे और उनकी आग शांत हो जाती थी। इससे किले को कोई नुकसान पहुंचता ही नहीं था। यही वजह है कि दुश्मन इस किले के अंदर कभी प्रवेश नहीं कर पाये।
भारत का एक ऐसा किला, जिस पर तोप के गोले का भी नहीं होता है असर
- फोटो : Adobe Stock
कहा जाता है कि इस किले पर कब्जा जमाने के लिए अंग्रेजों ने 13 बार आक्रमण किया था। अंग्रेजी सेना ने यहां सैकड़ों तोप के गोले बरसाए थे, लेकिन उन गोलों का किले पर कोई असर नहीं हुआ। वह 13 में से एक बार भी किले को भेद नहीं सके। कहा जाता है कि अंग्रेजों की सेना बार-बार हारने से हताश हो गई तो वहां से चली गई।
भारत का एक ऐसा किला, जिस पर तोप के गोले का भी नहीं होता है असर
- फोटो : Adobe Stock
अंग्रेज इतिहासकार जेम्स टाड के मुताबिक, इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारें ही थीं, जो मिट्टी से बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद इस किले को फतह करना लोहे के चने चबाने से कम नहीं था। इस किले ने हमेशा दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं और अपना लोहा मनवाया है।
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