चटख रंग वाले जहरीले मेंढकों की दुनिया भर में बड़े पैमाने पर तस्करी होती है। लुप्त हो रहे इन मेंढकों को बचाने की एक परियोजना शुरू की गई है। कपड़ों से भरे बैग में वह कोई मामूली घरेलू सामान लग रहा था, मगर बगोटा के एल डोराडो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुलिस इंस्पेक्टरों को बैग के निचले हिस्से में कुछ अजीब लगा। एक्स-रे में दिख रहा था कि कपड़ों के बीच गहरे रंग की कोई चीज रखी है।
आखिर दुनिया के सबसे जहरीले मेंढकों की क्यों होती है तस्करी?
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जहरीले मेंढकों की तस्करी
पुलिस के मुताबिक मेंढक की उन प्रजातियों को कोलंबियाई प्रशांत क्षेत्र के कोको और वैले डेल कोका क्षेत्रों से पकड़ा गया था और जर्मनी ले जाया जा रहा था। 13 अप्रैल 2019 को हुआ यह वाकया कोलंबिया में वन्यजीव तस्करी का नमूना भर है। कोलंबिया में 850 प्रजातियों के उभयचर जीव रहते हैं। मेंढकों की विविधता के मामले में यह दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
पॉइजन डार्ट मेंढक धरती के सबसे जहरीले जीवों में से एक हैं। यूरोप और अमरीका के संग्राहक उनको शौक से रखते हैं। हर मेंढक में इतना जहर होता है कि वह 10 लोगों की जान ले सके। उनकी त्वचा का चटख रंग शिकारियों को आगाह करता है। वही रंग उनको बेशकीमती बनाता है। जर्मनी के हम्बोल्ट इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के मुताबिक कोलंबिया में करीब 200 उभयचर प्रजातियों को लुप्तप्राय या गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनमें ज्यादातर मेंढक हैं।
वैध प्रजनन
कोलंबिया के इन लुप्तप्राय जंगली मेंढकों को बचाने के लिए एक अलग तरह की परियोजना शुरू की गई है- वैध प्रजनन। 2005 में शुरू किया गया टेसोरोस डि कोलंबिया देश का पहला और एकमात्र व्यावसायिक प्रजनन कार्यक्रम है। इसमें तस्करी करके लाए गए मेंढकों की कीमत की तुलना में बहुत कम पैसे में वैध प्रजनन कराया जाता है। टेसोरोस के संस्थापक इवान लोजानो कहते हैं, "किसी प्रजाति को बचाने के लिए आपको व्यावहारिक समाधान की जरूरत होती है।"
लोजानो ने ब्रिटेन के डरेल वन्यजीव संरक्षण ट्रस्ट में पढ़ाई की है। बाद में उन्होंने बगोटा वन्यजीव बचाव केंद्र में काम किया। वह कहते हैं, "मैंने समय के साथ यह सीखा है।" नौकरशाही की लंबी प्रक्रियाओं के बाद टेसोरोस को नवंबर 2011 में मेंढक की एक देसी प्रजाति- पीली धारियों वाले जहरीले मेंढक (Dendrobates truncates) के वैध निर्यात की इजाजत मिली। 2015 तक उन्हें कई और प्रजाति के जहरीले मेढकों, जैसे हरे और काले मेंढक (D. auratus), कोको मेंढक (Phyllobates aurotaenia) और सुनहरे मेंढक (P. terribilis) के निर्यात की इजाजत मिल गई। लोजानो अब जहरीले मेंढकों की सात प्रजातियों का प्रजनन कराते हैं और उनको अमरीका, यूरोप और एशिया में भेजते हैं।
मेंढक कैसे-कैसे
सबसे ज्यादा मांग कोलंबिया के ओफगा मेंढक की है, जो कथित तौर पर अनिषेचित अंडे खाते हैं। इस प्रजाति के मेंढक के बच्चे बिल्कुल अपनी मां की तरह होते हैं। उनको एक-एक करके हाथ से अनिषेचित अंडे खिलाने पड़ते हैं। लोजानो कहते हैं, "यह बहुत मेहनत का काम है, लेकिन यह प्रजाति सबसे अधिक खतरे में है।"
अवैध रूप से पकड़े गए मेंढकों की जगह वैध मेंढक तैयार करने के प्रयासों ने लोजानो को अमरीकी संग्राहकों के बीच मशहूर कर दिया है। लोजानो का शुक्रिया अदा करते हुए वे वैध और पर्यावरण अनुकूल मेंढक खरीद रहे हैं। टेसोरोस में पहले सालाना 30 ओफगा मेंढक तैयार किए जाते थे। अब यह तादाद बढ़कर 150 हो गई है, फिर भी मांग की पूर्ति नहीं हो रही। कोलोराडो में रहने वाले 37 साल के संग्राहक रॉबर्ट जाराड्निक को लगता है कि वैध प्रजनन ने कई संग्राहकों का नजरिया बदल दिया है।
सोशल मीडिया पर संदिग्ध मेंढकों की तस्वीर डालने पर उनकी उत्पत्ति पूछी जाती है। लेकिन टेसोरोस के मेंढक हों तो आप गर्व कर सकते हैं। फिर भी संरक्षण समुदाय के कुछ लोग ऐसी परियोजनाओं को खुले दिल से मंजूर नहीं करते जिनमें लुप्तप्राय प्रजातियों को बाड़े में रखकर प्रजनन कराया जाता है। एशिया के बाघ प्रजनन केंद्रों का एक उदाहरण मौजूद है, जिसमें कीमत घटाने और अवैध रूप से पकड़े गए जानवरों की मांग कम होने की बजाय बंदी नस्ल और जंगल से पकड़े गए, दोनों तरह के बाघों की मांग बढ़ गई।
टेसोरोस के मामले में, आंकड़े जाराड्निक के दावों की तस्दीक करते हैं। हाल के एक अध्ययन के मुताबिक 2014 से 2017 के बीच अमरीका में मंगाए गए अहम प्रजातियों के मेढकों का बड़ा हिस्सा- कुछ मामलो में 100 फीसदी तक- वैध मेंढकों का था। हालांकि, ये आंकड़े सीमित हैं, क्योंकि तस्करी के आंकड़े पक्के नहीं हैं, फिर भी इससे वैध-प्रजनन वाले वन्यजीवों का पक्ष मजबूत होता है।