Myanmar Earthquake: म्यांमार (Earthquake in Myanmar) में 28 मार्च को एक के बाद एक भूकंप के दो तेज झटके महसूस किए गए। शुक्रवार को लगे भूकंप के ये झटके इतने तेज थे कि देश में भारी तबाही मची है। पहला भूकंप सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता 7.7 मापी गई। इसके बाद दूसरा झटका दोपहर 12 बजकर दो मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता 7 मापी गई।
Myanmar Earthquake: जानिए आखिर क्यों बार-बार आते हैं भूकंप? क्या है इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह
Myanmar Earthquake: म्यांमार में आए भूकंप में तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार हजार ज्यादा लोग घायल हैं। अब इस बीच बुधवार को जापान में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता 6.0 रही।
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कहां था भूकंप का केंद्र?
म्यांमार का सागाइंग भूकंप का केंद्र था। भूकंप के झटके इतने तेज थे म्यांमार के मांडलेय में इरावडी नदी पर कथित तौर पर लोकप्रिय एवा ब्रिज गिर गया। दुनिया के अलग-अलग देशों में भूकंप आते रहते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
पृथ्वी के भीतर होती रहती है उथल-पुथल
पृथ्वी जितनी बाहर शात और स्थिर नजर आती है, उतनी ही उसके भीतर हमेशा उथल-पुथल मची रहती है। भूगर्भीय प्लेटें टकराती रहती हैं, जिसकी वजह से हर साल अलग-अलग देशों में भूकंप आते हैं। कई भूविज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक, हमारी पृथ्वी टेक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इसके नीचे तरल पदार्थ (लावा) होता है। यह प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। जब यह प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो ऊर्जा निकलती है, जिसकी वजह से भूकंप आता है।
क्यों मचती है तबाही?
धरती के नीचे स्थित भूगर्भीय प्लेटें बहुत धीमी गति से घूमती रहती हैं। यह हर वर्ष अपने स्थान से 4-5 मिमी तक खिसकती हैं। इस दौरान कुछ प्लेटें एक-दूसरे से दूर हो जाती है। इसके साथ ही कुछ एक के नीचे सरक जाती हैं, जिनके खिसकने और टकराने की प्रक्रिया की वजह से ही भूकंप आता है। जिस स्थान पर धरती के अंदर चट्टानें टूटती या टकराती हैं, वह स्थान भूकंप का केंद्र होता है। इसे हाइपोसेन्टर कहते हैं।
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इस केंद्र से भूकंप की ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती हैं। तरंगों के धरती के सतह तक पहुंचने पर कंपन महसूस होता है। जिस स्थान पर यह यह ऊर्जा सतह को काटती है, उसे एपिसेंटर कहा जाता है। यह स्थान भूकंप के सबसे नजदीक और यहां पर प्रभाव पड़ता है।
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