Mount Kailash Mystery: हिंदू धर्म में भगवान शंकर को सृष्टि का आदि और अंत कहा गया है। शिव दर्शन, कला और विज्ञान के रहस्यों को रचने वाले हैं। वे जितने रहस्यों से लिपटे हुए हैं, उतना ही रहस्यमयी हैं, पृथ्वी पर उनका स्थान कैलाश पर्वत है। पुराणों में कैलाश पर्वत को भगवान शिव शंकर का धाम माना गया है। यूं तो इंटरनेट की तस्वीरों और वीडियो में कैलाश की तस्वीरें आसान दिखाई देती हैं लेकििन शिव का यह लोक आधुनिक विज्ञान के लिए आज भी चुनौती बना हुआ है। यह पृथ्वी की उन दुर्लभ जगहों में से एक है, जहां पर इंसानों के पैरों की छांव तक नहीं पड़ी है।
श्रावण विशेष 2025: दुनिया के लिए आज भी रहस्य है शिव का कैलाश, विज्ञान भी नतमस्तक है भोलेनाथ के आगे
Mount Kailash Mystery: शिव पुराण, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण जैसे हिंदू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि भगवान शिव का कैलाश पर्वत निवास क्षेत्र है। यहां पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते हैं। कैलाश पर्वत जितना पूजनीय है, उतना रहस्यमयी भी है।
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क्यों कोई नहीं चढ़ पाया?
माउंट एवरेस्ट से कैलाश पर्वत की ऊंचाई दो हजार मीटर कम है। माउंट एवरेस्ट की चोटी 8,849 मीटर ऊंची है, जिसे पर हजारों लोग चढ़ चुके हैं, लेकिन 6,638 मीटर ऊंची कैलाश पर्वत की चोटी पर कोई भी नहीं चढ़ पाया है। यह एक ऐसा रहस्य है, जिसका आज खुलासा नहीं हो पाया है। माना जाता है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत के स्वामी हैं। यहां पर भगवान भोलेनाथ माता पार्वती और अपने गणों के साथ निवास करते हैं। कैलाश पर्वत को लेकर कई शोध किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक रहस्य अनसुलझा है।
पृथ्वी का केंद्र बिंदु
पृथ्वी के एक छोर पर उत्तरी और दूसरे छोर पर दक्षिणी ध्रुव स्थित है। इन दोनों ध्रुवों के बीच हिमालय स्थित है, जिसके केंद्र में कैलाश पर्वत स्थित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कैलाश पर्वत पृथ्वी का केंद्र बिंदु है। कैलाश पर्वत का हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म के लोगों के लिए भी विशेष महत्व है। कैलाश पर्वत के आसपास कोई बड़ा पर्वत नहीं है। शोध में वैज्ञानिक भी इस रहस्य को नहीं सुलझा पाए हैं कि ऐसा क्यों है।
कैलाश पर्वत के चारों तरफ अलौकिक ऊर्जा
वैज्ञानिकों का मानना है कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक ऊर्जा है। इसके कारण कोई भी यहां पर पहुंच नहीं सकता है। कई बार वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की है, लेकिन यहां कोई भी आसानी से नहीं पहुंच पाया है। तिब्बत के कई सिद्धि हासिल करने वाले संत कहते हैं कि कैलाश पर्वत पर सिर्फ पुण्य आत्माएं ही निवास कर सकती हैं। कैलाश पर्वत के चारों के ओर अलौकिक शक्तियों का प्रवाह है। इसके कारण सिर्फ सिद्धि प्राप्त करके टैलीपैथी के माध्यम से ही वहां आसपास रहने वाले आध्यात्मिक गुरुओं से संपर्क किया जा सकता है।
स्वास्तिक की आकृति वाले दो सरोवर
कैलाश पर्वत के पास दो रहस्यमयी सरोवर स्थित हैं। यह देखने में स्वास्तिक की तरह लगते हैं। पहले सरोवर का नाम मानसरोवर है, जिसका आकार सूर्य के समान है। मानसरोवर दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झील है। दूसरा सरोवर चंद्रमा की तरह है, जिसका नाम राक्षस झील है। यह खारे पानी की उच्चतम झील है। इन दोनों का सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से संबंध जोड़ा जाता है। इन सरोवरों के रहस्य को वैज्ञानिक आज तक सुलझा पाए हैं। वैज्ञानिक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि यह प्राकृतिक हैं या मानव निर्मित। सबसे बड़ी खासियत यह है कि दक्षिण दिशा की तरफ से देखने पर इन दोनों झीलों के मिलने से स्वास्तिक की आकृति बनती दिखाई देती है।
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