Science News: सौर मंडल में कई ग्रह हैं। इन ग्रहों के पास एक से अधिक चंद्रमा हैं, लेकिन पृथ्वी के पास सिर्फ एक चांद हैं। अब इस बीच वैज्ञानिको ने बड़ी जानकारी दी है। उनका कहना है कि पृथ्वी को जल्द ही एक अस्थायी चंद्रमा मिल सकता है। मतलब यह है कि कुछ समय के लिए पृथ्वी के पास दो चंद्रमा होंगे। यह एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना है। इस घटना से पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण की ताकत दिखेगी। हालांकि, यह आसमान में दिखने वाले चंद्रमा की तरह नहीं होगा, बल्कि यह एक एस्टेरॉयड के रूप में बेहद छोटा होगा। छोटा चांद बनाने वाले एस्टेरॉयड का नाम 2024 PT5 है।
Moon: आसमान में दिखेंगे दो चंद्रमा! धरती को जल्द मिलेगा एक और चांद, अंतरिक्ष में होने जा रही दुर्लभ घटना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह 25 नवंबर 2024 के बाद यह धरती के गुरुत्वाकर्षण से बाहर चलेगा और फिर सूर्य का चक्कर लगाएगा। अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ने इससे संबंधित पेपर प्रकाशित किया है। इसमें शोधकर्ताओं ने निष्कर्षों का विवरण दिया।
जानिए पेपर में क्या लिखा है?
वैज्ञानिकों ने पेपर में लिखा है कि पृथ्वी के निकट की वस्तुएं (नियर अर्थ ऑब्जेक्ट) घोड़े के नाल जैसे पथ का अनुसरण करती हैं। यह ग्रह के करीब और कम सापेक्ष वेग से पहुंचती है, तो मिनी मून जैसी घटना होती है।
इसकी वजह से एस्टेरॉयड की भूकेंद्रित ऊर्जा घंटों, दिनों या महीनों के लिए नकारात्मक हो जाती है। हालांकि, पूरा परिक्रमा किए वगैर वह अपने रास्ते पर निकल जाती हैं। एस्टेरॉयड 2024 PT5 धरती के समान कक्षाओं वाली नियर अर्थ ऑब्जेक्ट का हिस्सा है।
Lunar Eclipse: साल 2025 में लगेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण, आसमान में दिखेगा ब्लड मून, जानिए कब और कहां आएगा नजर
Red Gold: ये है दुनिया का सबसे महंगा मसाला, एक किलो खरीदने के लिए खर्च करने पड़ते हैं लाखों रुपये
Baba Vanga: तीन महीने बाद शुरू हो जाएगा दुनिया का सर्वनाश, बाबा वेंगा की भविष्यवाणी से लोगों में खौफ
आसमान में क्या दिखेगा?
एस्टेरॉयड का अपेक्षाकृत कम वेग और पृथ्वी के लगभग आना गुरुत्वाकर्षण को अस्थायी रूप से इसको रास्ता बदलने की अनुमति देगा, जिससे यह एक लघु चंद्रमा बन जाएगा। इससे पहले भी पृथ्वी के लघु चंद्रमा रहे हैं। 2024PT नग्न आंखों या छोटे टेलीस्कोप से देखने पर बहुत धुंधला दिखेगा। इसकी तीव्रता 22 होगी जो उन्नत ऑब्जर्वेटरी में ही दिखेगा। वैज्ञानिक इसे अध्ययन के लिए सुनहरा मौका मान रहे हैं।