Mysterious Warship: दुनिया में कई रहस्मयी घटनाएं हुई हैं, जो आज भी रहस्य हैं। इस घटनाओं के बारे में वैज्ञानिक भी पता नहीं कर पाए हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही जहाज के बारे में बताने वाले हैं। यह एक विशालकाय जंग जहाज की कहानी है, जो रहस्यमयी तरीक से डूब गया। इस जंगी जहाज का नाम वासा था, जो दुनिया का सबसे हाई-टेक जंगी जहाज था। साल 1628 में स्टॉकहोम की खाड़ी से इसकी शुरुआत हुई थी। यह अपने पहले ही सफर पर डूब गया, जिस पर आज भी रहस्य बरकरार है।
Mysterious Warship: आखिर कैसे अपनी पहली यात्रा पर डूब गया था ये विशालकाय जंगी जहाज? सालों से कायम है रहस्य
Mysterious Warship: दुनिया में कई रहस्मयी घटनाएं हुई हैं, जो आज भी रहस्य हैं। इस घटनाओं के बारे में वैज्ञानिक भी पता नहीं कर पाए हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही जहाज के बारे में बताने वाले हैं। यह एक विशालकाय जंग जहाज की कहानी है, जो रहस्यमयी तरीके से डूब गया।
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सालों पर समुद्र की तलहटी में पड़ा था
तीन सौ सालों तक जंगी जहाज वासा समुद्र की तलहटी में पड़ा हुआ था। इसके बाद पुरातत्वविदों ने उसे बाहर निकाला। उन्होंने इस जहाज को संरक्षित किया और इसे स्कैंडिनेविया के सबसे लोकप्रिय म्यूजियम में बदल दिया है। वासा के तुरंत डूबने की कहानी नौसेना पोत के वास्तुशिल्प इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य है। इसे सबसे बड़ी नाकामियों में भी शामिल किया जाता है।
तूफानी हवाओं की वजह से यह जहाज एक तरफ झुक गया था। बदकिस्मती से तोप की नली के लिए बनाए गए सुराख खुले हुए थे। उन सुराखों से पानी आने लगा जिससे जहाज और झुकने लगा और आखिरकार डूब गया। इस जहाज के पहले सफर को देखने के लिए भीड़ जुटी थी। उनकी आंखों के सामने यह जहाज सागर में समा गया। इस नाकामी को राष्ट्रीय तबाही बताया गया।
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क्या थी डूबने की वजह
जहाज डूबने की जांच की गई, तो पाया गया कि जहाज असंतुलित था, लेकिन ऐसा होने की वजह क्या थी, यह आज भी बहस का मुद्दा है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जहाज की डिजाइन गलत थी। दूसरों का मानना है कि जहाज पर लगी तोपों का वजन उचित तरीके से बंटा हुआ नहीं था। वासा को लकड़ी पर विस्तृत नक्काशी करके सजाया गया था। उसकी नक्काशियां स्वीडन के शाही खानदान की कहानियां बताती थीं।
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300 साल तक समुद्र की तलहटी में रहने के बाद इसे 1956 में खोजा गया। इसे निकालने में पांच साल लगे। 1961 में जब यह जहाज खाड़ी से बाहर आया तो विशेषज्ञों ने देखा कि जहाज की लकड़ियों को कोई नुकसान नहीं हुआ था। लकड़ी पर की गई नक्काशियों भी सुरक्षित थीं। यह जहाज अब स्टॉकहोम का वासा म्यूजियम कहलाता है।
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