{"_id":"5bb9dd5c867a5568542d4072","slug":"do-people-long-live-who-have-more-money","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अधिक पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग, आज जान ही लो इस बात में है कितनी सच्चाई","category":{"title":"Weird Stories","title_hn":"अजब गजब","slug":"weird-stories"}}
अधिक पैसा होने पर ज्यादा जीते हैं लोग, आज जान ही लो इस बात में है कितनी सच्चाई
अमांडा रगेरी बीबीसी फ़्यूचर
Updated Sun, 07 Oct 2018 04:05 PM IST
विज्ञापन
a
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में लोगों की औसत उम्र बड़ी तेजी से बढ़ी है। 1960 के दशक में पैदा होने वाले लोग औसतन 52.5 साल जीते थे। आज ये औसत 72 साल है। ब्रिटेन में काफी पहले से आबादी के जन्म और मौत के रिकॉर्ड रखे जाते रहे हैं। 1841 में पैदा हुई किसी बच्ची के केवल 42 साल की उम्र तक जीने की उम्मीद की जाती थी। वहीं किसी लड़के की औसत उम्र उससे भी कम यानी 40 बरस हुआ करती थी।
aa
मेडिकल सुविधाओं से नहीं बढ़ी उम्र
माना जाने लगा है कि इंसान अपनी उम्र के मामले में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस सोच से कुछ गलतफहमियों को भी बल मिलता है। माना जाता है कि अगर प्राचीन काल के यूनानी या रोमन लोग इंसान को 50-60 साल से ज्यादा बरस तक जीते देखते, तो अचरज में पड़ जाते। हमारा ये सोचना कि मेडिकल सुविधाओं की वजह से इंसान की उम्र बढ़ गई है, गलत है। आज औसत आयु इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इंसान विकास की धारा में बहता हुआ यहां तक आ पहुंचा है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इतिहासकार वॉल्टर शीडेल कहते हैं, "औसत आयु बढ़ने और उम्र बढ़ने में बहुत फर्क है। लोगों की उम्र की बात करें, तो उस में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है।" औसत आयु एक औसत है। अगर किसी के दो बच्चे हैं। उनमें से एक की मौत हो जाती है और दूसरा बच्चा 70 साल तक जीता है, तो औसत उम्र 35 बरस होती है। गणित के लिहाज से ये सही है। ये किसी बच्चे की परवरिश के तौर-तरीके के बारे में भी बताता है। मगर ये पूरी तस्वीर नहीं बताता।
हमें याद रखना होगा कि इंसान के इतिहास के ज़्यादातर हिस्से में नवजातों की मौत की दर बहुत ज्यादा रही है। आज भी कई देशों में बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं। औसत उम्र निकालने से कई बार ऐसे संकेत मिलते हैं कि लोग कम उम्र ही जीते थे। जैसे पुराने जमाने में रोमन या यूनानी साम्राज्य में रहने वालों की औसत उम्र 30-35 बरस बताई गई थी।
माना जाने लगा है कि इंसान अपनी उम्र के मामले में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस सोच से कुछ गलतफहमियों को भी बल मिलता है। माना जाता है कि अगर प्राचीन काल के यूनानी या रोमन लोग इंसान को 50-60 साल से ज्यादा बरस तक जीते देखते, तो अचरज में पड़ जाते। हमारा ये सोचना कि मेडिकल सुविधाओं की वजह से इंसान की उम्र बढ़ गई है, गलत है। आज औसत आयु इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इंसान विकास की धारा में बहता हुआ यहां तक आ पहुंचा है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इतिहासकार वॉल्टर शीडेल कहते हैं, "औसत आयु बढ़ने और उम्र बढ़ने में बहुत फर्क है। लोगों की उम्र की बात करें, तो उस में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है।" औसत आयु एक औसत है। अगर किसी के दो बच्चे हैं। उनमें से एक की मौत हो जाती है और दूसरा बच्चा 70 साल तक जीता है, तो औसत उम्र 35 बरस होती है। गणित के लिहाज से ये सही है। ये किसी बच्चे की परवरिश के तौर-तरीके के बारे में भी बताता है। मगर ये पूरी तस्वीर नहीं बताता।
हमें याद रखना होगा कि इंसान के इतिहास के ज़्यादातर हिस्से में नवजातों की मौत की दर बहुत ज्यादा रही है। आज भी कई देशों में बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं। औसत उम्र निकालने से कई बार ऐसे संकेत मिलते हैं कि लोग कम उम्र ही जीते थे। जैसे पुराने जमाने में रोमन या यूनानी साम्राज्य में रहने वालों की औसत उम्र 30-35 बरस बताई गई थी।
aa
मगर इस बात में कितनी सच्चाई है?
अगर हम बहुत ज्यादा बुढ़ापे की बात करें, तो ईसा से सात सदी पहले के यूनानी कवि हेसियोड ने लिखा था, "आप को 30 साल से बहुत कम उम्र में ब्याह नहीं करना चाहिए।" पुराने रोमन साम्राज्य की ब्यूरोक्रेसी 'करसस होनोरम' जो सबसे छोटा पद था, उस पर कोई 30 साल से कम उम्र का आदमी नहीं बहाल किया जा सकता था। बाद में रोमन सम्राट ऑगस्टस ने ये उम्र घटाकर 25 साल कर दी थी।
खुद ऑगस्टस की मौत 75 बरस की अवस्था में हुई रोमन साम्राज्य का दूत बनने की शर्तों में से एक थी उम्मीदवार का 43 बरस का होना। जबकि आज अमरीकी राष्ट्रपति बनने की न्यूनतम उम्र 35 साल है। रोमन भूगोलविद् प्लिनी ने पहली सदी में लिखी अपनी किताब में ऐसे लोगों की फेहरिस्त बनाई थी, जिन्होंने लंबी उम्र जी। इनमें से एक थे कॉन्सुल वैलेरियस कॉर्विनस थे, जो 100 साल जिए।
सिसेरो की पत्नी टेरेंशिया 103 बरस और क्लोडिया नाम की दूसरी महिला तो 115 साल जीती रही। प्लिनी की किताब में लुकेचिया नाम की अदाकारा का भी जिक्र मिलता है, जिसने 100 साल की उम्र में स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। मिस्र के शहर अल सिकंदरिया में एक कब्र मिलती है, जो ईसा से 3 सदी पहले की एक महिला की। उसके बारे में लिखा है कि 80 साल की उम्र में भी उसके हाथ कांपते नहीं थे। वो शानदार कशीदाकारी करती थी।
अगर हम बहुत ज्यादा बुढ़ापे की बात करें, तो ईसा से सात सदी पहले के यूनानी कवि हेसियोड ने लिखा था, "आप को 30 साल से बहुत कम उम्र में ब्याह नहीं करना चाहिए।" पुराने रोमन साम्राज्य की ब्यूरोक्रेसी 'करसस होनोरम' जो सबसे छोटा पद था, उस पर कोई 30 साल से कम उम्र का आदमी नहीं बहाल किया जा सकता था। बाद में रोमन सम्राट ऑगस्टस ने ये उम्र घटाकर 25 साल कर दी थी।
खुद ऑगस्टस की मौत 75 बरस की अवस्था में हुई रोमन साम्राज्य का दूत बनने की शर्तों में से एक थी उम्मीदवार का 43 बरस का होना। जबकि आज अमरीकी राष्ट्रपति बनने की न्यूनतम उम्र 35 साल है। रोमन भूगोलविद् प्लिनी ने पहली सदी में लिखी अपनी किताब में ऐसे लोगों की फेहरिस्त बनाई थी, जिन्होंने लंबी उम्र जी। इनमें से एक थे कॉन्सुल वैलेरियस कॉर्विनस थे, जो 100 साल जिए।
सिसेरो की पत्नी टेरेंशिया 103 बरस और क्लोडिया नाम की दूसरी महिला तो 115 साल जीती रही। प्लिनी की किताब में लुकेचिया नाम की अदाकारा का भी जिक्र मिलता है, जिसने 100 साल की उम्र में स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। मिस्र के शहर अल सिकंदरिया में एक कब्र मिलती है, जो ईसा से 3 सदी पहले की एक महिला की। उसके बारे में लिखा है कि 80 साल की उम्र में भी उसके हाथ कांपते नहीं थे। वो शानदार कशीदाकारी करती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
aaa
वैसे प्लिनी ने बुढ़ापे को इंसान की जिंदगी का सबसे बुरा वक्त बताया है। प्लिनी ने लिखा है, "इंसान को जो सबसे बड़ी कुदरती नेमत मिली है, वो है कम उम्र में मर जाने की। ज्यादा उम्र तक जीने पर पैर अकड़ जाते हैं। हाथ हिलते नहीं। दिखाई-सुनाई नहीं देता। दांत टूट जाते हैं। पेट कमजोर होने की वजह से खाना नहीं पचता। यानी इंसान के मरने से पहले उसके जिस्म का एक-एक अंग मर चुका होता है।"
प्लिनी की नजर में सिर्फ एक शख्स ऐसा गुजरा था, जो 105 साल की उम्र में भी चपल था। साम्राज्यवाद के दौर की बात करें, तो भी उम्र के ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। 1994 में एक रिसर्च हुई थी। जिसमें ऑक्सफ़ोर्ड क्लासिकल डिक्शनरी में दर्ज ऐतिहासिक लोगों की उम्र की पड़ताल की गई। इनकी तुलना हालिया चैम्बर्स बायोग्राफिकल डिक्शनरी में दर्ज लोगों के नामों से की गई।
प्लिनी की नजर में सिर्फ एक शख्स ऐसा गुजरा था, जो 105 साल की उम्र में भी चपल था। साम्राज्यवाद के दौर की बात करें, तो भी उम्र के ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। 1994 में एक रिसर्च हुई थी। जिसमें ऑक्सफ़ोर्ड क्लासिकल डिक्शनरी में दर्ज ऐतिहासिक लोगों की उम्र की पड़ताल की गई। इनकी तुलना हालिया चैम्बर्स बायोग्राफिकल डिक्शनरी में दर्ज लोगों के नामों से की गई।
विज्ञापन
aa
जब टीबी थी भयंकर बीमारी
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में दर्ज 397 लोगों में से 99 की मौत हिंसा यानी क्त्ल, खुदकुशी या जंग के मैदान में लड़ने की वजह से हुई। ईसा से 100 साल पहले पैदा हुए बाकी के 298 लोगों की औसत उम्र 72 साल आंकी गई। जबकि इसके बाद के दौर में पैदा हुए लोगों की औसत उम्र 66 बरस ही देखी गई। इसकी वजह सीसे से फैलने वाले ज़हरीले केमिकल को माना गया।
जो लोग 1850 से 1949 के बीच जिए, उनकी औसत आयु 71 साल निकाली गई। अब ईसा से एक सदी पहले पैदा हुए लोगों और आधुनिक युग में जीने वालों में कोई खास फर्क तो नहीं है! वैसे इस सैंपल में महिलाएं नहीं थीं। ऐसे लोग थे, जो समाज के क्रीमी लेयर का हिस्सा थे। यानी उनके पास जिंदगी बसर करने के बेहतर साधन थे। शीडेल कहते हैं कि इस रिसर्च को पूरी तरह से नहीं खारिज किया जा सकता है। इटली की ला सैपिएंजा यूनिवर्सिटी की वैलेंटिना गजानिगा कहती हैं कि उस दौर में भी अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई थी।
2016 में वैलेंटिना ने अपनी एक रिसर्च प्रकाशित की थी। इसमें उन्होंने प्राचीन रोमन साम्राज्य के 2000 से ज्यादा कंकालों की पड़ताल की रिपोर्ट जुटाई थी। इन कंकालों की औसत उम्र 30 साल थी। यानी उस दौर के ये लोग उम्र के तीसरे दशक में ही मर गए थे। बहुत से लोग मेहनत-मजदूरी के बोझ से मरे, तो कई बीमारी के शिकार भी हुए। उस दौर में मर्दों को जंग से लेकर मेहनत-मजदूरी तक, अपने शरीर पर तमाम तरह के जुल्म बर्दाश्त करने पड़ते थे, लेकिन, महिलाओं की हालत कोई अच्छी नहीं थी। तब भी महिलाएं खेतों में काम करती थीं। घर के काम तो वो करती ही थीं।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में दर्ज 397 लोगों में से 99 की मौत हिंसा यानी क्त्ल, खुदकुशी या जंग के मैदान में लड़ने की वजह से हुई। ईसा से 100 साल पहले पैदा हुए बाकी के 298 लोगों की औसत उम्र 72 साल आंकी गई। जबकि इसके बाद के दौर में पैदा हुए लोगों की औसत उम्र 66 बरस ही देखी गई। इसकी वजह सीसे से फैलने वाले ज़हरीले केमिकल को माना गया।
जो लोग 1850 से 1949 के बीच जिए, उनकी औसत आयु 71 साल निकाली गई। अब ईसा से एक सदी पहले पैदा हुए लोगों और आधुनिक युग में जीने वालों में कोई खास फर्क तो नहीं है! वैसे इस सैंपल में महिलाएं नहीं थीं। ऐसे लोग थे, जो समाज के क्रीमी लेयर का हिस्सा थे। यानी उनके पास जिंदगी बसर करने के बेहतर साधन थे। शीडेल कहते हैं कि इस रिसर्च को पूरी तरह से नहीं खारिज किया जा सकता है। इटली की ला सैपिएंजा यूनिवर्सिटी की वैलेंटिना गजानिगा कहती हैं कि उस दौर में भी अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई थी।
2016 में वैलेंटिना ने अपनी एक रिसर्च प्रकाशित की थी। इसमें उन्होंने प्राचीन रोमन साम्राज्य के 2000 से ज्यादा कंकालों की पड़ताल की रिपोर्ट जुटाई थी। इन कंकालों की औसत उम्र 30 साल थी। यानी उस दौर के ये लोग उम्र के तीसरे दशक में ही मर गए थे। बहुत से लोग मेहनत-मजदूरी के बोझ से मरे, तो कई बीमारी के शिकार भी हुए। उस दौर में मर्दों को जंग से लेकर मेहनत-मजदूरी तक, अपने शरीर पर तमाम तरह के जुल्म बर्दाश्त करने पड़ते थे, लेकिन, महिलाओं की हालत कोई अच्छी नहीं थी। तब भी महिलाएं खेतों में काम करती थीं। घर के काम तो वो करती ही थीं।