बीस साल तक अमरीकी सेना में रहने के बाद एरिक ग्रैंडन के लिए जिंदगी आसान नहीं थी। आम नागरिक की तरह जीवन गुजारने में उनके सामने कई बाधाएं थीं। सेना में रहते हुए वह छह बार मध्यपूर्व के खाड़ी देशों में गए थे। उन्होंने ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (1991) में भी हिस्सा लिया था।
इस शख्स को है मधुमक्खियों की भिनभिनाहट से प्यार,फिल्मों से भी दिलचस्प है इस पूर्व सैनिक की कहानी
जंग की ख़ौफनाक यादें उनको सताती हैं। डरा देने वाली घटनाओं का फ्लैशबैक उनको परेशान करता है। ग्रैंडन के साथ भी यही हो रहा था। 2011 में वह एक भयानक फ्लैशबैक के शिकार हुए। उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया।
ग्रैंडन खुद से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। उनका चेहरा सूज गया था। दो दिन बाद उनके भाई अस्पताल में मिलने आए तो उन्होंने कहा कि वह एक वाइल्ड बीस्ट (अफ्रीकी जंगलों में मिलने वाला जानवर) की तरह दिख रहे हैं।ग्रैंडन की पत्नी को भी उनको पहचानने में दिक्कत हो रही थी, जबकि वे 25 साल से एक दूसरे से दिल से जुड़े थे।कुछ दिन अस्पताल में रहने के बाद ग्रैंडन को छुट्टी मिल गई।
उन दिनों को याद करके वह बताते हैं, "कोई मेरी मदद नहीं कर सकता था। मुझे अंग्रेजी समझने में भी दिक्कत हो रही थी।" ग्रैंडन को फिजिकल थेरेपिस्ट असिस्टेंट की नौकरी छोड़नी पड़ी। अगले दो साल तक वह घबराहट और अवसाद से जूझ़ते रहे।वह कोई नौकरी नहीं कर पाए। उनके मन में खुदकुशी करने के विचार आते थे।ग्रैंडन कहते है, "हर सुबह मैं उठता था और सोचता था कि आज मैं खुदकुशी कर लूंगा।" उन मुश्किल दिनों में मधुमक्खियों ने ग्रैंडन की मदद की।
2013 में ग्रैंडन के पूर्व साथी और "वेटरन्स एंड वॉरियर्स एग्रीकल्चर प्रोग्राम" के डायरेक्टर जेम्स मैककॉर्मिक की एक सलाह ने उनकी जिंदगी बदल ली।मैककॉर्मिक ने ग्रैंडन को खेती करने की सलाह दी। इस तरीके से खुद मैककॉर्मिक को भी युद्ध-जनित अवसाद से बाहर निकलने में मदद मिली थी। खेती के अलावा एरिक ग्रैंडन को मधुमक्खी पालने की भी सलाह दी गई। ग्रैंडन ने पहले इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन वे इसे टाल नहीं पाए।
वह कहते हैं, "जब मुझे पहली बार मधुमक्खियों के छत्ते मिले तभी जादू हो गया। मैंने महसूस किया कि बाहर की दुनिया मेरे लिए बेमतलब की रह गई। वहां दखल देने वाले कोई विचार नहीं थे। कोई घबराहट नहीं थी। कोई अवसाद नहीं था।"
मधुमक्खियों की भिनभिनाहट ग्रैंडन को पसंद आ गई। उनके अंदर के नकारात्मक विचार बाहर निकल गए।ग्रैंडन जब अमरीकी सेना में थे तो उनकी सैनिक टुकड़ी एक मिशन, एक लक्ष्य के लिए काम करती थी। सैनिकों के बीच कोई बहस नहीं होती थी।सेना से रिटायर होने के बाद वह उस अपनापन को मिस करते थे।मधुमक्खियों में उन्होंने वही जज्बा देखा। वह कहते हैं कि मधुमक्खियां भी अपनी कॉलोनी के लिए आर्मी यूनिट की तरह काम करती हैं।कॉलोनी पर संकट देखकर मधुमक्खियां डंक भी मारती हैं, लेकिन ग्रैंडन के लिए इतना चलता है।
कुछ महीने बाद वेस्ट वर्जीनिया में आई भयंकर बाढ़ ने एरिक ग्रैंडन के जीवन की शांति फिर से भंग कर दी।ग्रैंडन की कॉलोनी में 50 फीट ऊंची बाढ़ आई। उनकी मधुमक्खियों के छत्ते बर्बाद हो गए। बाढ़ का पानी उतरा तो छत्ते की कुछ पेटियां दो मील दूर मिलीं।वह कहते हैं, "वह सब कुछ खो देने जैसा था। मुझे अभी-अभी एक सहारा मिला था, लेकिन एक झटके में वह मुझसे छिन गया।""यह ऐसा था जैसे आपको कोई जीवन रक्षक दवा मिली हो। आप धीरे-धीरे ठीक हो रहे हों और फिर अचानक वह दवा आपसे छीन ली जाए।
"ग्रैंडन के मेंटर और उनके साथी मधुमक्खी पालकों ने एक बार फिर उनकी मदद की। मेंटर ने उनको तीन फोन कॉल किए। उन्होंने ग्रैंडन को 20 नये छत्ते दिए। कैलिफोर्निया से उनके लिए रानी मक्खी भेजी गई और जॉर्जिया के एक फार्म ने उनके सामने 3,60,000 मधुमक्खियां देने का प्रस्ताव रखा।
ग्रैंडन को नई मधुमक्खियों की पेटी मिली तो उनकी खुशियां लौट आईं। वह कहते हैं, "आप कह सकते हैं कि मेरी थेरेपी फिर से शुरू हो गई। मैं बता नहीं सकता कि जब मधुमक्खियों के नये छत्ते मुझे मिले तो मुझे कैसा लगा।""वे लोग मुझे नहीं जानते थे कि मैं कौन हूं, लेकिन उनको लगा होगा कि शायद मैं इस योग्य हूं कि मुझे बचाया जा सके।"
एरिक ग्रैंडन की इस कहानी में एक और मोड़ आया। एक बार जब उनका परिवार छुट्टियां मना रहा था तब उन्हें एक फोन कॉल आया। ग्रैंडन कहते हैं, "सुबह के तीन बज रहे थे। फोन पर फायर मार्शल ने मुझे बताया कि मेरे फार्म हाउस में मेरे हनी हाउस में आग लग लग गई है।"आग और धुएं की वजह से ग्रैंडन की सारी मधुमक्खियां उड़ गईं। वे अपनी कॉलोनी छोड़कर चली गईं।
इस तरह ग्रैंडन की दुनिया फिर से उजड़ गई। वह फिर से अवसाद में जाने लगे।इस बार एक चमत्कार हुआ। कुछ दिनों बाद ग्रैंडन ने छत्तों ने फिर से हलचल महसूस की। उनमें मधुमक्खियां आ रही थीं। उन्होंने कॉलोनी फिर से बसा दी थी और भोजन जुटाने में लग गई थीं।ग्रैंडन कहते हैं कि मधुमक्खियां पालने में हमेशा कुछ ना कुछ नया मिलता है। "हर बार जब आप बक्सा खोलते हैं तो वह पहले से अलग होता है। वहां एक नई शुरुआत मिलती है।"