अमूमन ऐसा देखा जाता है कि लोग सफल होने के बाद उन लोगों से किया वादा भूल जाते हैं। जो असफलता के दौरान उनके साथ थे। सफलता को हासिल करना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल है सफलता के साथ अपने पैरों को जमीन पर टिकाए रखना। मानव व्यवहार में यह बहुत मुश्किल है लेकिन जो ऐसा कर पाता है उसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है।
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पायलट बनकर भी नहीं भूला गांव वालों से किया वादा, जानकर आप भी पीठ थपथपाएंगे
फिचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 10 Oct 2018 06:06 PM IST
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पंजाब के सारंगपुर गांव में रहने वाले विकास जयानी ने ऐसा ही कुछ किया। पहले दिल लगाकर मेहनत की, अपने सपने को साकार किया और फिर जो किया उससे पूरे गांव के बुजुर्गों का दिल बाग-बाग कर दिया।
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पायलट बनने के बाद जयानी जब अपने गांव वापस लौटे तो उन्होंने नई दिल्ली से अमृतसर के बीच अपने गांव के 70 साल से ऊपर के लोगों के लिए हवाई यात्रा का इंतजाम किया। बुजुर्गों ने स्वर्ण मंदिर, वाघा सीमा और जलियांवाला बाग का दौरा किया। इन यात्रियों में 90 साल की बिमला, 80 साल के अमर सिंह, 78 साल के राममूर्ति और कंकारी, 75 साल की गिरादवारी देवी, सुर्जराम और खेमाराम और 72 साल के आत्माराम. जगदीश, सतपाल और इंद्रा शामिल थे।
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हवाई यात्रा से खुश इन बुजुर्गों में कभी सोचा भी नहीं था कि वह कभी विमान में सफर करेंगे। यात्रियों का कहना था कि विकास को पूरा विश्वास था कि एक दिन वह पायलट बनेगा। विकास के पिता महेंद्र जयानी एक बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनका बेटा हमेशा से ही बुजुर्गों की इज्जत करता रहा है और यह उसका सपना था। अपने बेटे पर गर्व करते हुए उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को उनके बेटे के नक्शेकदम पर चलना चाहिए।
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हवाई यात्रा से खुश इन बुजुर्गों में कभी सोचा भी नहीं था कि वह कभी विमान में सफर करेंगे। यात्रियों का कहना था कि विकास को पूरा विश्वास था कि एक दिन वह पायलट बनेगा। विकास के पिता महेंद्र जयानी एक बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनका बेटा हमेशा से ही बुजुर्गों की इज्जत करता रहा है और यह उसका सपना था। अपने बेटे पर गर्व करते हुए उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को उनके बेटे के नक्शेकदम पर चलना चाहिए।