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Budget 2025 Expectations: खपत और वृद्धि दर बढ़ाने के लिए टैक्स में रियायत संभव, रोजगार सृजन पर जोर
Fri, 31 Jan 2025 06:56 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 31 Jan 2025 06:56 AM IST
सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को रिकॉर्ड आठवां बजट पेश करेंगी। मुख्य फोकस खपत व रोजगार बढ़ाने के साथ 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने पर होगा। यह बजट तय करेगा कि दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली जीडीपी किस दिशा में जाएगी। बुनियादी ढांचे पर खर्च जारी रहने की संभावना है। गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी...चारों के लिए भी कई घोषणाएं हो सकती हैं।
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केंद्रीय बजट से उम्मीद।
- फोटो : अमर उजाला
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वैश्विक और घरेलू अनिश्चितताओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी यानी शनिवार को वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगी। आर्थिकी के आंकड़ों के लिहाज इसे नरेंद्र मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल का सबसे कठिन बजट माना जा रहा है। इसकी कई वजहें हैं। महंगाई और खासकर उच्च खाद्य महंगाई ने परिवारों की बचत को प्रभावित किया है। रुपया लगातार टूट रहा है। कंपनियों के नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे। विदेशी निवेशक घरेलू शेयर बाजारों से लगातार पैसे निकाल रहे हैं। खपत की रफ्तार कई तिमाहियों से धीमी पड़ी है, जिसकी वजह से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटकर करीब दो साल के निचले स्तर पर 5.4 फीसदी पर आ गई। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूप में देश के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है, जिसने आयात पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।
Tax टैक्स new
- फोटो : istock
आयकर: 30 फीसदी स्लैब का बढ़ सकता है दायरा
नई कर व्यवस्था मोदी सरकार के दिल के करीब है। खपत बढ़ाने के लिए इस व्यवस्था को लुभावना बनाया जा सकता है। इसके लिए सरकार टैक्स स्लैब में संशोधन कर सकती है। बेसिक एग्जंप्शन लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक किया जा सकता है। इससे 75,000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन और 87ए के तहत 25,000 रुपये तक की छूट के साथ सालाना 10 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त हो सकती है। अभी 7.50 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है।
पुरानी कर व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने की तैयारी में सरकार; फिर जुड़ सकता है 25% का स्लैब
कर विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार नई कर व्यवस्था में 25 फीसदी के टैक्स स्लैब को फिर से शामिल कर सकती है, जिसे पिछले साल हटा दिया गया था। इसमें 15 लाख से 20 लाख रुपये तक की कमाई को शामिल किया जा सकता है। इससे करदाताओं की खर्च योग्य आय बढ़ेगी।
राजकोषीय लागत पर ज्यादा असर नहीं
बार्कलेज की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) आस्था गुडवानी का कहना है कि निजी उपभोग को समर्थन देने के प्रयास में वित्त मंत्री को कर स्लैब में बदलाव कर व्यक्तिगत आयकर दर में असरदार कटौती करने जैसे उपाय करने चाहिए। इससे टैक्स संग्रह में तेजी आएगी, जिससे राजस्व में आई कमी की भरपाई हो जाएगी। राजकोषीय लागत ज्यादा बढ़ने की आशंका भी नहीं है।
नई कर व्यवस्था मोदी सरकार के दिल के करीब है। खपत बढ़ाने के लिए इस व्यवस्था को लुभावना बनाया जा सकता है। इसके लिए सरकार टैक्स स्लैब में संशोधन कर सकती है। बेसिक एग्जंप्शन लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक किया जा सकता है। इससे 75,000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन और 87ए के तहत 25,000 रुपये तक की छूट के साथ सालाना 10 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त हो सकती है। अभी 7.50 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है।
- 5.27 करोड़ करदाताओं ने नई कर व्यवस्था का चुना है विकल्प
- 75,000 रुपये किया गया है स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर बीते बजट में
पुरानी कर व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने की तैयारी में सरकार; फिर जुड़ सकता है 25% का स्लैब
कर विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार नई कर व्यवस्था में 25 फीसदी के टैक्स स्लैब को फिर से शामिल कर सकती है, जिसे पिछले साल हटा दिया गया था। इसमें 15 लाख से 20 लाख रुपये तक की कमाई को शामिल किया जा सकता है। इससे करदाताओं की खर्च योग्य आय बढ़ेगी।
राजकोषीय लागत पर ज्यादा असर नहीं
बार्कलेज की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) आस्था गुडवानी का कहना है कि निजी उपभोग को समर्थन देने के प्रयास में वित्त मंत्री को कर स्लैब में बदलाव कर व्यक्तिगत आयकर दर में असरदार कटौती करने जैसे उपाय करने चाहिए। इससे टैक्स संग्रह में तेजी आएगी, जिससे राजस्व में आई कमी की भरपाई हो जाएगी। राजकोषीय लागत ज्यादा बढ़ने की आशंका भी नहीं है।
बजट से महिलाओं को उम्मीदें (प्रतीकात्मक)
- फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
महिला : पूंजी खर्च के जरिये लाभ देने की कोशिश
बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने और कौशल, कल्याण उपायों व वित्तीय माध्यम से महिलाओं, किसानों और वंचितों पर जोर देने पर सरकार ध्यान जारी रखेगी। सड़क, जल आपूर्ति प्रणाली और सामाजिक कल्याण पहल जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शामिल करने के लिए प्रमुख फोकस क्षेत्रों के साथ पूंजीगत खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि से विकास को प्राथमिकता देने की उम्मीद है। इससे महिला और युवाओं को सबसे अधिक फायदा होगा।
मिशन शक्ति, मातृ वंदना योजना और जननी सुरक्षा योजना जैसी महिला केंद्रित योजनाओं के लिए रकम बढ़ाई जा सकती है। सुरक्षा, शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य लाभ के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लक्ष्य वाले इन कार्यक्रमों को ज्यादा बजट मिल सकता है। पिछले बजट में इन योजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दी गई थी।
बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने और कौशल, कल्याण उपायों व वित्तीय माध्यम से महिलाओं, किसानों और वंचितों पर जोर देने पर सरकार ध्यान जारी रखेगी। सड़क, जल आपूर्ति प्रणाली और सामाजिक कल्याण पहल जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शामिल करने के लिए प्रमुख फोकस क्षेत्रों के साथ पूंजीगत खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि से विकास को प्राथमिकता देने की उम्मीद है। इससे महिला और युवाओं को सबसे अधिक फायदा होगा।
मिशन शक्ति, मातृ वंदना योजना और जननी सुरक्षा योजना जैसी महिला केंद्रित योजनाओं के लिए रकम बढ़ाई जा सकती है। सुरक्षा, शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य लाभ के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लक्ष्य वाले इन कार्यक्रमों को ज्यादा बजट मिल सकता है। पिछले बजट में इन योजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दी गई थी।
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पर्यटन क्षेत्र में बजट से उम्मीदें (प्रतीकात्मक)
- फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
हॉस्पिटैलिटी: पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निवेश जरूरी
देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बेहतर करना होगा। कर दरों को युक्तिसंगत बनाने के साथ आसान वीजा प्रक्रिया और निवेश को बढ़ावा देने की भी जरूरत है। होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएआई) के अध्यक्ष केबी काचरू ने कहा, वैश्विक स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बजट में जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में जरूरी घोषणाएं हो सकती हैं।
एचएआई के अध्यक्ष ने कहा, निवेश अकेले सरकार नहीं कर सकती है। निजी क्षेत्र को भी आगे आना होगा। राज्य सरकारों को अधिक प्रोत्साहन देने पर विचार करना चाहिए। जापान, दक्षिण कोरिया और थाइलैंड जैसे देश पर्यटन क्षेत्र को महत्व देकर अपनी जीडीपी को बढ़ाने में सक्षम हैं।
देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बेहतर करना होगा। कर दरों को युक्तिसंगत बनाने के साथ आसान वीजा प्रक्रिया और निवेश को बढ़ावा देने की भी जरूरत है। होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएआई) के अध्यक्ष केबी काचरू ने कहा, वैश्विक स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बजट में जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में जरूरी घोषणाएं हो सकती हैं।
एचएआई के अध्यक्ष ने कहा, निवेश अकेले सरकार नहीं कर सकती है। निजी क्षेत्र को भी आगे आना होगा। राज्य सरकारों को अधिक प्रोत्साहन देने पर विचार करना चाहिए। जापान, दक्षिण कोरिया और थाइलैंड जैसे देश पर्यटन क्षेत्र को महत्व देकर अपनी जीडीपी को बढ़ाने में सक्षम हैं।
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युवाओं के कौशल विकास पर बजट में हो सकते हैं खास प्रावधान
- फोटो : अमर उजाला
युवा-शिक्षा : कौशल विकास के जरिये रोजगार देने का प्रयास
विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने, मेक इन इंडिया को और मजबूत बनाने एवं युवाओं को उद्योग की जरूरतों के लिहाज से तैयार करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में नवाचार पर ध्यान देना होगा। कौशल विकास पर जोर भी महत्वपूर्ण है, ताकि हम दुनिया की जरूरतों के हिसाब से श्रमबल तैयार कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है, देश में बड़ी संख्या में नौकरियां उपलब्ध हैं। लेकिन, युवाओं में कौशल की कमी के कारण कंपनियां नियुक्तियों में सावधानी बरत रही हैं। यह चीन का विकल्प बनने की राह में भी बड़ा रोड़ा है।
टाटा टेक्नोलॉजीज के सीईओ एवं एमडी वारेन हैरिस का कहना है कि युवाओं को उद्योग की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने के लिए कौशल विकास पर आवंटन बढ़ाने की जरूरत है। इससे तैयार कार्यबल का निर्माण हो सकेगा, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेंट ऑफ थिंग्स और साइबर सुरक्षा जैसी उन्नत तकनीकी में उत्कृष्टता पाने में सक्षम हो।
विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने, मेक इन इंडिया को और मजबूत बनाने एवं युवाओं को उद्योग की जरूरतों के लिहाज से तैयार करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में नवाचार पर ध्यान देना होगा। कौशल विकास पर जोर भी महत्वपूर्ण है, ताकि हम दुनिया की जरूरतों के हिसाब से श्रमबल तैयार कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है, देश में बड़ी संख्या में नौकरियां उपलब्ध हैं। लेकिन, युवाओं में कौशल की कमी के कारण कंपनियां नियुक्तियों में सावधानी बरत रही हैं। यह चीन का विकल्प बनने की राह में भी बड़ा रोड़ा है।
टाटा टेक्नोलॉजीज के सीईओ एवं एमडी वारेन हैरिस का कहना है कि युवाओं को उद्योग की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने के लिए कौशल विकास पर आवंटन बढ़ाने की जरूरत है। इससे तैयार कार्यबल का निर्माण हो सकेगा, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेंट ऑफ थिंग्स और साइबर सुरक्षा जैसी उन्नत तकनीकी में उत्कृष्टता पाने में सक्षम हो।