सुरक्षित निवेश के रूप में पब्लिक प्रोविडंट फंड (पीपीएफ) सबसे लोकप्रिय साधन माना जाता है। एक तो यहां किए गए निवेश पर सरकार की ओर से तय रिटर्न मिलता है, तो दूसरी ओर टैक्स छूट का भी प्रावधान है। इस दोहरे लाभ के बावजूद पीपीएफ की कुछ बंदिशें भी हैं। इसमें साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही निवेश कर सकते हैं।
PPF खाते का लाभ उठाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, वरना हो सकता है नुकसान
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सालाना 1.5 लाख से ज्यादा के निवेश पर नहीं मिलेगा ब्याज
कर विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई निवेशक अपने पीपीएफ खाते किसी वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा की रकम निवेश करता है तो यह स्वीकार ही नहीं किया जाएगा। इस सीमा से ज्यादा की राशि निवेश कर भी दी गई तो उस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। अभी पीपीएफ पर सालाना ब्याज 7.90 फीसदी है। इसमें निवेश किए गए पूरे 1.5 लाख रुपये पर आयकर की धारा 80सी के तहत कर छूट भी दी जाती है।
एक से ज्यादा खाते पर भी समान नियम
अगर किसी करदाता ने अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर भी खाता खोला है, तो भी अधिकतम निवेश की सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा। पीपीएफ रूल नंबर 3 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति खुद या अपने अधीन किसी नाबालिग की ओर से पीपीएफ खाता खुलवा सकता है। इसमें किसी वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये और ज्यादा से ज्यादा डेढ़ लाख रुपये का अंशदान कर सकते हैं। दो अलग-अलग खाते होने पर भी अधिकतम निवेश की सीमा में इजाफा नहीं हो सकता है।
टैक्स छूट का तिहरा लाभ
आयकर अधिनियम के तहत पीपीएफ पर टैक्स छूट का तिहरा लाभ मिलता है। इस योजना में निवेश कर किसी भी वित्त वर्ष में आयकर की धारा 80सी के जरिये डेढ़ लाख रुपये की कर छूट ली जा सकती है, जो आपकी टैक्स देनदारी का बोझ कम कर देगा। इसके अलावा पीपीएफ में निवेश पर मिलने वाला ब्याज भी करमुक्त रहता है। तीसरा लाभ, परिपक्वता अवधि के बाद निकाली गई रकम पर मिलता है। यह भी करमुक्त होती है।
नहीं जमा की न्यूनतम राशि तो लगेगा जुर्माना
पीपीएफ खाते में सालाना कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी होता है। अगर कोई निवेश यह राशि जमा करने में नाकाम रहता है, तो उस पर हर वित्त वर्ष में 50 रुपये का जुर्माना लगेगा। निवेशक के पास जितने भी खाते हैं, सभी पर यही नियम लागू होगा। पीपीएफ खाते की रकम पर पूरे महीने ब्याज पाने के लिए आपको हर महीने की 5 तारीख से पहले रकम जमा करनी चाहिए। दरअसल, इस पर ब्याज हर महीने खाते में जमा सबसे कम रकम के आधार पर मिलता है। यह रकम हर माह की पांच तारीख से लेकर महीने के अंत में जो भी सबसे कम रहेगी, उसी आधार पर जोड़ी जाएगी।