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पेट में पल रहा है बच्चा और उसे जन्म नहीं देना चाहती ये मां, इस वजह से हुआ है ऐसा...
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा)
Updated Mon, 19 Mar 2018 10:03 AM IST
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लड़की के पेट में बच्चा पल रहा है, लेकिन वह उसे जन्म नहीं देना चाहती। मामला कोर्ट तक पहुंच गया है, जानिए आखिर क्यों चाहती है वो ऐसा।
Pregnant
मामला हरियाणा के अंबाला शहर का है। 19 साल की लड़की ने गर्भपात कराने के लिए कोर्ट में याचिका दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया है। सीएमओ की रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने यह निर्णय लिया है। मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया है कि भ्रूण 28 हफ्ते का हो चुका है। दूसरी ओर युवती का कहना है कि यदि उसका गर्भपात नहीं होता तो वह किसी नि:संतान दंपति को यह बच्चा दे सकती है। क्योंकि युवती ने बच्चा पालने में असमर्थता जताई है।
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12 सप्ताह से अधिक प्रेग्नेंसी होने पर नहीं हो सकता गर्भपात
एडवोकेट पुष्कर शर्मा ने बताया कि मेडिकल टर्मिनेशन प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 कहता है कि किसी भी स्पेशल केस में अगर प्रेग्नेंसी 12 सप्ताह या उससे कम की है तो उसे गिराया जा सकता है। अगर गर्भवती इससे ऊपर का गर्भधारण कर चुकी है तो उसे गिराया नहीं जा सकता। युवती जरूरतमंद परिवार से है इसलिए उसने बच्चा पालने में असमर्थता जताई है। युवती चाहती है कि कोई ऐसा परिवार उसका बच्चा गोद ले ले जिसके पास बच्चा न हो।
एडवोकेट पुष्कर शर्मा ने बताया कि मेडिकल टर्मिनेशन प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 कहता है कि किसी भी स्पेशल केस में अगर प्रेग्नेंसी 12 सप्ताह या उससे कम की है तो उसे गिराया जा सकता है। अगर गर्भवती इससे ऊपर का गर्भधारण कर चुकी है तो उसे गिराया नहीं जा सकता। युवती जरूरतमंद परिवार से है इसलिए उसने बच्चा पालने में असमर्थता जताई है। युवती चाहती है कि कोई ऐसा परिवार उसका बच्चा गोद ले ले जिसके पास बच्चा न हो।
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जानकारी के मुताबिक, युवती चंडीगढ़ के एक रेस्त्रां में नौकरी करती थी। वहीं पर अंबाला के ही एक युवक से उसकी दोस्ती हुई। अब उसने कहीं और शादी कर ली है। युवती का परिवार आर्थिक तौर पर कमजोर है। युवक द्वारा इंकार करने के बाद युवती ने गर्भपात कराने में कानूनी सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में अर्जी दाखिल दी थी। जहां से कानूनी मदद के लिए उसकी अर्जी को एडवोकेट पुष्कर शर्मा के पास भेजा गया।
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उन्होंने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास मानविका यादव की स्पेशल कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने सीएमओ को अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को पेश करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने यह राय मांगी थी कि क्या इन परिस्थितियों में युवती का गर्भपात किया जा सकता है या नहीं। युवती का वीरवार को सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के बोर्ड ने मेडिकल किया, इसकी रिपोर्ट सीएमओ ने शुक्रवार को कोर्ट में सौंपी जिसके बाद कोर्ट ने निर्णय दिया।