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84 के शहीदों की शहादत को दरबार साहिब में बनाया जाएगा यादगार, जानिए कैसे?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 16 Jun 2017 12:55 PM IST
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darbar sahib
1984 में दरबार साहिब में हुए फौजी हमले के शहीदों की शहादत को यादगार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। जानिए आखिर किस तरह किया जाएगा ये काम।
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एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी की बैठक में कई प्रस्ताव पारित
दरअसल, श्री दरबार साहिब की गैलरी मेंहमले में मारे गए लोगों के फोटो लगाने का भी फैसला लिया गया है। एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी की बैठक में एसजीपीसी ने दमदमी टकसाल के प्रमुख बाबा हरनाम सिंह की उस मांग को भी मंजूरी दे दी, जिसमें उन्होंने जून, 1984 में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब पर हुए फौजी हमले के शहीदों की तस्वीरें दरबार साहिब की यादगार गैलरी में लगाने की मांग की थी।
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एसजीपीसी के नए प्रधान किरपाल सिंह बडूंगर की प्रेस कांफ्रेंस
प्रो. बंडूगर ने कहा कि एसजीपीसी कानून के तहत चुनी गई सिखों की सर्वोच्च संस्था है, जिसके पास गुरुद्वारों की संभाल व उनकी संपत्तियों की संभाल का जिम्मा है। कमेटी ने गुरु शब्द रत्नाकर महान कोष के हिंदी और अंग्रेजी में दोबारा कराने का फैसला भी लिया है। इसके अलावा 1994 में पीलीभीत जेलकांड में मारे गए सिखों के परिजनों को 1-1 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का फैसला लिया गया है।
एसजीपीसी के नए प्रधान किरपाल सिंह बड़ूंगर
साथ ही, हरियाणा में हौंद चिल्हड़ गांव में सिख कत्लेआम के मामले को सार्वजनिक करने वाले मनविंदर सिंह ग्यासपुरा के बच्चों की वर्ष 2017-18 की फीस एसजीपीसी द्वारा अदा किए जाने का फैसला लिया गया है। वीरवार को चंडीगढ़ में हुई एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी की बैठक में कई अन्य मुद्दों पर भी प्रस्ताव पारित किए गए।
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एसजीपीसी के अध्यक्ष प्रो. किरपाल सिंह बडूगर
- फोटो : अमर उजाला
एसजीपीसी ने विधानसभा में पूर्व डीजीपी केपीएस गिल को श्रद्धांजलि दिए जाने के खिलाफ शिअद के रवैये की सराहना की है। प्रो. बंडूगर ने कहा कि केपीएस गिल के कार्यकाल में बेगुनाह सिख नौजवानों का कत्लेआम हुआ। ऐसे व्यक्ति को विधानसभा में श्रद्धांजलि देने के खिलाफ शिअद का रवैया बिल्कुल सही है और एसजीपीसी इस मुद्दे पर शिअद के साथ है।