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मुफलिसी में मेडलिस्ट : आज ऑटो चलाने को मजबूर ये मुक्केबाज, आपबीती पर बोले- समाज का ये बर्ताव दर्द देने वाला

Sun, 18 Apr 2021 08:04 AM IST
ajay kumar संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 18 Apr 2021 08:04 AM IST
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A former national boxer and NIS qualified coach Abid Khan drivers auto in Chandigarh
आबिद खान। - फोटो : ANI

जिस मुक्केबाजी के जुनून में दिन रात एक कर पसीना बहाया और देश के लिए पदक जीते। वह मुक्केबाजी जब दो वक्त की रोटी न दे सकी तो आबिद खान ने ऑटो थाम लिया। यह सच्चाई है राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज की, जो आज मुफलिसी में जी रहा है। मायूसी ऐसी कि किसी के सामने अपनी पहचान तक उजागर करने से बचता है। 61 वर्ष के आबिद खान चंडीगढ़ स्थित धनास की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में रहते हैं। वह पटियाला स्थित एनआईएस से मुक्केबाजी के डिप्लोमाधारक हैं। आबिद ने बताया कि उन्होंने बीए की पढ़ाई सेक्टर-32 स्थित एसडी कॉलेज से की। इस दौरान वहां खेल इंचार्ज सीके चैरर्थ ने पढ़ाई के साथ मुक्केबाजी में हाथ आजमाने को कहा। मेरे कोच बलकार सिंह ने मुझे कड़ी ट्रेनिंग दी। इसके बाद मैं कॉलेज स्तर की मुक्केबाजी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए मेडल बटोरने लगा। वर्ष 1982 में दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाजी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। 



A former national boxer and NIS qualified coach Abid Khan drivers auto in Chandigarh
आबिद खान

इसके बाद वर्ष 1988 में एनआईएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स) से मुक्केबाजी कोच का डिप्लोमा भी किया। कोच का डिप्लोमा करने के बाद जब रिक्तियां निकलीं तो उसमें जनरल के बजाय दूसरे कोटे में नौकरी निकल आई। नौकरी नहीं मिल पाने के कारण दुखी रहने लगा। परिवार का खर्चा चलाने के लिए मैंने मुक्केबाजी से किनारा कर लिया। वर्ष 1990 में पश्चिमी एशिया चला गया। वहां बिल्डिंग बनाने वालों के पास मजदूरी करने लगा। चार साल बाद वापस भारत आ गया। दो बेटे हैं। बड़ा बेटा सोहेल 12वीं पास कर हाल ही में प्राइवेट लैब में काम रहा है। वहीं छोटा बेटा 9वीं कक्षा का छात्र है।

A former national boxer and NIS qualified coach Abid Khan drivers auto in Chandigarh
पूर्व मुक्केबाज आबिद खान। - फोटो : ANI

ऑटो से लोगों के घरों में पहुंचाता हूं सामान 
आबिद 20 साल से ऑटो चला रहे हैं। वह सेक्टर 26 और अन्य जगहों से सामान ऑटो में लादकर लोगों के घरों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया, जब कहीं नौकरी नहीं मिली तो बच्चों के पेट पालने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही था। इसलिए ऑटो चला रहा हूं। आबिद ने बताया कि कुछ दिन पहले ही मेरी कहानी यूट्यूब पर दिखाई गई। इसके बाद कई लोग मदद के लिए आगे आए। ओलंपिक मेडलिस्ट विजेंद्र कुमार, मनोज कुमार, अभिनेता फरहान अख्तर ने भरोसा दिया कि आपको किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो तो वह करेंगे। वहीं आबिद के पुराने दोस्त और उनके जूनियर भी अब उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं कि आप दोबारा कोचिंग शुरू करें। 

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A former national boxer and NIS qualified coach Abid Khan drivers auto in Chandigarh
आबिद खान। - फोटो : ANI

आबिद ने बताया, परिवार की अनुमति से इलाके के ही कुछ बच्चों को सुबह इकट्ठा कर मुफ्त में मुक्केबाजी सिखानी शुरू की है। सुबह बच्चों को कोचिंग दूंगा और बाकी समय ऑटो चलाऊंगा, जब तक कि कोई स्थायी नौकरी नहीं मिल जाती। यदि मुझे मौका मिले तो फिर से मुक्केबाजी की कोचिंग शुरू करना चाहूंगा। यदि कोई संस्था चाहे तो इसमें मदद कर सकती है। 

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A former national boxer and NIS qualified coach Abid Khan drivers auto in Chandigarh
आबिद खान। - फोटो : ANI

अपने ऊपर बीते हुए दिनों को याद कर आबिद भावुक हो जाते हैं। कहते हैं, मैंने जो झेला है, नहीं चाहता मेरे बच्चे भी वह झेलें। इसलिए मैंने अपने बच्चों को खेल से दूर रखा। जितना समय मैंने खेल को दिया, यदि किसी तकनीकी शिक्षा में लगाया होता तो आज अच्छी स्थिति में होता। एक खिलाड़ी के साथ समाज का ऐसा बर्ताव दर्द देने वाला है। 

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