पंजाब में अपने दम पर कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह नई कांग्रेस में खप नहीं पा रहे हैं। कैप्टन के तेवर शुरू से ही तीखे रहे हैं, यही कारण है कि राहुल और प्रियंका के फॉर्मेट में वह सेट नहीं बैठ रहे हैं। विधायक दल की बैठक के बारे में जब कैप्टन को जानकारी मिली तो उन्होंने सुबह 10 बजे सोनिया गांधी से बातचीत की। कारण जो भी रहे हों, सोनिया ने उनसे सॉरी कहा। जिसके बाद कैप्टन ने कहा कि मैडम कोई बात नहीं मैं इस्तीफा दे रहा हूं। कैप्टन के इस फैसले के साथ ही कैप्टन का सीएमओ हरकत में आ गया और उनके इस्तीफे की तैयारी की जाने लगी। इस्तीफे का प्रारूप मंथन के बाद सुबह ही तय हो गया था। उन्होंने एक लाइन का इस्तीफा देने का मन बनाया और अपने इस इस्तीफे से अपने करीबियों को अवगत करा दिया।
इस वजह से सोनिया गांधी ने कहा- सॉरी अमरिंदर, जवाब में कैप्टन बोले- मैं अपना इस्तीफा दे रहा हूं
कैप्टन की तय रणनीति का हिस्सा था कि वह अपना इस्तीफा हाथ में लेकर पंजाब राज भवन पहुंचें और राज भवन के अंदर जाते ही 10 मिनट के भीतर उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। उनके इस्तीफा सौंपते ही उनके पुत्र रणइंदर का ट्वीट आ गया। जिसमें उन्होंने अपने पिता के इस फैसले को सुप्रीम बताया।
कैप्टन के तेवरों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वह राजभवन से निकलने के बाद चाहते तो प्रेस कान्फ्रेंस के लिए पंजाब भवन जा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने सड़क पर खड़े होकर राजभवन के सामने प्रेस कान्फ्रेंस की और अपने सिसवां फार्म हाउस के लिए रवाना हो गए। विधायक दल की बैठक में यह इंतजार किया जा रहा था कि शायद कैप्टन राजभवन से इधर आएं, लेकिन कैप्टन का काफिला अपने परिवार को साथ लेकर राजभवन से कूच कर गया।
शपथ ग्रहण में भी रहे थे तल्ख तेवर
2017 में पंजाब के मुख्यमंत्री की शपथ के दौरान ही कैप्टन के तेवर कांग्रेस आलाकमान को पता चल गए थे। शपथ ग्रहण में राहुल गांधी आए तो थे लेकिन पूरे मन के साथ नहीं। कैप्टन ने भी परवाह किए बिना शपथ ग्रहण समारोह पूरा किया और राहुल को उनकी कार तक छोड़कर अलविदा कह दिया। राहुल और प्रियंका कांग्रेस की नई टीम के सिपाही हैं, जबकि कैप्टन अमरिंदर राजीव गांधी के दोस्त रहे हैं और वही उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। इसलिए कैप्टन ने आज सोनिया से बात करना उचित समझा और बात की, लेकिन सोनिया की बातचीत के साथ ही मौके की नजाकत समझ में आ गई और उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया।
सभी को इस्तीफे ने चौंकाया
कल हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों से जाहिर नहीं हो रहा था कि आज पंजाब की सियासत में भूचाल आ जाएगा। बैठक के फैसलों को देखकर लग रहा था कि कांग्रेस चुनावी मोड में आ चुकी है लेकिन अचानक हुए घटनाक्रम से पंजाब की जनता भौचक्की है। कैप्टन खुद भी कई बार कह चुके हैं कि 2022 का चुनाव उनके ही नेतृत्व में होगा। अब देखना है कि 2022 में पंजाब के चुनाव की क्या तस्वीर रहेगी।