चंडीगढ़ प्रशासन ने सोमवार को अलग-अलग विभागों की 86 सेवाओं को ऑनलाइन करने के लिए सेक्टर-10 स्थित एक होटल में कार्यक्रम रखा। प्रशासक बनवारी लाल, उनके सलाहकार धर्मपाल और अन्य अफसर आमंत्रित किए गए लेकिन सांसद किरण खेर को आमंत्रण पत्र ही नहीं भेजा गया। सांसद ने इस पर नाराजगी जताई तो अधिकारियों ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया। कार्यक्रम में पहुंचीं सांसद किरण खेर का दर्द छलक पड़ा। कहा कि जब से इलाज के लिए चंडीगढ़ से गई हूं, अधिकारी तो मुझे भूल ही गए हैं। ऐसा मत कीजिए, दुख होता है। अब मैं वापस आ गई हूं, आपसे लगातार मिलती रहूंगी ताकि आप मुझे भूलें नहीं। यह पहला मौका नहीं है, जब किसी जनप्रतिनिधि ने अफसरशाही पर अंगुली उठाई है। अभी कुछ दिन पहले ही नगर निगम सदन की बैठक में पार्षद कनवरजीत राणा सहित सभी पार्षदों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था।
छलका दर्द: ऐसा क्या हुआ जो किरण खेर बोलीं- इलाज कराने क्या गई, अधिकारी भूल ही गए, ऐसा मत कीजिए, दुख होता है
सांसद किरण खेर भी जब चंडीगढ़ पहुंचीं थीं तो सेक्टर-33 स्थित कार्यालय में भाजपा पार्षदों ने उन्हें बताया था कि अफसर उनकी नहीं सुनते। निगम में एक बार सुनवाई हो भी जाए लेकिन प्रशासन से तो उनके सवालों के जबाव तक नहीं मिलता। अब सोमवार को प्रशासनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सांसद को आमंत्रण पत्र ही नहीं भेजा गया। सांसद की नाराजगी के बाद अधिकारियों ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित तो कर दिया लेकिन जब वह पहुंचीं उन्हें रिसीव करने भी कोई नहीं आया। सांसद ने अंदर पहुंचते ही प्रशासक के सलाहकार और डीसी के सामने नाराजगी जताई। कहा कि जनप्रतिनिधि को रिसीव करने तक कोई बाहर नहीं मौजूद नहीं था।
कार्यक्रम के बाद जैसे ही सभी जाने लगे तो प्रशासक के बाद सलाहकार की गाड़ी लगा दी गई। प्रोटोकॉल के अनुसार, सांसद की गाड़ी वहां लगनी चाहिए थी, किरण खेर ने मजाक में ही कटाक्ष करते हुए सलाहकार से कहा कि लगता है अब सिस्टम बदल गया है। सांसद ने प्रशासक के सामने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सलाहकार से कई बार कहा गया है कि सभी अधिकारियों के साथ मेरी बैठक बुलाएं लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है।
बीते शनिवार को भी तमिल संगम कार्यक्रम में पहुंचीं सांसद ने मंच से कहा था कि प्रशासन लोगों की सुविधा के लिए होता है न कि परेशान करने के लिए इसलिए मनमाने तरीके से लोगों के मकानों को नहीं तोड़ने दिया जाएगा। सोमवार को मंच में यूटी प्रशासक व पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, उनके सलाहकार धर्मपाल, गृह सचिव नितिन यादव, वित्त सचिव विजय नामदेव राव जेड़े, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन यशपाल गर्ग और डीसी विनय प्रताप सिंह मौजूद थे। सांसद ने मंच से यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ठीक नहीं है।
‘राशनकार्ड के लिए भी हो ऑनलाइन व्यवस्था’
सांसद ने कहा कि प्रशासन ने अपनी ज्यादातर सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है। यह एक सपना पूरा होने जैसा है जिसमें सभी सेवाओं को पारदर्शिता के साथ सीधे लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा। मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली में मेरी और चंडीगढ़ के प्रयासों की सराहना की। मेरा एक अनुरोध है कि राशनकार्ड के लिए भी ऐसी कोई व्यवस्था की जाए। लोग विभागों के चक्कर लगाते रहते हैं, उन्हें राशनकार्ड नहीं मिलता। मेरा अनुरोध है कि इसके लिए भी कोई ऑनलाइन सेवा शुरू कर दी जाए ताकि लोगों को भटकना न पड़े। अपने मोबाइल या संपर्क सेंटर में जाकर सुविधा का लाभ ले सकें।