पंजाब के शाही शहर पटियाला में शुक्रवार को करीब चार घंटे लोगों की सांसें अटकी रहीं। इस दौरान शहर की सड़कों पर तलवारें लहराई गईं। खालिस्तान के मुद्दे को लेकर शिव सैनिक और खालिस्तान समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई। शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर तीन बजे तक चला। पुलिस ने दोनों पक्षों को मुश्किल से तितर-बितर कर हालात पर काबू पाया। सवाल है कि पिछले एक हफ्ते से शुक्रवार को शहर में खालिस्तान के मुद्दे को लेकर दोनों तरफ से लोगों के आमने-सामने होने की आशंका थी तो फिर पुलिस ने किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति से निपटने के ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए। सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कुछ दिन पहले शुक्रवार को खालिस्तान का स्थापना दिवस मनाने की घोषणा की थी। जिसके जवाब में शिवसेना (बाल ठाकरे) के प्रदेश कार्यकारी प्रधान हरीश सिंगला ने पत्रकार वार्ता कर शुक्रवार को खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च निकालने का एलान किया था।
पटियाला हिंसक झड़प: चार घंटे अटकी रहीं सभी की सांसें, ईंट-पत्थर चले, तलवारें भी लहराईं, जानें-इसकी वजह
बता दें कि सुबह करीब 11 बजे शिव सैनिकों ने गुरपतवंत पन्नू का पुतला फूंक कर प्रदर्शन किया। इसके विरोध में 12 बजे खालिस्तान समर्थक पहुंच गए और वहां मौजूद पुलिस फोर्स ने दोनों पक्षों को शांत कर हटाया। इसके बाद शिव सैनिक बाजारों से खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च निकालने लगे। जबकि दूसरी तरफ बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक डंडे व तलवारें लेकर दोपहर करीब सवा 12 बजे ऐतिहासिक श्री काली माता मंदिर के बाहर पहुंचे। जहां शिव सैनिक और खालिस्तानी समर्थकों के बीच जमकर ईंट-पत्थर चले। तलवारें लहराई गईं और फायरिंग तक हुई। हालात पर काबू पाने के लिए एसएसपी डॉ. नानक सिंह की अगुवाई में भारी पुलिस फोर्स मौजूद रही। सवाल उठ रहे हैं कि जब शिव सैनिक व खालिस्तानी समर्थक मंदिर के नजदीक आ रहे थे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए मंदिर के सामने वाली सड़क को सील क्यों नहीं किया।
हालांकि इस बारे में एसएसपी डॉ. नानक सिंह ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए मंदिर के सामने वाली सड़क सील की थी। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों ने भीड़ को उत्तेजित कर दिया। इस कारण पुलिस को उन्हें मंदिर के नजदीक आने से रोकने में दिक्कत हुई। एसएसपी ने माना कि पुलिस महकमे के इंटेलीजेंस विंग की तरफ से उन्हें शुक्रवार को हालात खराब होने की आशंका संबंधी इनपुट मिला था। इसलिए पुलिस की तरफ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पटियाला के आईजी राकेश अग्रवाल ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों की ओर से अफवाह फैलाने के कारण यह घटना हुई है। उन्होंने बताया कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहर से फोर्स मंगाई गई है। शहर में फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है। उन्होंने शहर के लोगों को शांति व आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने लोगों को अफवाहों से बचने व पुलिस प्रशासन को शहर में शांति बनाए रखने में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो भी इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानून मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
एक-दूसरे पर लगाए आरोप-प्रत्यारोप
श्री काली माता मंदिर के बाहर हुई हिंसक भिड़ंत के बाद धरने में शामिल बख्शीश सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर खालिस्तानी समर्थकों के काली माता मंदिर में तलवारें लेकर घुसने की जो बात कही जा रही है, वह सरासर गलत है। उन्होंने इस भिडंत में करीब 15 खालिस्तानी समर्थकों के घायल होने की बात कही। दूसरी तरफ शिवसेना नेता हरीश सिंगला ने खालिस्तानी समर्थकों पर मंदिर में घुसने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपियों खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर निष्कासन का पत्र वायरल
इस घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया एक पत्र वायरल हो गया। शिवसेना (बाल ठाकरे) के प्रदेशाध्यक्ष योगराज शर्मा की ओर से जारी इस पत्र में कहा गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के आदेश मुताबिक पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए हरीश सिंगला को पार्टी से निष्कासित किया जाता है। हालांकि, हरीश सिंगला ने इस पत्र को फर्जी करार दिया है।
शिवसेना नेताओं को किया गया नजरबंद
उधर, रोपड़ में शिवसेना पंजाब के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील घनौली सहित सभी नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया। संजीव घनौली के घर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा शिवसेना के जिला प्रधान सचिन धनौली, नंगल के सिटी अध्यक्ष अमरीश आहूजा को उनकी दुकान में ही नजरबंद कर सादी वर्दी में पुलिस के एक हवलदार को तैनात किया है। शिवसेना नेताओं के अनुसार सिख फॉर जस्टिस ने हरियाणा में 29 अप्रैल को सरकारी दफ्तरों के ऊपर खालिस्तानी झंडे फहराने की घोषणा की थी। इसके विरोध में शिवसेना पंजाब ने रोपड़ से अंबाला तक तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की थी।