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क्रेस्ट घोटाले में खुलासा: निगम और स्मार्ट सिटी अधिकारियों की भी थी मिलीभगत, सेक्टर-32 शाखा में खोले गए खाते

संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 25 Mar 2026 01:31 PM IST
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सार

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मुख्य लेखा अधिकारी, मुख्य कार्यकारी प्रबंधक और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से कैपको फिनटेक, आरएस ट्रेडर्स और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नाम की तीन फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं।

Revelations in CREST Scam Corporation and Smart City Officials Also Implicated
scam - फोटो : Istock
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विस्तार

क्रेस्ट से जुड़े करीब 75 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले की जांच में नया खुलासा हुआ है। इस मामले में गिरफ्तार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों रिशव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि सीआरईएसटी के बैंक खाते उनकी सेक्टर-32 स्थित शाखा में उनकी ओर से ही खोले गए थे और इसमें क्रेस्ट के अधिकारियों की भी मिलीभगत थी। 

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जांच में आया है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मुख्य लेखा अधिकारी, मुख्य कार्यकारी प्रबंधक और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से कैपको फिनटेक, आरएस ट्रेडर्स और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नाम की तीन फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं। ये कंपनियां आरोपियों के ड्राइवरों, रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम पर खोली गई थीं ताकि पैसों के लेन-देन का रिकॉर्ड छिपाया जा सके।
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पुलिस रिमांड पेपर के अनुसार बाद में सरकारी फंड को निकालने और इधर-उधर करने के लिए फर्जी कंपनियां बनाई गईं और इन कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये सरकारी खातों से निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर किए गए। पुलिस के अनुसार ये तीनों बैंक अधिकारी वर्ष 2023 से 2025 के बीच सेक्टर-32 शाखा में तैनात थे और खातों के संचालन में इनकी अहम भूमिका थी।

विक्रम वाधवा ने किए कई खुलासे

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सीआरईएसटी के बैंक खातों से 272 अनधिकृत लेन-देन किए गए जिससे 75 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इस मामले में गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा ने भी पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। वाधवा ने बताया कि उसकी पहचान रिशव ऋषि से उसके पिता के माध्यम से हुई थी। बाद में जब रिशव ऋषि बैंक मैनेजर बना तो उसने वाधवा को बताया कि कई सरकारी विभागों के खातों में बड़ी रकम पड़ी रहती है और यदि उसे रियल एस्टेट में निवेश के लिए पैसा चाहिए तो वह सरकारी खातों से बिना ब्याज पैसा उपलब्ध करवा सकता है।


योजना के तहत सरकारी विभागों के खातों से पैसा पहले फर्जी कंपनियों कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के खातों में ट्रांसफर किया जाता था और बाद में वहां से यह पैसा विक्रम वाधवा के बैंक खातों में भेज दिया जाता था। इसके बाद इन पैसों को चंडीगढ़, मोहाली, खरड़ और अन्य जगहों पर रिहायशी और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया। तीन-चार वर्षों में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी में निवेश किया गया।

पुलिस रिमांड पेपर के अनुसार, आरोपियों ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम चंडीगढ़, क्रेस्ट और हरियाणा सरकार के कुछ विभागों के फंड का इस्तेमाल करने की बात भी बताई है। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खातों के स्टेटमेंट के साथ भी धोखाधड़ी की गई। बैंक अधिकारियों अभय कुमार और सीमा धीमान की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर जो बैंक स्टेटमेंट भेजे जाते थे, उनमें केवल अधिकृत लेन-देन दिखाए जाते थे। लेकिन जब बैंक शाखा से स्टेटमेंट की असली हार्ड कॉपी मंगवाई गई तो उसमें अलग लेन-देन सामने आए, जिससे पूरे घोटाले का खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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