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International Youth Day: डिजिटल क्रांति की रोल मॉडल 'मिस्बा हाशमी', पीएम कर चुके हैं सराहना

निरंजन कुमार राणा, यमुनानगर(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 12 Aug 2020 01:58 PM IST
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International Youth Day: Success Story of Digital Revolution Role Model Misbah Hashmi
मिस्बा हाशमी - फोटो : अमर उजाला
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर हम आपको बता रहे हैं उस लड़की के बारे में जो देश में डिजिटल क्रांति की मिसाल बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उसकी सराहना कर चुके हैं।
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International Youth Day: Success Story of Digital Revolution Role Model Misbah Hashmi
मिस्बा हाशमी - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के यमुनानगर जिले के बुडिया गांव में कॉमन सर्विस सेंटर(सीएससी) चलाने वाली मिस्बा हाशमी डिजिटल क्रांति में एक मिसाल है। वह हरियाणा की एकमात्र वीएलई हैं, जिनसे प्रधानमंत्री ने सीधे बातचीत की और उसे युवा एंटरप्रेन्योर के लिए देश का रोल मॉडल कहा। राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद भी अवार्ड देकर मिस्बा को सम्मानित कर चुके हैं।

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International Youth Day: Success Story of Digital Revolution Role Model Misbah Hashmi
मिस्बा हाशमी - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में विद्यार्थियों को केस स्टडी के रूप में मिस्बा की सफलता की कहानी पढ़ाई जा रही है। साथ ही भारत सरकार के पोर्टल पर उनकी सफलता का वीडियो भी अपलोड किया गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और अल्पसंख्यक समुदाय से होने के चलते शुरूआत में उन्हें सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन मिस्बा साहस और दृढ़ संकल्प के साथ सभी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
International Youth Day: Success Story of Digital Revolution Role Model Misbah Hashmi
मिस्बा हाशमी - फोटो : अमर उजाला
नौकरी छोड़ छह साल पहले खोला सीएससी सेंटर
कंप्यूटर साइंस से स्नातक मिस्बा के पिता मोहम्मद इरशाद हाशमी व्यापारी हैं और मां रिटायर्ड शिक्षक हैं। वह अपनी तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। 2013 में डिग्री पूरी होने के बाद उन्होंने एक प्राध्यापिका के रूप में काम करना शुरू कर दिया, लेकिन डिजिटल इंडिया मिशन के तहत जब उसे अटल सेवा केंद्रों के बारे में पता चला तो उसने अपनी नौकरी छोड़ दी और वर्ष 2014 में उसने सीएससी केंद्र स्थापित किया। वह हरियाणा की शीर्ष वीएलई हैं। अब वह सीएससी चलाने के साथ-साथ हर महीने गांव की 100 लड़कियों को निशुल्क सैनिटरी पैड भी वितरित करती हैं।
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मिस्बा हाशमी - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण इलाके में अनपढ़ और बुजुर्ग लोगों का सहारा बनीं
मिस्बा ने बताया कि अशिक्षित, गरीब और वृद्ध व्यक्ति मेरे सीएससी सेंटर में आते हैं, उनके चेहरे पर खुशी देखकर मुझे बहुत संतोष होता है। सीएससी के रूप में मुझे ऐसा विशाल मंच मिला, जिसके द्वारा पैसा और समाज सेवा दोनों कमाया जा सकता है। वह डिजी-पे के माध्यम से ग्रामीणों को पेंशन वितरण सुविधा प्रदान करा रही हैं। एक दिन में उन्होंने डिजी-पे के तहत रिकार्ड 5 लाख रुपये के लेनदेन किए हैं।
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